डायरेक्टर ने बनाई ऐसी फिल्म, लोग कहने लगे डिजास्टर, जब रिलीज हुई तो 5 साल थियेटर पर किया राज

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हम जिस डायरेक्टर की बात कर रहे हैं, उनका जन्म पाकिस्तान के कराची में हुआ था. उन्होंने एक से बढ़कर एक फिल्में डायरेक्टर कीं, लेकिन एक फिल्म ने उनकी किस्मत पलट दी. लोग उसे फ्लॉप बता रहे थे, पर वह 5 साल तक थियेटर से नहीं उतरी.

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डायरेक्टर ने बनाई ऐसी फिल्म, लोग कहने लगे डिजास्टर, जब रिलीज हुई तो रचा इतिहासफिल्म 1975 में रिलीज हुई थी.

नई दिल्ली: दर्शकों के लिए कुछ फिल्में उनकी जिंदगी का खूबसूरत लम्हा बन जाती हैं. उनसे जुड़ी कहानियां और किस्से जिंदगी भर उन्हें लुभाते रहते हैं. ऐसी फिल्में अमर होती हैं. ऐसी ही एक कालजयी रचना है ‘शोले’. आज इस फिल्म के निर्देशक रमेश सिप्पी का जन्मदिन है. वे अपनी कहानियों, भव्यता और तकनीकी इनोवेशन के लिए मशहूर रहे हैं. रमेश सिप्पी ने बॉलीवुड को वह गौरव दिलाया, जिसकी गूंज आज भी सुनाई देती है.

रमेश सिप्पी का जन्म 23 जनवरी 1947 को कराची (पाकिस्तान) में हुआ था. विभाजन के बाद उनका परिवार मुंबई आकर बस गया. उनके पिता जीपी सिप्पी फिल्म जगत के एक मशहूर निर्माता थे. फिल्मी माहौल में बड़े हुए रमेश ने महज 6 साल की उम्र में फिल्म ‘शहंशाह’ में बाल कलाकार के रूप में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी, लेकिन उनकी नियति कैमरे के सामने नहीं बल्कि कैमरे के पीछे इतिहास रचना थी.

‘अंदाज’ से ‘सीता और गीता’ तक
रमेश सिप्पी ने 1971 में फिल्म ‘अंदाज’ के साथ बतौर निर्देशक अपनी पारी शुरू की. शम्मी कपूर और हेमा मालिनी स्टारर फिल्म ने उन्हें रातों-रात पहचान दिलाई. इसके बाद, 1972 में आई ‘सीता और गीता’ ने उनकी सफलता पर मुहर लगा दी. हेमा मालिनी के डबल रोल वाली इस फिल्म ने साबित कर दिया कि रमेश सिप्पी मास एंटरटेनमेंट और मजबूत कहानी के तालमेल को बखूबी समझते हैं.

‘शोले’: एक ऐसा जादू जो 5 साल तक नहीं उतरा
1975 में रमेश सिप्पी ने ‘शोले’ रिलीज की, जिसे भारतीय सिनेमा का ‘करीकुलम’ माना जाता है. गब्बर, ठाकुर, जय-वीरू और बसंती जैसे किरदार आज भी जीवित हैं. ‘जो डर गया, समझो मर गया’ जैसे डायलॉग्स आज भी लोगों की जुबां पर हैं. रिलीज के वक्त कई आलोचकों ने इसे ‘डिजास्टर’ कहा था, लेकिन दर्शकों के प्यार ने इसे लगातार 5 साल तक सिनेमाघरों में चलाकर इतिहास रच दिया. अमजद खान द्वारा निभाया गया गब्बर सिंह का किरदार भारतीय सिनेमा का सबसे दमदार विलेन बना.

‘शक्ति’ से ‘सागर’ तक का गौरवशाली सफर
रमेश सिप्पी ने ‘शोले’ के बाद भी कई बेहतरीन फिल्में दीं. शक्ति में उन्होंने दिलीप कुमार और अमिताभ बच्चन जैसे दो महानायकों को एक साथ पर्दे पर उतारा. ऋषि कपूर, डिंपल कपाड़िया और कमल हासन के साथ एक खूबसूरत संगीतमय प्रेम कहानी पेश की, जिसे नाम दिया-सागर. शान और अकेला जैसी फिल्मों में उन्होंने अपनी भव्य मेकिंग की शैली को बरकरार रखा.

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Abhishek Nagar

अभिषेक नागर News 18 Digital में Senior Sub Editor के पद पर काम कर रहे हैं. वे News 18 Digital की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. वे बीते 6 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे News 18 Digital से पहल…और पढ़ें

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