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पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट छात्रा की संदिग्ध मौत के अब 9 दिन होने को हैं. लेकिन अभी तक पुलिस की जांच किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है. ऐसे में बड़ा सवाल यह कि क्या पटना पुलिस उसी थ्योरी पर कायम है, जिस थ्योरी को लेकर बवाल मचा था? क्या एसआईटी जांच में भी घालमेल हो रहा है? जहानाबाद की 18 साल की छात्रा की मौत क्यों, कहां और कैसे हुई? क्यों बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद ने बिहार पुलिस की पुलिसिंग पर सवाल उठाए हैं? न्यूज 18 हिंदी को एक्सक्लूसिव जानकारी जो हाथ लगी है, वह आने वाले दिनों में घटना को दूसरा एंगल दे सकता है. इस मामले में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने के बाद एक सीनियर आईपीएस अधिकारी ने अब मोर्चा थामा है. कहा जा रहा है कि जांच की आंच अब हॉस्टल के कमरों से निकलकर शहर के दो बड़े निजी अस्पतालों और जहानाबाद तक पहुंच गई है.

पटना पुलिस ने शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक, वार्डन और वहां रहने वाली अन्य छात्राओं से लंबी पूछताछ की है. वार्डन के बयानों में कई विरोधाभास पाए गए हैं. पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि तबीयत बिगड़ने और अस्पताल ले जाने के बीच कितना समय बीता. मृतका के कमरे के आसपास रहने वाली छात्राओं ने बताया है कि उस रात हॉस्टल में हलचल सामान्य नहीं थी. कुछ छात्राओं ने चीखने की आवाजें सुनने का भी दावा किया है, जिसकी पुष्टि पुलिस सीसीटीवी फुटेज से कर रही है.

एसआईटी की जांच कहां तक पहुंची?

छात्रा को सबसे पहले जिस सहज अस्पताल ले जाया गया था. एसआईटी ने वहां के डॉक्टरों और ड्यूटी स्टाफ से पूछताछ की है. पुलिस को संदेह है कि जब छात्रा को यहां लाया गया, तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं, लेकिन अस्पताल ने रिकॉर्ड्स में क्या दर्ज किया, इसकी बारीकी से जांच हो रही है. सहज अस्पताल से रेफर किए जाने या शिफ्ट किए जाने के बाद प्रभात अस्पताल की भूमिका भी संदिग्ध है. पुलिस ने दोनों अस्पतालों के इनकमिंग रजिस्टर और सीसीटीवी कैमरों के डीवीआर को जब्त कर लिया है. एसआईटी यह पता लगा रही है कि क्या अस्पतालों ने छात्रा की गंभीर हालत को देखते हुए पुलिस को समय पर सूचित किया था या प्रबंधन के साथ मिलकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की.

लड़की के साथ किसने किया गलत?

अब इस पूरे मामले की मॉनिटरिंग एसआईटी हेड और पटना के एसएसपी रह चुके आईपीएस जितेंद्र राणा कर रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट किया है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विसरा जांच के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी. इसमें कम से कम पांच दिन और लग सकते हैं. इस घटना ने पटना के निजी हॉस्टलों में सुरक्षा मानकों की कमी को उजागर किया है. न तो हॉस्टलों का कोई आधिकारिक पंजीकरण है और न ही आपातकालीन स्थिति के लिए कोई मेडिकल प्रोटोकॉल. शंभू गर्ल्स हॉस्टल में लगे सीसीटीवी कैमरे कई जगहों पर खराब मिले हैं, जिसे पुलिस साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ मान रही है. एसआईटी अब छात्रा के मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच करवा रही है ताकि अंतिम समय में हुई बातचीत का सुराग मिल सके.

शंभू गर्ल्स हॉस्टल और अस्ताल की भूमिका

पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में हुई दरिंदगी की घटना न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि हमारे समाज के उस खोखलेपन को भी उजागर करती है जहां ‘बेटी बचाओ’ सिर्फ एक नारा बनकर रह गया है. इस घटना के बाद औरंगाबाद की भी एक नीट छात्रा की मौत की खबर आई है. परिजनों ने छात्रा की मौत को आत्महत्या मानने से इनकार करते हुए हत्या की आशंका जताई है. लगातार सामने आ रहे मामलों ने पटना में छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद ने न्यूज 18 हिंदी के साथ बातचीत में कई खुलासे किए हैं. उन्होंने कहा ‘इस केस को पटना पुलिस ने अनप्रोफेशनल तरीके से हैंडलिंग किया है. बिना पोस्टमार्टम रिपोर्ट के एसएसपी ने क्यों बयान दिया? इस मामले में हॉस्टल, डॉक्टर और पुलिस तीन प्रमुख संस्थाएं थीं. लेकिन तीनों ने अपना काम सही तरीके से नहीं किया है. इस घटना को अनप्रोफेशनल तरीके से हैंडल किया गया. तहकीकात बढ़िया से होनी चाहिए थी. अभी भी इस केस की तह तक पुलिस चाहे तो जा सकती है. अब देखिए पुलिस क्या करेगी?’

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