पश्चिम बंगाल SIR: दादा-दादी, चाचा-चाची हो गए थे ‘स्‍वर्गवासी’, राज खुला तो सब सन्‍न, अब होगा असली काम – west bengal sir exercise 97 voters wrongly marked dead in draft electoral roll form6 election commission correct tmc bjp congress

Share to your loved once


Agency:एजेंसियां

Last Updated:

West Bengal SIR: वोटर लिस्‍ट को सुधारने के लिए चुनाव आयोग की ओर से देश के कई राज्‍यों में व‍िशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान की शुरुआत की है. पश्चिम बंगाल में भी इसे अमल में लाया गया. इसमें कई तरह की खामियां सामने आ रही हैं. चुनाव आयोग की ओर से उसमें सुधार भी किया जा रहा है.

बंगाल SIR: दादा-दादी, चाचा-चाची हो गए थे 'स्‍वर्गवासी', राज खुला तो सब सन्‍नWest Bengal SIR: पश्चिम बंगाल में 97 वोटर्स को गलती से मृत मार्क कर दिया गया था. चुनाव आयोग ने उसे सुधार दिया है. (फाइल फोटो/PTI)

West Bengal SIR: वोटर लिस्‍ट में यदि आपके परिवार के किसी सदस्‍य को मृत घोष‍ित कर दिया जाए तो आप पर क्‍या गुजरेगी? स्‍वाभाविक है कि आपको इसकी चिंता होगी और उसे सुधरवाने के लिए आप हर संभव प्रयास करेंगे. सुधार हो जाने पर आपको उसकी खुशी भी होगी. पश्चिम बंगाल में ऐसा ही मामला सामने आया है. ड्राफ्ट इलेक्‍टोरल रोल में एक या दो नहीं, बल्कि 97 वोटर्स को ‘मृत’ वाले कॉल में मार्क कर दिया गया. छानबीन के दौरान जब भेद खुला तो चुनाव आयोग ने उसमें सुधार किया है. इस तरह जिन लोगों के दादा-दादी या चाचा-चाची या बहन-भाई ड्राफ्ट कॉपी में मृत घोषित कर दिए गए थे, अब वे ‘जिंदा’ हो गए हैं. बता दें कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर को लेकर काफी विवाद हुआ है, जिससे सियासी पारा गर्म है.

कोलकाता में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बड़ी लापरवाही सामने आई है. पश्चिम बंगाल के 97 मतदाताओं को मसौदा मतदाता सूची में गलती से ‘मृत’ घोषित कर दिया गया, जबकि वे जीवित पाए गए हैं. निर्वाचन आयोग (ईसी) ने बुधवार को इस त्रुटि को स्वीकार करते हुए कहा कि प्रभावित मतदाता अब फॉर्म-6 भरकर दोबारा मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करा सकते हैं. ईसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राजनीतिक दलों और व्यक्तिगत मतदाताओं से शिकायतें मिलने के बाद मामले की जांच कराई गई. जांच में सामने आया कि इन 97 मतदाताओं को गलत तरीके से मृत दिखाकर सूची से हटा दिया गया था. अधिकारी ने बताया कि इन सभी मतदाताओं को फॉर्म-6 भरने को कहा गया है, जो नए मतदाता के रूप में नामांकन के लिए सबसे तेज प्रक्रिया है.

चुनाव आयोग ने उन मतदाताओं के लिए निर्देश जारी किए हैं, जिनके नाम भूलवश मृतकों में शामिल हो गए थे. (फाइल फोटो/PTI)

कहां से आए सबसे ज्‍यादा मामले?

सबसे अधिक मामले कोलकाता के मेटियाब्रुज इलाके से सामने आए हैं, जहां 23 मतदाता ऐसे पाए गए जिन्हें जीवित होने के बावजूद मृत घोषित कर दिया गया था. बाकी 74 मामले राज्य के 17 जिलों की 45 विधानसभा सीटों में फैले हुए हैं. इससे यह संकेत मिलता है कि यह समस्या केवल किसी एक इलाके तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक स्तर पर मतदाता सूची के सत्यापन में खामियां रही हैं. इस मुद्दे को लेकर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के साथ-साथ विपक्षी दल सीपीएम और कांग्रेस भी लगातार सवाल उठा रहे हैं. तीनों दलों का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के तहत तैयार की गई ASD (एब्सेंट, शिफ्टेड और डेड) सूची में बड़ी संख्या में विसंगतियां हैं, खासकर उन मतदाताओं के मामले में जिन्हें मृत बताकर हटाया गया है. उनका कहना है कि इस तरह की गलतियां लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती हैं.

तृणमूल हमलावर

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने भी इस मुद्दे को लेकर तीखा हमला बोला है. उन्होंने दक्षिण 24 परगना, कूचबिहार और पश्चिम मिदनापुर में आयोजित जनसभाओं में ऐसे कई मतदाताओं को मंच पर पेश किया, जिन्हें सूची में मृत घोषित कर दिया गया था लेकिन वे जीवित हैं. बनर्जी ने इसे प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए आरोप लगाया कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी और विश्वसनीय नहीं रही. निर्वाचन आयोग ने हालांकि यह भी कहा है कि SIR अभ्यास का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाना है, ताकि फर्जी या दोहराव वाले नामों को हटाया जा सके, लेकिन इस मामले ने यह दिखा दिया है कि वेरिफिकेशन प्रोसेस में मानवीय भूल और जमीनी स्तर पर की गई गलत रिपोर्टिंग से गंभीर परिणाम हो सकते हैं. किसी मतदाता को मृत घोषित कर देना न केवल उसके मतदान अधिकार को प्रभावित करता है, बल्कि पूरे चुनावी तंत्र पर जनता का भरोसा भी कमजोर करता है.

About the Author

Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें

homenation

बंगाल SIR: दादा-दादी, चाचा-चाची हो गए थे ‘स्‍वर्गवासी’, राज खुला तो सब सन्‍न

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

GET YOUR LOCAL NEWS ON NEWS SPHERE 24      TO GET PUBLISH YOUR OWN NEWS   CONTACT US ON EMAIL OR WHATSAPP