‘मुझे भैंस का मीट बताकर थमा दिया गोमांस’, हाईकोर्ट में नूर मोहम्मद ने दी दलीज, जज ने एक मिनट में सीधा कर दिया

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Punjab Haryana News: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने 50 किलो गोमांस के साथ पकड़े गए नूर मोहम्मद की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है. आरोपी ने दावा किया था कि वह इसे भैंस का मांस समझकर लाया था, जिसे कोर्ट ने चालाकी भरी दलील करार दिया. फोरेंसिक रिपोर्ट में बीफ की पुष्टि होने के बाद जस्टिस आराधना साहनी ने कहा कि ऐसे कृत्य सांप्रदायिक सद्भाव के लिए खतरा हैं. मामले की तह तक जाने के लिए पुलिस पूछताछ जरूरी है.

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'भैंस का मीट बताकर थमाया गोमांस', नूर मोहम्मद ने दी दलीज, जज ने सीधा कर दियाकोर्ट ने सख्‍त रुख अख्तियार किया. (AI Image)

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने गोमांस तस्करी के आरोपी नूर मोहम्मद की अग्रिम जमानत याचिका को सख्त टिप्पणियों के साथ खारिज कर दिया है. कोर्ट ने आरोपी के उस तर्क को चालाकी भरी चाल बताया जिसमें उसने कहा था कि उसे भैंस का मांस बताकर धोखे से गोमांस दिया गया. न्यायमूर्ति आराधना साहनी ने चंडीगढ़ के बुड़ैल निवासी 62 वर्षीय नूर मोहम्मद की याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि इस मामले में हिरासत में लेकर पूछताछ बेहद जरूरी है. यह मामला 19 जुलाई 2025 का है जब चंडीगढ़ पुलिस ने एक स्कूटर से 50 किलोग्राम मांस बरामद किया था. शुरुआत में आरोपी ने दावा किया था कि यह भैंस का मांस है और इसके समर्थन में पंजाब के मलेरकोटला और यूपी के सहारनपुर के बिल भी पेश किए थे.

मुझे धोखे से गोमास थमाया गया
हालांकि हैदराबाद स्थित नेशनल मीट रिसर्च इंस्टीट्यूट की फोरेंसिक रिपोर्ट ने आरोपी के दावों की पोल खोल दी. रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि बरामद मांस बॉस इंडिकस (सांड/बैल) यानी गोमांस था. आरोपी के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि उनके मुवक्किल को विक्रेताओं ने गुमराह किया था और वह इसे भैंस का मांस ही समझ रहा था. इस पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यह मान लेना गले नहीं उतरता कि दो अलग-अलग राज्यों के विक्रेताओं ने एक साथ उसे गुमराह किया होगा. कोर्ट ने इसे खुद को बचाने की एक लास्ट मिनट कोशिश करार दिया.

धार्मिक भावनाओं को किया आहत
हाई कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि पंजाब गौवध निषेध अधिनियम, 1955 के तहत यह एक गंभीर अपराध है. भारतीय संस्कृति में गाय का स्थान पूजनीय है और इस तरह की गतिविधियां न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करती हैं बल्कि सार्वजनिक व्यवस्था और सांप्रदायिक सद्भाव के लिए भी खतरा पैदा कर सकती हैं. कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की इस दलील से सहमति जताई कि आरोपी से पूछताछ कर इस पूरे रैकेट, वध के स्थान और अन्य खरीदारों का पता लगाना अनिवार्य है.

सवाल-जवाब
1. आरोपी ने अपनी सफाई में क्या तर्क दिया था?
आरोपी ने दावा किया था कि उसने मलेरकोटला और सहारनपुर से भैंस का मांस खरीदा था और विक्रेताओं ने उसे धोखा दिया.

2. फोरेंसिक रिपोर्ट में क्या खुलासा हुआ?
हैदराबाद की लैब रिपोर्ट में साफ हुआ कि मांस ‘बॉस इंडिकस’ प्रजाति का था, जो कानूनी रूप से प्रतिबंधित बीफ की श्रेणी में आता है.

3. हाई कोर्ट ने जमानत देने से क्यों मना किया?
कोर्ट ने कहा कि अग्रिम जमानत एक ‘असाधारण राहत’ है और इस मामले में आरोपी की हिरासत में पूछताछ जरूरी है ताकि बड़े रैकेट का खुलासा हो सके.

4. इस मामले में किन धाराओं के तहत केस दर्ज है?
आरोपी पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने (BNS 299) और पंजाब गौवध निषेध अधिनियम, 1955 की धाराओं के तहत मामला दर्ज है.

5. कोर्ट ने सामाजिक सुरक्षा पर क्या कहा?
जस्टिस साहनी ने चेतावनी दी कि अगर ऐसी गतिविधियों को नहीं रोका गया, तो ये समाज में शांति और भाईचारे को बिगाड़ सकती हैं.

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Sandeep Gupta

पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्‍त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्‍कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें

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