700-700 रुपये में बेची कहानी, लगातार दीं 10 हिट फिल्में, दस साल किया राज, एक मूवी ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड – andaaz Haathi mere saathi zanjeer Salim Javed gave 10 superhit movies continuesly sold script in Rs 700 Iconic sholay scripted history world record
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Salim Javed Best Films : यह कहानी बॉलीवुड के उन दो सितारों की है जिन्होंने बॉलीवुड इंडस्ट्री का नक्शा ही बदल दिया. बॉलीवुड में 10 साल से ज्यादा समय तक एकतरफा राज किया.अपने दम पर स्टार बनाए. लगातार 10 फिल्में हिट दीं. शुरुआत में अपनी कहानी 700 रुपये में बेची. जब एक बार सफलता मिली तो पीछे मुड़कर नहीं देखा. हिंदी सिनेमा को कई आइकॉनिक फिल्में दी. एक फिल्म तो ऐसी रही जो हिंदी सिनेमा का पर्याय है. आज हम बॉलीवुड के ऐसे ही दो सितारों से जुड़ी दिलचस्प बातें पर चर्चा करेंगे.

लगातार 10 हिट फिल्में किसी भी फिल्मकार का सपना होता है. फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े हर शख्स का सपना होता है. फिर चाहे वह डायरेक्टर हो या प्रोड्यूसर. एक्टर हो या राइटर. हर किसी की चाहत होती है कि उसकी फिल्में हिट-सुपरहिट हों पर भाग्य हर किसी का साथ नहीं देता. 60-70 के दशक में बॉलीवुड में ऐसे दो सितारे आए जिन्होंने इंडस्ट्री के समीकरण बदल दिए. दोनों ने अपनी जादुई कलम से ऐसे किरदार गढ़े कि हिंदी सिनेमा की तस्वीर ही बदल गई. लगातार 10 हिट फिल्में दीं. हैरानी की बात यह है कि दोनों ने स्ट्रगल के समय अपनी कहानियां 700 से लेकर हजार रुपये में बेचीं. हम बात कर रहे हैं स्क्रीनप्ले राइटर सलीम-जावेद की.

सलीम खान-जावेद अख्तर किसी पहचान के मोहताज नहीं है. दोनों भारतीय सिनेमा के पहले ऐसे स्क्रीनराइटर हैं जिन्हें स्टार का स्टेटस मिला. दोनों ने 1971 से लेकर 1987 तक लगभग 24 फिल्मों में एकसाथ काम किया. इनमें से 20 फिल्में सफल रहीं. ऐसी सफलता किसी और स्क्रीनप्ले राइटर जोड़ी को नसीब नहीं हुई.

24 नवंबर 1935 को इंदौर में जन्मे सलीम खान हीरो बनने का सपना लेकर मुंबई पहुंचे थे. डायरेक्टर के. अमरनाथ ने उन्हें मुंबई आने का ऑफर दिया था. सलीम खान ने लगभग सात साल तक फिल्मों में छोटे-मोटे रोल किए लेकिन मुकाम हासिल नहीं कर पाए. वो तीसरी मंजिल (1966), सरहदी लुटेरा (1966) और दीवाना (1967) जैसी फिल्मों में नजर आए. 25 फिल्मों में काम करने के बाद उन्होंने स्क्रिप्ट राइटिंग में हाथ आजमाए. राइटर अबरार अल्वी के साथ काम करने लगे. 1969 में ‘दो भाई’ फिल्म के लिए स्क्रिप्ट राइटिंग की. काफी सराहना मिली.
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17 जनवरी 1945 को भोपाल में जन्मे जावेद अख्तर राइटर बनने का सपना लेकर 1964 में मुंबई पहुंचे थे. उनके पिता<br />जानिसार अख़्तर प्रसिद्ध उर्दू कवि और गीतकार थे. फिल्मों में सक्रिय थे. जावेद अख्तर ने अपनी शुरुआती जिंदगी में कई जासूसी नॉवेल पढ़े. दिलीप कुमार की आरजू (1950), आन (1952), बिमल रॉय की दो बीघा जमीन (1953), राज कपूर श्री 420 (1955) की फिल्में देखीं. फिल्मों में डायलॉग लिखना शुरू किया. शुरुआत में सफलता नहीं मिली. फिर वो सलीम खान के संपर्क में आए.

सलीम खान ने अपने एक इंटरव्यू में जावेद अख्तर के साथ जोड़ी बनाने के सवाल पर जवाब देते हुए कहा था, ‘मुझमें लोगों का टैलेंट पहचानने की क्षमता है. मैं जब काम कर रहा था तो जावेद अख्तर असिस्टेंट थे. मुझे इनमें टैलेंट दिखा. ये डायरेक्टर बनना चाहते थे. मैं राइटर बन चुका था. मेरी एक फिल्म भी बतौर राइटर रिलीज हो चुकी थी. मुझे भी एक पार्टनर की जरूरत थी. यह सब अचानक हुआ. कभी सोचा नहीं था.’

जावेद अख्तर ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘मैं डायरेक्टर बनने आया था. मुझे पहला काम कमाल अमरोही ने दिया था. ‘सरहदी लुटेरा’ फिल्म के लिए पहली बार डायलॉग लिखे. यही पर मेरी मुलाकात सलीम खान से हुई. प्रोड्यूसर एसएम सागर के लिए पहली बार 5000 रुपये में स्क्रीनप्ले बनाया. फिल्म में क्रेडिट नहीं मिला. फिर हम सिप्पी फिल्म्स के स्टोरी राइटिंग डिपार्मेंट में काम करने लगे. 750 रुपये सैलरी मिलती थी. यहीं पर हमारी मुलाकात राजेश खन्ना से हुई थी. सीता और गीता में पहली बार हमारे डायलॉग आए.’

सलीम खान ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्होंने अपने करियर में 10 लगातार हिट-सुपरहिट फिल्में दीं. यह भी कहा कि इन फिल्मों के लिए उन्हें पैसे बहुत कम मिले. सलीम खान ने कहा था, ‘अंदाज, सीता और गीता फिल्म के लिए सिर्फ 750 रुपये मिले थे. यादों की बारात के लिए 25000 रुपये मिले थे. हाथी मेरे साथी, जंजीर,मजबूर, हाथ की सफाई, शोले, दीवार जैसे 10 लगातार हिट फिल्में हमने दीं.’

यह भी एक संयोग है कि सलीम-जावेद ने अपनी पर्सनल लाइफ में दो-दो शादियां की. ‘जादू’ के नाम से मशहूर जावेद अखतर ने 1984 में पहली बीवी हनी ईरानी को तलाक देकर एक्ट्रेस शबाना आजमी से दूसरा निकाह कर लिया था. दोनों की 1972 में शादी हुई थी. हनी ईरानी ने ‘फिल्मफेयर’ को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि शबाना आजमी की वजह से तलाक नहीं हुआ था. असल वजह कुछ और ही थी. हमें ‘सीता और गीता के दौरान प्यार हुआ. उन्होंने मजाक-मजाक में मुझे प्रप्रोज किया. हनी ईरान ने तलाक की वजह तो नहीं बताई. सिर्फ इतना ही कहा कि शायद वो मुझसे कुछ बिल्कुल अलग चाहते थे. सलीम खान ने भी 1980 में हेलन से दूसरी शादी कर ली. इससे पहले 1964 में उन्होंने सुशीला चरक से निकाह किया था. सुशीला ने अपना नाम बदलकर सलमा खान रख लिया था. 1982 में सलीम-जावेद की जोड़ी टूट गई. जावेद अख्तर ने फिर बेताब, अर्जुन जैसी फिल्मों की स्क्रिप्ट अकेले लिखी. वहीं सलीम खान ने ‘नाम’ फिल्म की कहानी अलग होने के बाद लिखी. दोनों के परिवारों का आज बॉलीवुड में सिक्का चलता है.