Jaya Ekadashi 2026 Pitro Ke Upay | pitron ko bhoot pret pishach yoni se mukti dilane ka upay | जया एकादशी पर पितरों के लिए भूत-पिशाच योनि से मुक्ति का उपाय

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Jaya Ekadashi 2026 Pitro Ke Liye Upay: इस साल की जया एकादशी 29 जनवरी गुरुवार को है. जया एकादशी को पितरों की मुक्ति के लिए उपाय करते हैं. जिन लोगों के पितर भूत-पिशाच योनि में होते हैं, वे इससे मुक्ति का मार्ग तलाशते हैं या उसके कष्टों को भोगते हैं. पितर इससे मुक्ति के लिए अपनी संतान की शरण में आते हैं. वे हर अमावस्या को पृथ्वी पर अपने संतान से तृप्ति की उम्मीद से आते हैं, लेकिन जो लोग अपने पितरों को तृप्त नहीं करते हैं, उनको वे तरह-तरह परेशान करते हैं. उनकी वजह से असाध्य रोग, परिवार के सदस्यों का एक-एक करके ​बीमार होना, काम में असफलता, अचानक धन संकट आदि का होना पितरों की नाराजगी का संकेत होते हैं. जया एकादशी के दिन आप अपने पितरों को भूत-पिशाच योनि से बाहर निकालने का उपाय कर सकते हैं.

जया एकादशी पर पितरों के लिए उपाय

काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट के अनुसार, जया एकादशी व्रत की महिमा का वर्णन पद्म पुराण में मिलता है. जब धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से जया एकादशी व्रत यानि माघ शुक्ल एकादशी के महत्व के बारे में पूछा था. तब श्री​कृष्ण ने उनसे कहा कि जया एकादशी का व्रत जीवों को भूत, प्रेत, पिशाच जैसी योनियों से मुक्ति प्रदान करता है. जो लोग जया एकादशी का व्रत विधिपूर्वक करते हैं, उनको श्रीहरि के आशीर्वाद से मोक्ष मिल जाता है. उनके पाप मिट जाते हैं.

पितरों को मुक्ति दिलाने की विधि

जया एकादशी के एक दिन पूर्व से सात्विक भोजन करें. मांस, शराब, लहसुन, प्याज आदि जैसी तामसिक वस्तुओं से दूर रहें. जया एकादशी को प्रात:काल में उठकर स्नान आदि से निवृत हो जाएं. साफ कपड़े पहनें, उसके बाद हाथ में जल लेकर जया एकादशी व्रत, विष्णु पूजा और पितरों की मुक्ति का संकल्प लें.

दिन में आप विधि विधान से भगवान विष्णु की पूजा करें. रात्रि के समय में जागरण करें. अगले दिन सुबह में स्नान करके पूजा कर लें. अन्न, वस्त्र, काले तिल, कंबल आदि का दान करें.

उसके बाद भगवान विष्णु के समक्ष खड़े होकर प्रार्थना करें कि आपके जो भी पितर इस समय में भूत, प्रेत या पिशाच योनि में भटक रहें हैं, उन सभी को आप इस जया एकादशी व्रत से अर्जित पुण्य को दान कर रहे हैं. हे प्रभु! अपनी कृपा से मेरे सभी पितरों को मुक्ति प्रदान करें, उनको अपनी शरण में ले लें, ताकि कष्टों से मुक्ति मिल सके. प्रार्थना के बाद पारण करके व्रत को पूरा करें.

इंद्र देव ने गंधर्व माल्यवान और अप्सरा पुष्पवती को पिशाच योनि में जाने का श्राप दिया था, तो उन दोनों का जीवन कष्टमय हो गया था. पिशाच योनि से मुक्ति के लिए माल्यवान और पुष्पवती ने अनजाने में ही जया एकादशी का व्रत​ किया, जिससे उनका उद्धार हो गया. हरि कृपा से वे पिशाच योनि से मुक्त हो गए और स्वर्ग चले गए.

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