झांसी के ऐतिहासिक किले के अंदर बनी एक ऐसी जगह, जहां आज भी जाने से डरते हैं लोग..जानिए क्या है ऐसा यहां
झांसी में ऐतिहासिक रानी लक्ष्मीबाई के किले के भीतर स्थित प्राचीन शिव मंदिर से पहले बना फांसी घर आज भी लोगों के लिए जिज्ञासा और रहस्य का केंद्र बना हुआ है. इस फांसी घर की अनोखी बनावट और इसका इतिहास देखने के लिए किले में आने वाले पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है.
न्याय और कठोर शासन व्यवस्था का प्रतीक
रानी लक्ष्मीबाई के किले के भूमिगत तल से थोड़ा ऊपर निर्मित इस फांसी घर का उपयोग अपराधियों, साजिशकर्ताओं और राज्य के प्रति शत्रुता रखने वाले लोगों को दंड देने के लिए किया जाता था. यह स्थान न्याय और कठोर शासन व्यवस्था का प्रतीक माना जाता था.
जल्लाद करता था फंदा तैयार
इतिहासकारों के अनुसार, यदि किसी को फांसी दी जानी होती थी, तो फांसी घर के दूसरे हिस्से में जल्लाद द्वारा फांसी का फंदा तैयार किया जाता था और फिर अपराधी को नियत प्रक्रिया के अनुसार मृत्युदंड दिया जाता था. यह पूरी प्रक्रिया अत्यंत गोपनीय और सख्त अनुशासन में संपन्न होती थी.
फांसी घर की संरचना की बात करें, तो यह लगभग 50 फीट की ऊंचाई पर बना हुआ है. लोहे के हुक, भारी जंजीरें और मोटी पत्थर की दीवारें इसकी भयावहता को और बढ़ा देती हैं. फांसी घर का बाहरी हिस्सा पूरी तरह खुला है, जो किले में आने वाले पर्यटकों का ध्यान स्वतः अपनी ओर खींच लेता है.
दोषियों को मिलती थी फांसी की सजा
रानी लक्ष्मीबाई से जुड़े किले के सबसे चर्चित और रहस्यमय स्थलों में फांसी घर को प्रमुख स्थान प्राप्त है. लोककथाओं और इतिहासकारों की मानें तो रानी लक्ष्मीबाई के शासनकाल में इस फांसी घर का सबसे अधिक उपयोग हुआ. राज्य की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए, कठोर निर्णय लेने के बाद दोषियों को तत्काल फांसी घर में ले जाकर दंडित किया जाता था.
लोगों को करता है रोमांचित
आज भी झांसी के ऐतिहासिक किले में बना यह फांसी घर लोगों को डरावना, रहस्यमय और रोमांचक प्रतीत होता है. यहां से गुजरने वाले पर्यटकों की नजरें तब तक इस स्थान से नहीं हटतीं, जब तक वे इसे पूरी तरह देख न लें और इसकी तस्वीरें अपने मोबाइल कैमरे में कैद न कर लें.