Delhi Crime News- 22 लोकेशन, 100 CCTV और एक धुंधली तस्वीर! आखिर कैसे धरा गया मासूम के साथ गंदा काम करने वाला ‘दरिंदा’?

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नई दिल्ली: एक टूटी हुई पत्थर की दीवार, जंगल की ओर जाती एक संकरी पगडंडी. जमीन पर पड़ी मासूम की चप्पलें और CCTV में कैद एक धुंधली-सी तस्वीर. दिल्ली पुलिस के सामने न कोई नाम था, न गाड़ी का नंबर. बस कुछ बिखरे सुराग थे जो किसी पहेली की तरह जुड़े जाने बाकी थे. 22 लोकेशन, 100 से ज्यादा कैमरे और घंटों की मेहनत के बाद जिस दरिंदे तक पुलिस पहुंची उसकी क्राइम कुंडली हैरान कर देने वाली थी. यह वही मामला है जिसने दिल्ली को अंदर तक झकझोर दिया.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार एक 10 साल की बच्ची, जो ट्रैफिक सिग्नल पर फूल बेचकर परिवार का सहारा बनती थी, उसी मासूमियत का फायदा उठाकर उसे अगवा किया गया. आरोपी ने चालाकी से भरोसा जीता. फिर अंधेरे में उसे जंगल की ओर ले गया. लेकिन शायद उसे अंदाजा नहीं था कि उसकी छोड़ी हुई एक-एक निशानी उसका पीछा करेगी. और आखिरकार उसे सलाखों के पीछे पहुंचा देगी.

क्या है पूरा मामला?

यह घटना 11 जनवरी की रात मध्य दिल्ली के प्रसाद नगर इलाके में हुई. पीड़िता ने पुलिस को बताया कि एक ई-रिक्शा चालक ने उसे चाय पिलाने का लालच दिया. भरोसा दिलाया, फिर उसे एक सुनसान, जंगलनुमा इलाके में ले गया. वहां उसके साथ दरिंदगी की गई और उसे बेहोशी की हालत में छोड़ दिया गया. बाद में गंभीर हालत में बच्ची को अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज और काउंसलिंग के बाद उसे डिस्चार्ज किया गया.

पहली चुनौती: न नाम, न नंबर

पुलिस के सामने सबसे बड़ी दिक्कत यही थी कि आरोपी का कोई पहचान डिटेल मौजूद नहीं था. न ई-रिक्शा का रजिस्ट्रेशन नंबर. न आरोपी का नाम. पीड़िता भी सदमे में थी लेकिन उसने अपने आसपास की कुछ झलकियां याद रखी थीं. एक नीले रंग का कमरा. टूटा हुआ एंट्री गेट. यही बिखरे टुकड़े जांच की पहली कड़ी बने.

कैसे बिछाया गया जांच का जाल?

डीसीपी सेंट्रल अनंत मित्तल ने तीन अलग-अलग टीमें गठित कीं. पहली टीम ने करीब 20 वर्ग किलोमीटर इलाके में 22 संभावित लोकेशन खंगालीं. दूसरी टीम ने 100 से ज्यादा CCTV कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की. तीसरी टीम ई-रिक्शा स्टैंड्स पर निगरानी में जुटी. घंटों की फुटेज, सैकड़ों चेहरे लेकिन पुलिस को तलाश थी सिर्फ एक लाल ई-रिक्शा की जिसकी छत सफेद थी.

धुंधली तस्वीर बनी सबसे बड़ा सुराग

प्रोफेसर राम नाथ विज मार्ग के एक कैमरे में वही लाल ई-रिक्शा कैद हुआ. समय भी वही था, रास्ता भी वही. इसके बाद पुलिस जंगल के उस हिस्से तक पहुंची जहां एक टूटी दीवार से अंदर जाने का रास्ता था. वहीं पीड़िता की चप्पलें मिलीं. इससे क्राइम सीन कन्फर्म हो गया. फॉरेंसिक टीम ने रात 11 बजे से 1 बजे के बीच आरोपी की मूवमेंट ट्रैक की.

आखिर कैसे हुई गिरफ्तारी?

पुलिस ने करोल बाग और राजेंद्र प्लेस के ई-रिक्शा स्टैंड्स पर छानबीन तेज की. संदिग्ध ड्राइवरों की तस्वीरें साझा की गईं. आखिरकार राजेंद्र प्लेस के एक पेट्रोल पंप के पास वही ई-रिक्शा मिला. आरोपी पुलिस को देखकर भागने लगा, लेकिन पीछा कर उसे दबोच लिया गया. उसकी पहचान यूपी के फर्रुखाबाद निवासी 25 वर्षीय दुर्गेश के रूप में हुई. पूछताछ में उसने जुर्म कबूल किया और खून से सने कपड़े भी बरामद कराए गए.

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