वो 3 फिल्में, जिनमें थे रिजेक्टेड ट्यून पर बने पुराने गाने, तीनों ने रचा इतिहास, तीसरी समा गई दिल में – na kajre ki dhar khaike pan banaras wala 3 rejected tunes turn superhit don mohra path breaking bollywood films left lasting impact raveena tandon
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Bollywood Superhit Movies : कोई गाना या स्क्रिप्ट किसी डायरेक्टर-प्रोड्यूसर के लिए रद्दी होती है तो किसी के लिए वह गोल्ड साबित होती है. बॉलीवुड में ऐसे कई उदाहरण देखते को मिलते हैं. रिजेक्टेड ट्यून पर बने गानों ने म्यूजिक की दुनिया में तहलका मचा दिया. रिजेक्ट स्क्रिप्ट पर बनी फिल्म सुपरहिट साबित हुई. आज हम तीन ऐसे गानों के बारे में बात करेंगे जो रिजेक्ट हो चुके थे. या जिस फिल्म के लिए बनाए गए, उसमें नहीं रखे गए. आगे चलकर जब इन्हें दूसरी फिल्म में शामिल किया गया तो सबके मुंह खुले रह गए. कई गाने तो 20 साल से भी ज्यादा पुराने थे. ये फिल्में कौन सी थीं और वो सुपरहिट सॉन्ग कौन से थे, आइये जानते हैं दिलचस्प किस्सा……

सबसे पहले बात करते हैं 1978 में रिलीज हुई अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘डॉन’ की जो आप भी उतनी ही पॉप्युलर है. फिल्म को चंद्रा बरोट ने डायरेक्ट किया था. इस फिल्म में अमिताभ बच्चन के अलावा जीनत अमान, प्राण, इफ्तिखार, ओमपुरी, हेलेन और कमल कपूर लीड रोल में थे. फिल्म का म्यूजिक कल्याण जी- आनंद जी ने कंपोज किया था. फिल्म में कुल 5 गाने थे. सभी गाने सुपरहिट थे. फिल्म का एक गाना ‘खइके पान बनारस वाला’ कल्ट क्लासिक बन गया. गीतकार अनजान थे. किशोर कुमार ने इस गाने को अपनी ही स्टाइल में गाया था. यह गाना हमेशा के लिए अमर हो गया.

डॉन फिल्म के प्रोड्यूसर नरीमन ईरानी थे जिनका निधन मूवी को बनाने के दौरान हो गया था. चंद्रा बरोट ने अपनी बहन से 40 हजार रुपये का कर्ज लेकर फिल्म पूरी की. अमिताभ बच्चन-प्राण और जीनत अमान ने फिल्म में लगभग फ्री में काम किया था. सलीम-जावेद ने कहानी लिखी थी जिसे हर प्रोड्यूसर ने रिजेक्ट कर दिया था. फिल्म डॉन के लिए अमिताभ बच्चन को बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था.

फिल्म का आइकॉनिक सॉन्ग ‘खइके पान बनारस वाला’ मुंबई के एक तबेले में फिल्माया गया था. डायरेक्टर चंद्रा बरोट के पास बजट ही नहीं था. सबसे दिलचस्प बात यह है कि ‘खइके पान बनारस वाला’ सॉन्ग देवानंद की 1973 की फिल्म ‘बनारसी बाबू’ के लिए लिखा गया था. यह गाना गीतकार अनजान ने ही लिखा था लेकिन देवानंद ने इस गाने को फिल्म में नहीं रखा. ‘बनारसी बाबू’ के संगीतकार भी कल्याण जी – आनंद जी ही थे. ‘बनारसी बाबू’ बॉक्स ऑफिस पर बहुत ज्यादा कमाल नहीं दिखा सकी लेकिन अमिताभ बच्चन की डॉन ने इतिहास रच दिया.
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1990 में आई फिल्म ‘आशिकी’ के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ था. 23 जुलाई 1990 को रिलीज हुई इस फिल्म के लिए गाने पहले एल्बम के तौर पर रिकॉर्ड किए गए थे. शुरुआत में सिर्फ चार गाने ‘धीरे-धीरे से मेरी जिंदगी में आना’, ‘बस एक सनम चाहिए’, ‘मैं दुनिया भुला दूंगा तेरी चाहत में’ और ‘दिल है की मानता नहीं’ रिकॉर्ड किए गए थे. इस एल्बम का नाम ‘चाहत’ रखा जाना था. फिर महेश भट्ट ने इस गानों पर एक कहानी लिखी और फिल्म बनाई. ‘आशिकी’ सुपरहिट रही. 90 के दशक में म्यूजिक की क्रांति लेकर आई. नदीम-श्रवण और कुमार सानू की आवाज को घर-घर टी-सीरीज ने पहुंचाया.

इस फिल्म के एक खूबसूरत गाने ‘दिल है की मानता नहीं’ पर एक अलग से फिल्म बनाई गई. ‘दिल है की मानता नहीं’ में आमिर खान-पूजा भट्ट लीड रोल में थे. फिल्म का डायरेक्शन महेश भट्ट ने ही किया था. म्यूजिक नदीम-श्रवण का था. ‘दिल है की मानता नहीं’ समेत फिल्म के सभी गाने ब्लॉकबस्टर थे. यह फिल्म भी सुपरहिट रही. इतना ही नहीं, आमिर खान की 1993 में आई फिल्म ‘हम हैं राही प्यार के’ का एक गाना ‘घूंघट की आड़ से दिलवर का, दीदार अधूरा रहता है’ को 1982 में उनके पिता ताहिर हुसैन ने रिजेक्ट कर दिया था. नदीम-श्रवण तब इंडस्ट्री में नए-नए थे. बाद में इस फिल्म के लिए उनका म्यूजिक लिया गया. नदीम-श्रवण ने इसी गाने को 1993 में ‘हम हैं राही प्यार के’ में बेचा. गाना कितना बड़ा हिट हुआ, हम सब जानते हैं.

इसके बाद 1994 में आई अक्षय कुमार-सुनील शेट्टी की एक्शन थ्रिलर फिल्म मोहरा में भी कुछ इसी तरह की कहानी दोहराई गई. मोहरा फिल्म में अक्षय कुमार-सुनील शेट्टी के अलावाल नसीरुदीएन शाह, रवीना टंडन, पूनम झावर, रजा मुराद, परेश रावल, गुलशन ग्रोवर और सदाशिव अमरापुरकर जैसे सितारे नजर आए थे. नसीरुद्दीन शाह ने निगेटिव किरदार निभाया था. डायरेक्शन राजीव राय ने किया था. प्रोड्यूसर गुलशन राय थे. फिल्म का म्यूजिक विजू शाह ने कंपोज किया था. अक्षय कुमार-सुनील शेट्टी-परेश रावल की यह पहली फिल्म थी. इससे पहले राजीव राय ने विश्वात्मा को बनाया था. फिल्म में रवीना टंडन से पहले दिव्या भारती को लिया गया था. उनकी मौत के बाद यह रोल रवीना टंडन को मिला.

मोहरा फिल्म के सभी गाने सुपरहिट थे. सुपरहिट गानों में ‘ना कजरे की धार, ऐ काश कहीं ऐसा होता, और तू चीज बड़ी है मस्त-मस्त और ‘टिप-टिप बरसा पानी’ शामिल थे. दिलचस्प बात यह है कि फिल्म का गाना ‘ऐ काश कहीं ऐसा होता, कि दो दिल होते सीने में…’ टूटे दिल के आशिकों का फेवरेट सॉन्ग है. इस गाने को दिलीप कुमार की 1992 की अनरिलीज्ड फिल्म ‘कलिंगा’ के लिए रिकॉर्ड किया गया था. गाने को आनंद बख्शी ने ही लिखा था जिन्होंने मोहरा फिल्म के लिए गाने लिखे थे. मोहरा फिल्म करीब 4 करोड़ के बजट में बनी थी. बॉक्स ऑफिस पर 23 करोड़ की कमाई की थी. यह एक सुपर ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई थी.

मोहरा फिल्म से जुड़ा एक और किस्सा बेहद रोचक है. इस फिल्म में 26 साल पहले रिकॉर्ड हुए एक गाने को शामिल किया गया था. यही गाना आशिकों के दिल की धड़कन बन गया. यह सुपरहिट गाना था : ‘ना कजरे की धार, ना मोतियों की हार’. वास्तव में यह गाना 1967-68 के दौरान संगीतकार कल्याण जी-आनंद जी ने रिकॉर्ड किया था. इस गाने को लीजेंड सिंगर मुकेश ने गाया है. यह गाना आज भी यूट्यूब पर मुकेश की आवाज में मौजूद है. गीत इंदीवर ने लिखा था. जिस फिल्म के लिए यह गाना रिकॉर्ड हुआ था, वो मूवी कभी रिलीज ही नहीं हुई. विजू शाह संगीतकार कल्याण जी के बेटे हैं. उन्होंने अपने पिता के सॉन्ग का इस्तेमाल ‘मोहरा’ फिल्म में किया. इस गाने का एक अंतरा इंदीवर से ही लिखवाया था. यह सदाबहार गाना सुनील शेट्टी और पूनम झावर पर फिल्माया गया था. फिल्म की शूटिंग के दौरान दोनों के बीच बोलचाल नहीं था. इस फिल्म के बाद सुनील शेट्टी ने कभी भी पूनम झावर से बात नहीं की. मोहरा में साड़ी में बेहद खूबसूरत नजर आने वाली पूनम मूल रूप से राजस्थान की रहने वाली हैं. फिल्मों में मिली नाकामयाबी के बाद उन्होंने बोल्ड कंटेट बनाना शुरू कर दिया. आपत्तिजनक फोटो खिंचवाए. बोल्ड फोटोशूट भी करवाए.