युवराज को बचाने के लिए रस्सी तक नहीं ला पाई पुलिस, अब कार निकालने के लिए मिल गया बोट से लेकर क्रेन

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नोएडा: यूपी में नोएडा के सेक्टर-150 में बीते 17 जनवरी की देर रात हुए हादसे में युवराज की जान चली गई, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आया कि उसकी मौत दम घुटन की वजह से हुई. बीते मंगलवार को करीब 70 फीट गहरे पानी में गिरी कार को आखिरकार एनडीआरएफ की टीम ने बाहर निकाल लिया है. इस बड़े सर्च ऑपरेशन को अंजाम देने में करीब 7 घंटे का लंबा वक्त लगा, जिसमें आधुनिक तकनीक और भारी संसाधनों का इस्तेमाल किया गया. आपको बता दें कि एनडीआरएफ की 15 सदस्यीय टीम, दो गोताखोरों और सोनार सिस्टम की मदद से कार की सटीक लोकेशन का पता लगाया गया. मौके पर तीन हाइड्रा, क्रेन और बोट की सहायता ली गई. वहीं लोगों ने इस पर कहा कि जन युवराज को बचाने की बात थी तो एक रस्सी भी पुलिस नहीं जुटा पाई थी.

सुबह 11 बजे शुरू हुआ यह सर्च ऑपरेशन शाम करीब 6 बजे जाकर पूरा हुआ, जब कार को पानी से बाहर निकालकर डंपर में लाद कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया है. इस पूरे ऑपरेशन का नेतृत्व सीएफओ प्रदीप कुमार और एसीपी नॉलेज पार्क ने किया. सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा और तकनीकी पहलुओं का खास ध्यान रखा गया, ताकि किसी भी सबूत से छेड़छाड़ न हो सके.

अबतक इन लोगों ने किया मौके का निरीक्षण
घटना की गंभीरता को देखते हुए मौके पर एसआईटी की टीम, स्थानीय सांसद, जिलाधिकारी और कमिश्नर ने भी निरीक्षण किया. अधिकारियों का मानना है कि कार की हालत, उसके अंदर मौजूद किसी भी तकनीकी खराबी या बरामद होने वाली वस्तुओं से हादसे के कारणों पर भी रोशनी पड़ सकती है. यही वजह है कि कार की फोरेंसिक जांच को भी घटना की आधिकारिक रिपोर्ट का अहम हिस्सा बनाया जाएगा.

कार की जांच के बाद आ सकते है खास तथ्य
आपको बता दें कि पानी से निकाली गई किसी कार के साथ 17 जनवरी की रात युवराज मेहता पानी में गिरा था. शुरुआती जांच में हादसा बताया जा रहा है, लेकिन जांच एजेंसियां किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले हर पहलू को खंगालना चाहती हैं. फिलहाल कार को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है, जहां फोरेंसिक टीम और अन्य तकनीकी एक्सपर्ट इसकी बारीकी से जांच करेंगे. कार के ब्रेक, स्टीयरिंग, गियर, एयरबैग सिस्टम और अंदर मौजूद इलेक्ट्रॉनिक डेटा की भी जांच की जाएगी, ताकि यह साफ हो सके कि हादसा तकनीकी खराबी का नतीजा था या किसी लापरवाही का. इसके अलावा कार में किसी बाहरी वस्तु पाई जाती है तो उसकी भी जांच को जाएगी.

नोएडा निवासियों ने लगाया शासन प्रशासन पर ये आरोप
नोएडा निवासी एनपी सिंह डीडीआरडब्लूए अध्यक्ष, विक्रम सेठी, सुभाष चौहान, आदित्य चौहान, मयंक सिंह, अरुण मौर्य ने बताया कि जिस तरह कार को निकालने के इतनी बड़ी टीम, आधुनिक साधन और हाइड्रा का इस्तेमाल किया गया, लेकिन जब युवराज मेहता डूब रहा था तब नोएडा पुलिस और उसके साधन काम नहीं आए.

अबतक हुई ये कार्रवाई
आपको बता दें कि अबतक नोएडा प्राधिकरण के घटना से संबंधित जूनियर इंजीनियर को पद से हटा दिया गया और सीएम ने SIT को इस घटना की जांच सौंपी है. साथ ही नोएडा प्राधिकरण के सीईओ लोकेश पर भी गाज गिरी और उन्हें उनके पद से हटा दिया गया है. मेरठ जॉन के एडीजी भानु भास्कर का कहना है कि जो भी तथ्य निकलकर आएंगे उसे हम अपनी रिपोर्ट में शामिल करके शासन को भेजेंगे.

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