India EU free trade pact : Tariff news | यूरोपीय यून‍ियन के नेता आ रहे भारत, टैर‍िफ पर टेंशन के बीच ट्रेड डील की आहट, कैसे परवान चढ़ रहे र‍िश्ते

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भारत और यूरोपीय यून‍ियन के बीच द्विपक्षीय संबंध लगातार नई ऊंचाइयां छू रहे हैं. ड‍िफेंस की बात हो, टेक्‍नोलाॅजी की या ट्रेड की, ईयू भारत का एक भरोसेमंद पार्टनर है. ऐसे में जब टैर‍िफ पर टेंशन के बीच ईयू के नेता भारत आ रहे हैं तो कई ऐत‍िहास‍िक चीजें होने वाली हैं.

EU नेता आ रहे भारत, टैर‍िफ पर टेंशन के बीच ट्रेड डील की आहट, र‍िश्ता बेहद खासभारत की यात्रा पर आ रहे यूरोपीय यून‍ियन के शीर्ष नेता.

नई दिल्ली. यूरोपीय यूनियन (EU) के शीर्ष नेताओं के भारत आगमन के साथ ही कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है. दुनिया की नजरें इस यात्रा पर टिकी हैं क्योंकि यह दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है जब ‘टैरिफ’ और ‘ट्रेड’ को लेकर वैश्विक स्तर पर तनाव की चर्चा है. हालांकि, इन चुनौतियों के बीच भारत और यूरोपीय संघ के बीच एक बड़ी ‘ट्रेड डील’ (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) की आहट भी सुनाई दे रही है. टैरिफ पर यूएस से तनातनी के बावजूद भारत और EU के रिश्ते नई ऊंचाइयों पर हैं.

भारत और यूरोपीय संघ के राजनयिक संबंधों की नींव 1962 में पड़ी थी, लेकिन आज यह रिश्ता एक परिपक्व दौर में है. साल 2024 में दोनों की ‘रणनीतिक साझेदारी’ (Strategic Partnership) ने 20 साल पूरे कर लिए हैं. 5वें भारत–EU शिखर सम्मेलन में शुरू हुई यह साझेदारी अब साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की मजबूत धुरी बन चुकी है. हाल के वर्षों में शीर्ष नेतृत्व के बीच लगातार संवाद ने टैरिफ जैसे मुद्दों के बावजूद रिश्तों में मिठास घोली है.

6 प्‍वाइंट में समझें र‍िश्ते कहां तक

  1. आंकड़े भले ही टैरिफ और टैक्स को लेकर कुछ मुद्दों पर बातचीत जारी है, लेकिन आंकड़ों की कहानी बेहद सकारात्मक है. यूरोपीय संघ आज भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनकर उभरा है. वित्त वर्ष 2024–25 में द्विपक्षीय वस्तु व्यापार लगभग 136 अरब डॉलर तक पहुंच गया है.
  2. ट्रेड डील की उम्मीद: दोनों पक्षों के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर बातचीत तेजी से आगे बढ़ रही है. नेताओं की इस यात्रा से उम्मीद की जा रही है कि व्यापारिक बाधाओं को दूर कर डील को अंतिम रूप देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जाएगा.
  3. 6G से लेकर AI तक रिश्ते अब सिर्फ खरीद-फरोख्त तक सीमित नहीं हैं. 2022 में स्थापित ‘भारत–EU ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल’ (TTC) ने सहयोग के मायने बदल दिए हैं. अब दोनों पक्ष मिलकर भविष्य की तकनीकों पर काम कर रहे हैं. हम सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का विकास कर रहे हैं. 6G तकनीक पर ज्‍वाइंट र‍िसर्च कर रहे हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सुरक्षा में गहरा सहयोग है.
  4. समंदर से लेकर सीमाओं तक सुरक्षा सहयोग भारत और EU अब सुरक्षा के मोर्चे पर भी एक-दूसरे के हमदम हैं. दोनों का फोकस हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने पर है. हिंद महासागर, अदन की खाड़ी और गिनी की खाड़ी में भारत और EU की सेनाओं ने संयुक्त नौसैनिक अभ्यास किए हैं. दोनों पक्ष आतंकवाद, समुद्री डकैती और साइबर खतरों से निपटने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं.
  5. ISRO और ESA का साथ जमीन ही नहीं, अंतरिक्ष में भी भारत-EU के रिश्ते परवान चढ़ रहे हैं. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के बीच सहयोग गहरा हुआ है. चंद्रयान-3 और आदित्य-L1 मिशन में तकनीकी तालमेल है. 2024 में ESA के Proba-3 मिशन को ISRO के PSLV रॉकेट से लॉन्च किया गया, जो इस भरोसे का सबसे बड़ा सबूत है.
  6. ऊर्जा और कनेक्टिविटी: भविष्य की तैयारी जलवायु परिवर्तन और ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में ‘भारत–EU स्वच्छ ऊर्जा एवं जलवायु साझेदारी’ (CECP) के तहत सौर ऊर्जा और हरित परिवहन पर काम हो रहा है. वहीं, भारत–मध्य पूर्व–यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC) जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाएं वैश्विक सप्लाई चेन में चीन के विकल्प के तौर पर एक मजबूत ढांचा खड़ा कर रही हैं.

‘वैकल्पिक’ नहीं, बल्कि ‘अनिवार्य’ साझेदार
यूरोपीय नेताओं का यह दौरा केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं है. टैरिफ और व्यापारिक शर्तों पर जारी माथापच्ची के बीच, रक्षा, अंतरिक्ष और तकनीक में बढ़ता सहयोग यह बताता है कि भारत और यूरोपीय संघ अब एक-दूसरे के लिए ‘वैकल्पिक’ नहीं, बल्कि ‘अनिवार्य’ साझेदार बन चुके हैं.

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