I-PAC Loan Scam | I-PAC के चेहरे से हटा नकाब, रोहतक की जिस कंपनी से लिया ₹13 करोड़ का लोन, उसका नामोनिशान ही नहीं | ipac loan scam rupees 135000000 from Rohtak company that not exist ed money laundering raid Prateek jain mamata Banerjee
I-PAC Loan Scam: पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC को लेकर होश उड़ाने वाले खुलासे हुए हैं. प्रतीक जैन की I-PAC ने रोहतक (हरियाणा) की एक कंपनी से 13.50 करोड़ रुपये का अनसिक्योर्ड लोन लिया था. अब पता चला है कि I-PAC ने जिस कंपनी से करोड़ों रुपये का लोन लेने का दावा किया था, उसका अस्तित्व ही नहीं है. इस खुलासे से I-PAC की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. मनीलॉन्ड्रिंग के आरोप में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED की टीम ने I-PAC के ऑफिस और इसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के आवास पर छापा मारा था, जिससे पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बवाल मच गया था. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ईडी के एक्शन को राजनीतिक रंग दे दिया. अब I-PAC से जुड़ी ऐसी सच्चाई सामने आई है, जिससे कंसल्टेंसी फर्म को लेकर संदेह और बढ़ सकता है.
राजनीतिक रणनीति और चुनाव प्रबंधन के क्षेत्र में चर्चित कंपनी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) एक बार फिर विवादों में घिर गई है. हाल ही में सामने आई एक जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कंपनी ने वर्ष 2021 में रोहतक स्थित एक फर्म से 13.50 करोड़ रुपये का अनसिक्योर्ड लोन लेने का दावा किया था, लेकिन आधिकारिक रिकॉर्ड में ऐसी कोई कंपनी मौजूद ही नहीं है. यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब I-PAC पहले से ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद के केंद्र में है. ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, I-PAC ने 17 दिसंबर 2021 को रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज़ (ROC) के समक्ष दाखिल दस्तावेजों में अपने लेनदारों की सूची में ‘रामासेतु इंफ्रास्ट्रक्चर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की कंपनी का उल्लेख किया था और बताया था कि उसे इससे 13.50 करोड़ रुपये का अनसिक्योर्ड लोन मिला है. कंपनी ने जून 2025 में एक अन्य घोषणा में कहा कि इस रकम में से 2024-25 के दौरान एक करोड़ रुपये चुका दिए गए हैं और अब 12.50 करोड़ रुपये बकाया हैं.
I-PAC का गजब खेल
हालांकि, जब आधिकारिक रिकॉर्ड खंगाले गए तो पता चला कि ‘रामासेतु इंफ्रास्ट्रक्चर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की कोई कंपनी कभी रजिस्टर्ड ही नहीं हुई. जिस पते (तीसरी मंजिल, अशोका प्लाजा, दिल्ली रोड, रोहतक) का उल्लेख I-PAC के दस्तावेजों में किया गया है, वहां भी ऐसी किसी कंपनी के संचालन के प्रमाण नहीं मिले. ROC रिकॉर्ड में इसी पते पर ‘रामसेतु इंफ्रास्ट्रक्चर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की एक कंपनी जरूर दर्ज है, लेकिन यह कंपनी अक्टूबर 2013 में पंजीकृत हुई थी और अगस्त 2018 में ही रजिस्ट्रार द्वारा धारा 248(1) के तहत स्ट्राइक ऑफ कर दी गई थी. यानी I-PAC द्वारा बताए गए लोन से करीब तीन साल पहले ही यह कंपनी कानूनी रूप से अस्तित्व में नहीं थी.
‘I-PAC से कभी लेनदेन ही नहीं’
रिपोर्ट के अनुसार, अशोका प्लाजा के मालिक सुनील गोयल और वहां के मैनेजर सतवीर ने भी बताया कि पिछले कई वर्षों में वहां रामसेतु या रामासेतु नाम की कोई कंपनी काम करती हुई नहीं दिखी. ROC दस्तावेजों में दर्ज शेयरधारकों (विक्रम मुंजाल, संदीप राणा, विजेंदर, बलजीत जांगड़ा, प्रदीप कुमार और जगबीर सिंह) ने बताया कि कंपनी कुछ वर्षों में ही बंद हो गई थी और उनका I-PAC से किसी भी तरह का कोई लेनदेन नहीं हुआ. संदीप राणा ने कहा, ‘हमने कंपनी बनाई थी, लेकिन कोई कारोबार नहीं हुआ और जल्दी ही इसे बंद कर दिया गया. मुझे किसी ऐसे लोन की जानकारी नहीं है.’ वहीं, जिंद के रहने वाले विजेंदर ने बताया कि कंपनी जमीन के कारोबार के लिए बनाई गई थी, लेकिन एक सौदा बिगड़ने के बाद उसे बंद कर दिया गया.
अब जवाब देने से बच रहे I-PAC के अधिकारी
इतना ही नहीं, जांच में यह भी सामने आया कि समान नामों वाली आठ अन्य कंपनियों के ROC रिकॉर्ड खंगालने पर भी 2021 या उसके बाद 13.50 करोड़ रुपये के किसी लेनदेन का उल्लेख नहीं मिला. इससे I-PAC के दस्तावेजों में दर्ज लोन की प्रामाणिकता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. मामले पर प्रतिक्रिया के लिए I-PAC के सह-संस्थापक और निदेशक प्रतीक जैन से संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने ईमेल और फोन कॉल का जवाब नहीं दिया. कंपनी की चार्टर्ड अकाउंटेंट पूनम चौधरी और कंपनी सेक्रेटरी तरुणा कालरा ने भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. इस पूरे प्रकरण ने I-PAC के वित्तीय लेनदेन और कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. राजनीतिक दलों के लिए रणनीति तैयार करने वाली इस प्रभावशाली कंपनी के खिलाफ सामने आए इस खुलासे से न केवल उसकी साख पर असर पड़ सकता है, बल्कि नियामक एजेंसियों की जांच की संभावना भी बढ़ गई है.