Chitrakoot News : कम आमदनी, घरेलू हिंसा और 6 बेटियों की जिम्मेदारी…एक स्कीम ने कैसे बदली अंजुला की जिंदगी, जानें

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चित्रकूट. उत्तर प्रदेश की योगी सरकार महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार ऐसी योजनाएं जमीन पर उतार रही है, जिनका असर अब ग्रामीण क्षेत्रों तक साफ नजर आने लगा है. कभी घर की चारदीवारी तक सीमित मानी जाने वाली महिलाएं अब न सिर्फ अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं, बल्कि परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी भी मजबूती से संभाल रही हैं. इसकी एक सशक्त झलक धर्मनगरी चित्रकूट में देखने को मिल रही है, जहां ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं पुष्टाहार उत्पादन केंद्र का संचालन कर आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही हैं.

आत्मविश्वास का केंद्र

चित्रकूट की सदर तहसील के खोह क्षेत्र में संचालित पुष्टाहार उत्पादन केंद्र आज सिर्फ एक यूनिट नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आत्मसम्मान और आत्मविश्वास का केंद्र बन चुका है. यहां उन्नति प्रेरणा लघु उद्योग स्वयं सहायता समूह की महिलाएं संगठित होकर उत्पादन कार्य कर रही हैं. सरकार की श्यामप्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन योजना के तहत लगभग एक करोड़ 72 लाख रुपये की लागत से आधुनिक भवन और मशीनरी उपलब्ध कराई गई है. आजीविका मिशन राज्य मुख्यालय की ओर से करीब एक करोड़ 25 लाख रुपये की अग्रिम कार्यशील पूंजी दी गई थी, जिससे उत्पादन केंद्र को सुचारू रूप से महिलाओं द्वारा संचालित किया जा सके और खुद का रोजगार शुरू कर सकें.

दो शिफ्ट में काम 

इस उत्पादन केंद्र में स्वयं सहायता समूह की 20 महिलाएं दो शिफ्टों में काम कर रही हैं. महिलाएं बाजार से कच्चा माल खरीदकर दलिया, हलुआ, मूंग दाल खिचड़ी, आटा, बेसन सहित कुल आठ प्रकार के पौष्टिक खाद्य पदार्थों का उत्पादन कर रही हैं. प्रतिदिन करीब 5 मीट्रिक टन पुष्टाहार तैयार कर जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में सप्लाई किया जा रहा है. इससे न सिर्फ आंगनबाड़ी केंद्रों को गुणवत्तापूर्ण पोषण सामग्री मिल रही है, बल्कि महिलाओं को नियमित रोजगार और स्थायी आय का साधन भी मिला है. यहां काम करने वाली महिलाएं सरकार से मिली अग्रिम धनराशि को किस्तों में वापस जमा कर रही हैं और उसी आय से अपने परिवार का भरण-पोषण भी कर रही हैं.

जीवन में बदलाव

स्वयं सहायता समूह की सदस्य अंजुला मिश्रा, सावित्री प्रजापति सहित अन्य महिलाओं का कहना है कि सरकार ने स्वयं सहायता समूह से जोड़कर उन्हें जो अवसर दिया है, उसने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी है. आज वे खुद को पुरुषों के बराबर खड़ा महसूस करती हैं और सम्मान के साथ जीवन जी रही हैं. अंजुला मिश्रा की कहानी इस बदलाव की सबसे मजबूत मिसाल है. अंजुला बताती हैं कि पहले रोजगार न होने के कारण उनका जीवन संघर्षों से भरा था. पति की सीमित आमदनी, घरेलू हिंसा और छह बेटियों की जिम्मेदारी ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया था. बेटियों की पढ़ाई, घर खर्च और भविष्य की चिंता हर दिन उन्हें परेशान करती थी.

कितना महीना

लेकिन ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी में उम्मीद की नई किरण जगी है. आज वह महीने में करीब 8 हजार रुपये कमा रही हैं और अपने परिवार की जिम्मेदारी खुद उठा रही हैं. शुरुआत में उनके पति ने स्वयं सहायता समूह से जुड़ने का विरोध किया, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. आज वही हिम्मत उन्हें आत्मनिर्भर बना चुकी है. समाज और परिवार में उन्हें सम्मान मिल रहा है और वह गर्व के साथ कहती हैं कि सरकार की इस पहल ने उन्हें नई पहचान दी है.

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