who is gangster kapil sangwan | kapil sangwan henchman manoj rathi | delhi police | delhi police special cell caught from igi airport | कौन है गैंगस्टर कपिल सांगवान का गुर्गा मनोज राठी, जिसे IGI एयरपोर्ट से उठा ले गई दिल्ली पुलिस?

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नई दिल्ली. राजधानी दिल्ली में गैंगस्टरों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है. स्पेशल सेल की न्यू दिल्ली रेंज (NDR) ने कुख्यात कपिल सांगवान उर्फ नन्दू गैंग के एक सक्रिय और वांछित गैंगस्टर मनोज राठी को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया है. 33 वर्षीय मनोज राठी न केवल हत्या के एक जघन्य मामले में फरार चल रहा था, बल्कि वह आर्म्स एक्ट के दो अलग-अलग मामलों में भी पुलिस की रडार पर था. कोर्ट द्वारा उसे भगोड़ा अपराधी घोषित किया जा चुका था और उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) भी जारी था, जिसकी मदद से पुलिस उसे दबोचने में कामयाब रही.

मर्चेंट नेवी से जुर्म की दुनिया तक का सफर

हरियाणा के झज्जर जिले के बहादुरगढ़ का रहने वाला मनोज राठी किसी साधारण पृष्ठभूमि से नहीं आता. उसने साल 2013 में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद चेन्नई से मर्चेंट नेवी का कोर्स किया था. कोर्स पूरा करने के बाद उसने सीरिया स्थित एक शिपिंग कंपनी में नौकरी भी की. हालांकि, साल 2017 में उसने यह प्रतिष्ठित नौकरी छोड़ दी और वापस हरियाणा लौट आया. यहां उसने अपने चचेरे भाइयों के साथ मिलकर प्रॉपर्टी डीलिंग का काम शुरू किया. इसी प्रॉपर्टी डीलिंग के धंधे के दौरान साल 2019 में उसका संपर्क कुख्यात गैंगस्टर कपिल सांगवान उर्फ नन्दू से हुआ, जिसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा और जुर्म के दलदल में धंसता चला गया.

हत्या और हथियारों की तस्करी में संलिप्तता

नन्दू गैंग में शामिल होने के बाद मनोज राठी उसके लिए बेहद खास बन गया. साल 2021 में कपिल सांगवान के इशारे पर मनोज ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर नजफगढ़ इलाके में एक प्रॉपर्टी डीलर की बेरहमी से हत्या कर दी थी. इस मामले में उसे गिरफ्तार भी किया गया था और वह लगभग तीन साल तक जेल में रहा. जमानत पर बाहर आने के बाद उसने सुधरने के बजाय गैंग के लिए हथियारों की सप्लाई लाइन को मजबूत करना शुरू कर दिया. फरवरी 2024 में जब दिल्ली पुलिस ने मध्य प्रदेश के दो सप्लायरों अंकित मिश्रा और जितेंद्र राजपूत को 12 पिस्तौलों के साथ गिरफ्तार किया तो पूछताछ में खुलासा हुआ कि वे हथियार मनोज राठी को ही डिलीवर होने वाले थे.

विदेश फरार होकर बना गैंगस्टर का ‘दाहिना हाथ’

जब पुलिस ने मनोज की तलाश तेज की, तो उसे भनक लग गई और वह कानूनी शिकंजे से बचने के लिए फरवरी 2024 में ही देश छोड़कर किसी अन्य देश भाग गया. इसके बाद कोर्ट ने उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया और स्पेशल सेल ने उसके खिलाफ एलओसी खुलवाई. विदेश में रहने के दौरान भी मनोज चुप नहीं बैठा. वह वहीं से कपिल सांगवान के लिए ‘हेंचमैन’ के रूप में काम करता रहा और दिल्ली-एनसीआर में गैंग की गतिविधियों को संचालित करने में मदद करता रहा. वह सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए अपने गुर्गों को निर्देश देता था.

हवाई अड्डे पर बिछाया गया जाल

दिल्ली पुलिस को इनपुट मिला था कि मनोज राठी वापस भारत लौटने की कोशिश कर सकता है. जैसे ही वह 9 जनवरी 2026 को आईजीआई एयरपोर्ट पर उतरा, वहां मौजूद सुरक्षा एजेंसियों ने एलओसी के आधार पर उसे इंटरसेप्ट कर लिया. सूचना मिलते ही इंस्पेक्टर सतीश राणा और इंस्पेक्टर अशोक के नेतृत्व में एसीपी राहुल विक्रम की निगरानी वाली स्पेशल सेल की टीम मौके पर पहुंची और उसे गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह नजफगढ़ हत्याकांड और बाबा हरिदास नगर में आर्म्स एक्ट के मामले में वांटेड था.

डीसीपी अमित कौशिक स्पेशल सेल, न्यू दिल्ली रेंज ने बताया कि मनोज राठी की गिरफ्तारी नन्दू गैंग के नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम है. पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि वह पिछले दो सालों से किस देश में शरण लिए हुए था और वहां से उसके संपर्क किन-किन अपराधियों से थे. साथ ही, हथियारों की सप्लाई चेन में उसके अन्य सहयोगियों की भी पहचान की जा रही है. पुलिस को उम्मीद है कि मनोज से पूछताछ में कपिल सांगवान के ठिकाने और भविष्य की साजिशों के बारे में कई अहम सुराग मिल सकते हैं.

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