Yuvraj Mehta death case | Yuvraj Mehta SIT investigation | Noida software engineer death
नोएडा के सेक्टर-150 में पानी से भरे गड्ढे में गिरकर सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले ने गंभीर मोड़ ले लिया है. एसआईटी जांच के पांचवें और आखिरी दिन जांच दल ने नोएडा प्राधिकरण के सेक्टर-6 कार्यालय में दिनभर पूछताछ की. इस दौरान फ्लिपकार्ट डिलीवरी एग्जीक्यूटिव मुनिंदर और उनके पिता से घंटों सवाल-जवाब किए गए.
‘जवान बेटा मुझसे छिन गया’
राजकुमार मेहता ने सीधे तौर पर रेस्क्यू टीमों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि युवराज हादसे के बाद करीब दो घंटे तक जिंदा था और लगातार बाहर निकलने की कोशिश करता रहा. उन्होंने कहा, ‘मेरा बेटा पानी से भरे गड्ढे में गिरने के बाद भी हिम्मत नहीं हारा. वह कार की छत पर चढ़ गया. मोबाइल की फ्लैशलाइट से इशारे करता रहा और मदद के लिए चिल्लाता रहा. वह दो घंटे तक संघर्ष करता रहा. लेकिन रेस्क्यू टीमों की घोर लापरवाही के कारण उसे बचाया नहीं जा सका.’
‘रेस्क्यू टीम ने भगवान भरोसे छोड़ दिया’
युवराज के पिता ने बताया कि वह खुद मौके पर मौजूद थे और अपने बेटे की आवाज सुनते रहे. लेकिन असहाय थे. वह कहते हैं, ‘रेस्क्यू टीम ने मेरे बेटे को भगवान भरोसे छोड़ दिया.’
हालांकि उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से एसआईटी गठित करने के फैसले का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा. राजकुमार मेहता कहते हैं, ‘मेरा बेटा तो वापस नहीं आएगा. हमें कभी पूरा न्याय नहीं मिलेगा. लेकिन अगर उसके नाम पर इतना हो जाए कि जिम्मेदार लोगों को कड़ी से कड़ी सजा मिले और भविष्य में कोई और युवराज ऐसी मौत न मरे. तो शायद उसकी आत्मा को शांति मिले.’
उन्होंने यह भी मांग की कि लापरवाह विभागों और अधिकारियों को किसी भी सूरत में नहीं छोड़ा जाना चाहिए.
फ्लिपकार्ट डिलीवरी एजेंज से SIT की पूछताछ
राजकुमार मेहता ने फ्लिपकार्ट के डिलीवरी एग्जीक्यूटिव मुनिंदर का खास तौर पर आभार जताया. जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना अंधेरी रात में रस्सी बांधकर गड्ढे में उतरने की कोशिश की थी. मुनिंदर ने करीब आधे घंटे तक युवराज को खोजने का प्रयास किया था और यह दावा किया था कि अगर समय पर रेस्क्यू होता. तो युवराज की जान जरूर बच जाती. उन्होंने कहा, ‘मैं मुनिंदर भाई का तहेदिल से शुक्रिया अदा करता हूं. जिसने बिना कुछ सोचे मेरे बेटे को बचाने की कोशिश की.’
उधर एसआईटी ने इस घटना के चश्मदीद फ्लिपकार्ट एजेंट मुनिंदर से भी पूछताछ की. वायरल वीडियो सामने आने के बाद मुनिंदर जांच एजेंसियों के रडार पर आए थे. एसआईटी सूत्रों का कहना है कि उनके बयान पूरे मामले की दिशा तय करने में अहम हो सकते हैं.
कैसे हुई थी युवराज की मौत?
गौरतलब है कि 17 जनवरी को युवराज मेहता की मौत हो गई थी. जब घने कोहरे में उनकी कार फिसलकर सेक्टर-150 में एक बिना बैरिकेडिंग वाले. पानी से भरे गड्ढे में जा गिरी. यह सड़क एक बड़े नाले के ऊपर से गुजरती है और वहां अचानक 90 डिग्री का मोड़ है. हादसे के बाद प्रदेश सरकार ने 19 जनवरी को नोएडा अथॉरिटी के सीईओ को हटा दिया था और एक जूनियर इंजीनियर को बर्खास्त किया गया था.
अब तक इस मामले में तीन बिल्डरों को गिरफ्तार किया जा चुका है और रियल एस्टेट डेवलपर्स एमजेड विजटाउन और लोटस ग्रीन्स के खिलाफ जांच चल रही है. केस में हत्या और पर्यावरण कानूनों के उल्लंघन जैसी गंभीर धाराएं भी जोड़ी गई हैं. पांच दिन की गहन जांच के बाद अब सभी की निगाहें एसआईटी की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि युवराज की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों पर कितनी सख्त कार्रवाई होती है.