18 साल का बेटा पिता से भरण-पोषण का हकदार नहीं.. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला
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Allahabad High Court News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि बालिग़ बेटे को पिता से गुजारा भत्ता का अधिकार नहीं है. कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए फैमिली कोर्ट को आदेश को रद्द कर दिया. हालांकि, कोर्ट ने पत्नी को बढ़ा हुआ गुजारा भत्ता देने के आदेश की सही पाया.
इलाहाबाद हाईकोर्टप्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि बेटे के बालिग होने पर पिता से भरण-पोषण का अधिकार नहीं है. हाईकोर्ट ने इस आधार पर 18 वर्ष कुछ आयु पूरी कर चुके बेटे के पक्ष में परिवार न्यायालय की ओर से जारी भरण-पोषण के आदेश को रद्द कर दिया. जबकि दूसरी ओर पत्नी के लिए बढ़ाई गई भरण-पोषण राशि को उचित ठहराते हुए बरकरार रखा है. यह आदेश
जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला की सिंगल बेंच ने याची पति मोअज्जम अली की ओर से दाखिल याचिका पर सुनाया है.
कोर्ट ने निस्तारित की याचिका
हाईकोर्ट कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि बेटा बालिग हो चुका है. इस आधार पर कोर्ट ने उसके संबंध में जारी भरण-पोषण का आदेश रद्द कर दिया. हालांकि, पत्नी के लिए बढ़ाई गई राशि 6,000 रुपये को कोर्ट ने मौजूदा समय के अनुसार अत्यधिक नहीं माना. हाईकोर्ट ने कहा कि पति ने अपनी आय के स्रोतों के संबंध में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किए हैं, जिससे उसकी असमर्थता सिद्ध हो सके. कोर्ट ने याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए निस्तारित कर दिया.
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अमित तिवारी, News18 Hindi के डिजिटल विंग में प्रिंसिपल कॉरेस्पॉन्डेंट हैं. वर्तमान में अमित उत्तर प्रदेश की राजनीति, सामाजिक मुद्दों, ब्यूरोक्रेसी, क्राइम, ब्रेकिंग न्यूज और रिसर्च बेस्ड कवरेज कर रहे हैं. अख़बार…और पढ़ें