युवराज से पहले खुले नाले में कार समेत गिरा था भारत, पर 11 महीने बाद भी क्यों सोता रहा प्रशासन?
दिल्ली के मंडावली के रहने वाले 30 साल के भारत भाटी, 1 मार्च, 225 को एक शादी में शामिल होने के लिए ग्रेटर नोएडा के रास्ते गिरधरपुर के शकुंतला फार्महाउस जा रहे थे. रातभर ड्यूटी करने के बाद भारत आए और तैयार होकर शादी के लिए निकले. स्टेशन मास्टर की नौकरी करने वाले भारत अपनी कार सुजुकी डिजायर में शादी के लिए रवाना हुए. कालिंदीकुंज पार कर वो परीचौक से होते हुए गिरधरपुर की तरफ बढ़ रहे थे. लेकिन तभी ग्रेटर नोएडा के पी-3 सेक्टर के पास केंद्रीय विहार-2 सोसाइटी के सामने उनकी कार 30 फीट गहरे नाले में जा गिरी. जिससे उनकी मौत हो गई. 23 जनवरी, 2022 में भारत की शादी हुई थी.
भारत से 2 दिन पहले इसी नाले में गिरा बाइक सवार
भारत या युवराज अकेले ऐसे मामले नहीं हैं. भारत 1 मार्च, 2025 को जिस नाले में गिरा था, उसी नाले में उनसे ठीक 2 दिन पहले एक बाइक सवार भी जा गिरा था. लेकिन इस बाइक सवार की किसमत भारत और युवराज से ज्यादा अच्छी थी. आसपास के लोगों ने तुरंत मदद का हाथ बढ़ाते हुए उस बाइक सवार को बचा लिया था. लेकिन ये खुले नाले कई लोगों को अपनी शिकस्त में ले चुके हैं. इससे पहले चार दिसंबर 2024 को भी ग्रेटर नोएडा वेस्ट की अजनारा होम्स सोसायटी के पास 130 मीटर रोड पर खुले नाले में कार जा गिरी थी और चालक गंभीर रूप से घायल हो गया था. 26 जून, 2023 में भी सूरजपुर कोतवाली के तिलपता गांव के पास खुले नाले में कार जा गिरी जिसमें महिला और बच्चों समेत एक ही परिवार के 5 लोग हादसे का शिकार हुए. 35 मिनट तक कार में फंसा रहने के बाद उन्हें बाहर निकाला गया.
23 जनवरी, 2022 में भारत की शादी हुई थी.
पिता के जाने के बाद मिली थी नौकरी
भारत के बड़े भाई और परिवार का इकलौता सहारा दिलीप ने हमें बताया, ‘दरअसल मेरे पिता का निधन 2018 में हो गया था. पापा रेलवे में थे और उन्हीं के बाद पापा की नौकरी भाई को मिली. मैं बड़ा था, नौकरी मुझे मिलनी थी, पर मैंने छोटे भाई को नौकरी दी ताकि वो भी सेटल हो जाए. पर मुझे क्या पता था वो ऐसे चला जाएगा.’ भारत के निधन के बाद उनकी पत्नी भी ससुराल छोड़कर चली गईं. अब दिलीप अपनी मां और अपने पत्नी-बच्चों के साथ घर चला रहे हैं. दिल्ली के पड़पड़गंज में रहने वाले दिलीप स्कूल वैन चलाते हैं और उनका केबल का भी काम है.
भारत की मौत पर क्यों नहीं लड़ा केस?
दिलीप से जब हमने पूछा कि आपकी भाई की खुले गड्डे में गिरने से मौत हुई है. आपने प्रशासन या ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी से कोई जवाब मांगा? या आपने कोई पुलिस में कोई रिपोर्ट दर्ज कराई? इस पर दिलीप कहते हैं, ‘हमसे तब लोगों ने कहा कि अथॉरिटी पर केस करो, पर मैं घर में अकेला हूं. साथ ही भारत के जाने के बाद उसकी पत्नी ने भी हमारे ऊपर केस कर दिए थे. हमें समझ ही नहीं आया कि क्या करें. हमें न तो कोई मुआवजा मिला और न किसी ने कोई जिम्मेदारी ली.

वहीं दिलीप और भारत के रिश्तेदार और ग्रेटर नोएडा के रहने वाले हरिंदर भाटी बताते हैं कि वो भी उस शादी में गए थे, जहां भारत पहुंचने वाला था. ‘मैं कन्यादान करके मैं दूसरी शादी में चला गया था. लेकिन जब दूसरे दिन अखबार देखा और भारत की तस्वीर देखी तो मैं हैरान रह गया. मैंने दिलीप को कहा भी था कि केस करे, कानूनी कार्यवाई करे, लेकिन पता नहीं उन्होंने कुछ क्यों नहीं किया. मैं उस नाले के पास गया था और अथॉरिटी में शिकायत भी की थी. पर वहां कुछ दिन बाद विभाग ने बैरिकेटिंग लगा दी, और फिर कुछ नहीं हुआ.’
कई गड्डे खुले पड़े हैं, शिकायतें की पर कुछ नहीं
ग्रेटर नोएडा के जिस सेक्टर में भारत भाटी की कार गिरी, उस P3 सेक्टर की RWA के अध्यक्ष अमित भाटी बताते हैं, ‘एक-दो नहीं, मैडम कई ऐसे नाले हैं जो खुले पड़े हैं. कई जगह सड़क चौड़ी होने के बाद अचानक संकरी हो जाती है, जिससे खासकर रात के समय दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है. पी-3 सेक्टर के पास एक टोटो रिक्शा बैरिकेडिंग तोड़कर नाले में गिर चुका है. सौभाग्य से उस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई. पी3 से गोलचक्कर की तरफ जाते हैं, वहां का नाला समेत कई ऐसे नाले हैं जिनके बारे में हमने अथॉरिटी में शिकायत भी की है. यहां न कोई बेरीकेटिंग है और न ही दीवार वगैरह है. सच बात तो ये है कि जब तक कोई बड़ी घटना नहीं होती, कोई सुध नहीं लेता. ‘
युवराज के साथ जो हुआ, उस घटना ने शायद हर मां-बाप, रहवासी को हिला कर रख दिया है.
खबरों और लोगों के गुस्से के बाद जागा प्रशासन
हालांकि युवराज के साथ जो हुआ, उस घटना ने शायद हर मां-बाप, रहवासी को हिला कर रख दिया है. जनता के इसी गुस्से ने अब अधिकारियों को भी कुर्सियों से हिलने के लिए मजबूर कर दिया है. ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के GM ए.के. सिंह का कहना है कि इस दुखद घटना से प्राधिकरण बेहद आहत है. इसलिए GNIDA के सीईओ के निर्देश पर पूरे प्राधिकरण स्टाफ को फील्ड में उतार दिया गया है, ताकि किसी भी संभावित दुर्घटना को समय रहते रोका जा सके. सभी वर्क सर्किल के अधिकारियों, जेई और मैनेजरों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में मौजूद सभी ब्लैक स्पॉट और हॉटस्पॉट को चिन्हित कर तत्काल सुधार करें. यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो इसके लिए संबंधित क्षेत्रीय जेई और मैनेजर को जिम्मेदार ठहराया जाएगा.

गुड़गांव की कंपनी में काम करने वाले युवराज मेहता की बहन यूके में रहती है और युवराज के दोस्त की मानें तो वो भी कुछ सालों में यूके ही शिफ्ट होने वाले थे. पॉश इलाके में रहने वाले इंजीनियर की मौत ने प्रशासन और दुर्वयवस्था की कलियां खोल कर रख दी हैं. इलाके के लोग सड़कों पर उतरे हैं, सवाल उठ रहे हैं. पर इसी गड्डे में ठीक 15 दिन पहले भी एक पूरा ट्रक जा गिरा था. तब प्रशासन क्यों नहीं जागा? 30 साल के भारत भाटी की मौत पर किसी की आंख क्यों नहीं खुली? युवराज मेहता की मौत पर मचे हंगामे के बाद ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने तुरंत एक्शन लेते हुए कई कंस्ट्रक्शन के लिए खोदे गए ऐसे बड़े-बड़े गड्डों को भरने और उनके आसपास बेरिकेटिंग की कार्रवाई तुरंत शुरू कर दी है. पर सवाल अब भी वही है. ‘भारत’ की मौत पर क्यों नहीं चेता प्रशासन? सोते अधिकारियों को नींद से जगाने के लिए पॉश इलाके के ‘युवराज’ की मौत का ही इंतजार क्यों?