Gaza Peace Board, Trump Invites Modi: ट्रंप साहब, हम आपके जाल में क्यों फंसें? ‘गाजा पीस बोर्ड’ का झुनझुना अपने पास ही रखिए!
आपके लिए हम शांतिदूत क्यों बनें
जब हम दुनिया को बचाने (पर्यावरण) की बात करते हैं, तो आप साथ नहीं देते. तो आज जब आपने मिडिल ईस्ट में बारूद का पहाड़ खड़ा कर दिया है, तो आप हमें ‘शांतिदूत’ बनाकर वहां क्यों भेजना चाहते हैं? आपकी दोस्ती ‘मौसमी’ है. जब आपको चीन को घेरना होता है, तो भारत नेचुरल अलाय बन जाता है. जब आपको अपनी गंदगी साफ करवानी होती है, तो भारत ग्लोबल लीडर बन जाता है. लेकिन जब भारत को तकनीक या साथ की जरूरत होती है, तो आप प्रतिबंधों और मानवाधिकारों का पाठ पढ़ाने लगते हैं. ऐसे दोस्तों के लिए हम अपनी जान जोखिम में क्यों डालें?
यह ‘पीस बोर्ड’ नहीं, एक ‘डेथ ट्रैप’ है
गाजा में जो हो रहा है, वह एक मानवीय त्रासदी है, लेकिन यह त्रासदी किसकी बनाई हुई है? यह अमेरिका की दशकों पुरानी गलत नीतियों का नतीजा है. अब जब वहां हालात हाथ से निकल चुके हैं, पूरी दुनिया में अमेरिका की थू-थू हो रही है, तो आपको अपनी इमेज सुधारने के लिए एक साफ-सुथरे चेहरे की तलाश है. और वह चेहरा आपको भारत में दिख रहा है. यह एक जाल है. अगर भारत वहां जाता है और शांति नहीं ला पाता, जो कि अमेरिका की मौजूदगी में असंभव है, तो बदनामी भारत के सिर आएगी. अगर वहां हमारे फैसलों से किसी एक पक्ष को बुरा लगा, तो जिस अरब दुनिया के साथ पीएम मोदी ने पिछले 10 साल में बेहतरीन रिश्ते बनाए हैं, वो एक झटके में खराब हो जाएंगे. अमेरिका चाहता है कि भारत अपनी ‘गुडविल’ को अमेरिका के पाप धोने के लिए इस्तेमाल करे. हम आपके ‘सफाई कर्मचारी’ नहीं हैं जो आपके फैलाए रायते को समेटने जाएं.
श्रीलंका का जख्म अभी भरा नहीं है
यूएन पीसकीपिंग के नाम पर हमें मत बहलाइए
तर्क दिया जाता है कि भारत तो यूएन में फौज भेजता ही है. फर्क समझिए. यूएन का मिशन दुनिया का मिशन होता है. ट्रंप का यह ‘बोर्ड’ अमेरिका का प्राइवेट प्रोजेक्ट है. इसमें शामिल होने का मतलब है गाजा में अमेरिका और इजरायल का ‘सब-कॉन्ट्रैक्टर’ बनना. भारतीय सेना का काम भारत की सीमाओं की रक्षा करना है, वाशिंगटन की विदेश नीति को लागू करना नहीं. हमारे सैनिकों की जान इतनी सस्ती नहीं है कि उन्हें किसी अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनावी वादे या ‘नोबेल पीस प्राइज’ की महत्वाकांक्षा पूरा करने के लिए दांव पर लगा दिया जाए.
ट्रंप साहब, आप अच्छे बिजनेसमैन हैं, लेकिन हर सौदा भारत को मंजूर नहीं. हम गाजा में मानवीय सहायता भेजेंगे, हम फिलिस्तीन के लिए स्कूल बनाएंगे, हम दवाइयां भेजेंगे. लेकिन हम आपके बनाए किसी ‘बोर्ड’ का हिस्सा बनकर वहां पुलिसगिरी करने नहीं जाएंगे. आपने सोलर अलायंस छोड़ा था, हमने कुछ नहीं कहा. अब आप हमें गाजा बुला रहे हैं, तो हमारा जवाब वही है जो आपने तब दिया था-सॉरी, नॉट इंट्रेस्टेड. भारत को किसी के जाल में फंसने की जरूरत नहीं है.