45 भाषाओं की मल्लिका, 90s की बनी सबसे भरोसेमंद आवाज, 4 बच्चों के बाप पर हुई लट्टू, शादी के बाद नहीं बनी मां
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45 से ज्यादा भाषाओं में गाने वाली यह सिंगर 90 के दशक में हिंदी सिनेमा की सबसे भरोसेमंद आवाज बन गई थीं.रोमांटिक से लेकर शास्त्रीय गीतों तक, उनके सुर हर दिल को छू जाते थे. करियर के शिखर पर उनकी निजी जिंदगी भी चर्चा में रही, जब वह चार बच्चों के पिता और मशहूर संगीतकार के प्यार में पड़ गईं. शादी के बाद उन्होंने खुद मां न बनने का रास्ता चुना, लेकिन बच्चों को अपनाकर अपने जीवन को पूरी तरह सुर और संवेदनाओं से भर लिया.
8 साल की उम्र में इस सिंगर ने साबित कर दिया था कि संगीत उनके लिए ही बना है नई दिल्ली. हिंदी सिनेमा के 90 के दशक को जिन आवाजों ने पहचान दी, उनमें एक नाम सबसे भरोसेमंद और सुकून देने वाला रहा. 45 से ज्यादा भाषाओं में गाने वाली यह सिंगर सिर्फ सुरों की मल्लिका ही नहीं, बल्कि भावनाओं को जीने वाली कलाकार भी रहीं. रोमांटिक, शास्त्रीय और सेमी-क्लासिकल हर रंग में उन्होंने अपनी अलग छाप छोड़ी. करियर के शिखर पर रहते हुए उनकी निजी जिंदगी भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रही. एक संगीत समारोह में उनकी मुलाकात एक ऐसे महान संगीतकार से हुई, जो पहले से चार बच्चों के पिता थे. उम्र, जिम्मेदारियां और समाज की सोच कुछ भी उनके प्यार के आड़े नहीं आया. उन्होंने बच्चों को अपने दिल से अपनाया और बिना किसी शर्त के रिश्ते को निभाया. शादी के बाद वह खुद मां नहीं बनीं, लेकिन अपने सुरों और परिवार के जरिये उन्होंने एक मुकम्मल और संतुलित जीवन जिया. जानते हैं ये कौन हैं…
‘साजन जी घर आए’, ‘बोल चूड़िया’, ‘अलबेला सजन’ और ‘छाया है जो दिल पर’ जैसे रोमांटिक गाने आज भी लोगों की जुबान पर जिंदा हैं, क्योंकि उन गानों को गाने वाली सिंगर ने सिर्फ गानों को गाया नहीं बल्कि जीया है.हम बात कर रहे हैं कविता कृष्णमूर्ति की. कविता अपने वर्सटाइल सिंगिंग टैलेंट के साथ-साथ सौम्य आवाज के लिए भी जानी जाती हैं. हिंदी सिनेमा को कई रोमांटिक गानों से नवाजने वाली कविता की पर्सनल लाइफ भी फिल्मी लव स्टोरी से कम नहीं है.
45 भाषाओं की मल्लिका
45 से ज्यादा भाषाओं में गाने वाली कविता कृष्णमूर्ति ने 8 साल की उम्र में साबित कर दिया था कि संगीत उनके लिए ही बना है और वो संगीत के बिना अधूरी हैं. अपनी आंटी के कहने पर कविता ने संगीत सीखने का फैसला किया था. तमिल परिवार में 25 जनवरी 1958 को जन्मी कविता ने बलराम पुरी से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ली और मात्र 8 साल की उम्र में अपनी आवाज से लोगों को मंत्रमुग्ध कर पुरस्कार भी जीता. बढ़ती उम्र के साथ संगीत और गहरा होता गया है और सिंगर ने अपनी किस्मत आजमाने के लिए मुंबई का रुख किया.
90s की बनी सबसे भरोसेमंद आवाज
कविता की किस्मत 1971 में चमकी, जब उन्हें लता मंगेशकर के साथ एक बंगाली फिल्म में गाने का मौका मिला. गायक और संगीतकार हेमंत कुमार कविता की आवाज के कायल हो गए और उन्होंने कविता के साथ कई लाइव परफॉर्मेंस दी, जिसके बाद हेमा मालिनी की मां जया चक्रवर्ती ने सिंगर की मुलाकात संगीत निर्देशक लक्ष्मीकांत से कराई. लक्ष्मीकांत और प्यारेलाल की जोड़ी के साथ कविता ने फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ का ‘हवा-हवाई’ गीत गाया और उनकी किस्मत पूरी तरह पलट गई और फिर शुरू हुआ हिट देने का सिलसिला 90 के दशक में कविता की गिनती बड़े प्लेबैक सिंगर्स में होने लगी.
डॉ. एल. सुब्रमण्यम से उनकी लव स्टोरी फिल्मी है.
4 बच्चों के पिता पर आया दिल
इस बीच कविता का दिल 4 बच्चों के पिता पर अटक गया. कर्नाटक के प्रसिद्ध वायलिन वादक और संगीतकार डॉ. एल. सुब्रमण्यम से उनकी पहली मुलाकात एक संगीत समारोह में हुई थी.दोनों को साथ में एक गाना करने का मौका मिला. कविता खुद बताती है कि उन्होंने सुब्रमण्यम के चार बच्चों का ध्यान बहुत अच्छे से रखा था और यही वजह थी कि हमारा रिश्ता इतना मजबूत हुआ और हमने शादी करने का फैसला किया.
सौतन के बच्चों को माना अपनी संतान
डॉ. एल. सुब्रमण्यम की पहली पत्नी का निधन हो चुका था और चार बच्चों के साथ संगीतकार के लिए करियर को संभालना मुश्किल हो रहा था. ऐसे में हर मौके पर बिना किसी शिकायत या उम्मीद के कविता ने बच्चों का ध्यान अपने बच्चों की तरह उन्हें प्यार दिया, जिसके बाद 1999 में दोनों ने शादी करने का फैसला लिया. आज कविता की अपनी कोई संतान नहीं है. वे संगीतकार के चारों बच्चों के साथ खुशी-खुशी रह रही हैं.
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शिखा पाण्डेय News18 Digital के साथ दिसंबर 2019 से जुड़ी हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 12 साल से ज्यादा का अनुभव है. News18 Digital से पहले वह Zee News Digital, Samachar Plus, Virat Vaibhav जैसे प्रतिष्ठ…और पढ़ें