Bangladesh Ganga River new Barrage china Teesta Master Plan near chicken neck muhammad yunus xi jinping 7 sisters | चिकन नेक के पास तीस्ता पर चीन की हरकत, गंगा पर नया बराज, यूनुस का जिनपिंग के सामने दिया वो बयान, खौफनाक है प्लानिंग
भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारे से जुड़ी फरक्का संधि को रीन्यू करने पर बातचीत इस साल निर्णायक मोड़ पर है, लेकिन दोनों देशों के बीच संबंधों में बढ़े तनाव और आपसी अविश्वास के चलते वार्ताएं ठप सी दिखाई दे रही हैं. इसी बीच बांग्लादेश द्वारा गंगा नदी पर एक नया बैराज बनाने की योजना ने रीजनल वॉटर पॉलिटिक्स में नई हलचल पैदा कर दी है. यह परियोजना न केवल दोनों देशों के रिश्तों को प्रभावित कर सकती है, बल्कि दक्षिण एशिया में जल संसाधनों को लेकर भविष्य की कूटनीति की दिशा भी तय कर सकती है. बांग्लादेश जल विकास बोर्ड (BWDB) ने लंबे समय से अटकी पद्मा बैराज परियोजना को अब अमल में लाने की तैयारी शुरू कर दी है. करीब 50443.64 करोड़ टका (₹37836 करोड़) की लागत वाली इस परियोजना का उद्देश्य मानसून के दौरान आने वाले अतिरिक्त जल को संग्रहित कर सालभर देश के दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पश्चिम क्षेत्रों में जल आपूर्ति सुनिश्चित करना है. पद्मा नदी को भारत से बांग्लादेश में प्रवेश करने के बाद गंगा का ही विस्तार माना जाता है. पद्मा बांग्लादेश की जीवनरेखा कही जाती है. इसपर लाखों लोग निर्भर करते हैं.
फरक्का बैराज क्या है… 5 प्वांइट में जानें
- स्थान और उद्देश्य: फरक्का बैराज पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद और मालदा जिलों में गंगा नदी पर स्थित है. इसका मुख्य उद्देश्य गंगा के पानी को भागीरथी-हुगली नदी प्रणाली में मोड़कर कोलकाता बंदरगाह की नौवहन क्षमता बनाए रखना है.
- संरचना और आकार: यह गंगा पर बना 2,245 मीटर लंबा बैराज है, जिसमें सड़क और रेल पुल की सुविधा भी है. यह देश के सबसे बड़े बैराजों में से एक माना जाता है
- फीडर कैनाल की भूमिका: बैराज से निकलने वाली 38.38 किमी लंबी फीडर कैनाल की क्षमता 40,000 क्यूसेक पानी ले जाने की है, जिसका तल सूएज़ नहर से भी चौड़ा बताया जाता है.
- नौवहन और नियंत्रण व्यवस्था: परियोजना में जहाजरानी के लिए लॉक सिस्टम, नियंत्रण टावर, नेविगेशन लाइट्स और अन्य बुनियादी ढांचे शामिल हैं, जिससे नदी यातायात सुचारु बना रहता है.
- कटाव नियंत्रण और सुरक्षा कार्य: फरक्का बैराज परियोजना के तहत गंगा के अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम इलाकों में कटाव रोकने, तटबंध बनाने और जल प्रबंधन के लिए व्यापक सुरक्षा कार्य किए जाते हैं.
फरक्का पर अटकी बात
भारत और बांग्लादेश के बीच 1996 में हुई फरक्का जल संधि इस वर्ष समाप्त हो रही है और इसे नवीनीकरण की आवश्यकता है. यह संधि हर साल 1 जनवरी से 31 मई तक फरक्का बैराज पर गंगा के जल के बंटवारे का प्रावधान करती है, लेकिन बदले हालात में दोनों देशों की प्राथमिकताएं बदल गई हैं. बांग्लादेश चाहता है कि उसे शुष्क मौसम में गारंटीड जल प्रवाह मिले, जबकि भारत अपनी बढ़ती घरेलू जरूरतों, जलवायु परिवर्तन और खासकर पश्चिम बंगाल की मांगों को ध्यान में रखते हुए संधि में संशोधन चाहता है. इन मतभेदों के चलते अब तक ठोस प्रगति नहीं हो सकी है. डाउनस्ट्रीम गंगा नदी पर नया बैराज बनाने के बांग्लादेश के कदम को भारत पर जारी निर्भरता को खत्म करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. ढाका अब जल सुरक्षा के मुद्दे पर भारत पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहता और अपने संसाधनों से समाधान तलाशने की कोशिश कर रहा है.
India-Bangladesh Ganga Water Treaty: बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के समक्ष भारत के ‘7 सिस्टर्स’ का उल्लेख किया था. उसके बाद पिछले दिनों चीनी प्रतिनिधि ने चिकन नेक के करीब तीस्ता नदी का जायजा लिया है. (फाइल फोटो/PTI)
चिकन नेक पर नजर
सिलीगुड़ी कॉरिडोर या चिकन नेक पर चीन की नजर 1962 के युद्ध से ही है. उस वक्त भी चीन ने इस कॉरिडोर को बाधित कर भारत को नॉर्थईस्टर्न स्टेट्स से काटने की कोशिश की थी, लेकिन नाकाम रहा था. शेख हसीना सरकार की तख्ता पलट के बाद अब मोहम्मद यूनुस की नजर भी चिकन नेक को लेकर टेढ़ी है. वे इस क्षेत्र में लगातार साजिश कर रहे हैं. चिकन से कुछ ही किलोमीटर दूर स्थित लालमोनिरहाट में एयरबेस को अपग्रेड करने के लिए ढाका ने चीन को आमंत्रित किया है. अब तीस्ता नदी के बहाने रणनीतिक और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण इस कॉरिडोर को लेकर साजिश रची जा रही है. दरअसल, चीन पहले से ही बांग्लादेश के साथ तीस्ता मास्टर प्लान में साझेदार है. हाल ही में ढाका में चीन के राजदूत याओ वेन ने उत्तरी बांग्लादेश के रंगपुर क्षेत्र का दौरा किया, जो पश्चिम बंगाल के रणनीतिक सिलीगुड़ी कॉरिडोर के निकट है. इस दौरे में उनके साथ अंतरिम सरकार की जल संसाधन सलाहकार सैयदा रिजवाना हसन भी थीं. इससे भारत की सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं. भारत इस घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है, क्योंकि चीन की बढ़ती मौजूदगी केवल आर्थिक या तकनीकी सहयोग तक सीमित नहीं, बल्कि इसके व्यापक भू-राजनीतिक मतलब भी हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेशी वॉटर प्रोजेक्ट्स में चीन की भागीदारी से भारत-बांग्लादेश संबंधों में एक नया रणनीतिक आयाम जुड़ सकता है.
यूनुस की खतरनाक साजिश
यूनुस भारत के खिलाफ पद संभालने के बाद से ही साजिश रच रहे हैं. चीनी दूत के चिकन नेक के पास दौरा करने से पहले मोहम्मद यूनुस खुद बीजिंग की यात्रा पर गए थे. चीन दौरे पर बांग्लादेश सरकार के मुख्य सलाहकार यूनुस ने द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से खतरनाक बातें कहीं. यूनुस ने चीन की धरती पर कहा कि इस क्षेत्र के समंदर का एक मात्र गार्जियन ढाका है. चीन को अपने देश में निवेश करने का न्योता देते हुए मोहम्मद यूनुस ने भारत की मजबूरियां गिनाईं और चीन को लुभाते हुए कहा कि उसके पास बांग्लादेश में बिजनेस का बड़ा मौका है. मोहम्मद यूनुस ने भारत के पूर्वोत्तर राज्यों का जिक्र करते हुए कहा था कि भारत के सात राज्य यानी सेवन सिस्टर्स चारों ओर से भूमि से घिरे हुए हैं. यह भारत का लैंड लॉक्ड क्षेत्र है. उनके पास समुद्र तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है. भारत ने उनके इस बयान और उनकी मंशा पर पैनी नजर रखे हुए है. इस क्षेत्र में चीन की घुसपैठ से भारत की समस्याएं बढ़ सकती हैं.