जब नदीम-श्रवण ने लिया ‘बदला’, सिर्फ 1 शब्द के लिए प्रोड्यूसर से सबसे ज्यादा पैसे, रिलीज होते ही छा गई मूवी – when music composer nadeem shravan duo took extra fees from aamir khan father tahir hussain for this superhit movie gulshan kumar know weird reason
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Nadeem Shravan Superhit Songs : 90 के दशक की मशहूर संगीतकार जोड़ी नदीम-श्रवण के गाने आज भी संगीत प्रेमियों के दिल-दिमाग में छाए हुए हैं. इस जोड़ी का पूरा नाम नदीम सैफी-श्रवण राठौर था. दोनों ने अपने करियर की शुरुआती दौर बेनामी में गुजारा. भोजपुरी फिल्में भी कीं. फिर आया साल 1990. इसी साल टी-सीरीज के मालिक-म्यूजिक किंग के नाम से मशहूर गुलशन कुमार ने एक फिल्म ‘आशिकी’ रिलीज की. इस फिल्म ने टी-सीरीज, सिंगर कुमार सानू, नदीम-श्रवण, राहुल रॉय और अनु अग्रवाल को रातोंरात स्टार बना दिया. वैसे बहुत कम लोग जानते होंगे कि नदीम-श्रवण ने अपने करियर की शुरुआत 70 के दशक से की थी. 1973 में महज 19 साल की उम्र में नदीम-श्रवण की जोड़ी बन गई थी. नदीम का जब समय आया तो उन्होंने इंडस्ट्री से चुन-चुनकर बदला लिया. एक बार तो उन्होंने एक प्रोड्यूसर से बिना म्यूजिक दिए ही गाने के पैसे लिए थे. अपना म्यूजिक उन्हें सबसे महंगे दाम में बेचा था. यह प्रोड्यूसर कोई और नहीं बल्कि सुपरस्टार आमिर खान के पिता ताहिर हुसैन थे.

‘वैसे तो हम आजकल 10 लाख में 1 फिल्म करते हैं लेकिन आपको हम अपना म्यूजिक 11 लाख में देंगे.’ नदीम-श्रवण की जोड़ी ने सुपरस्टार आमिर खान के पिता ताहिर हुसैन के सामने जब अजीबो-गरीब डिमांड रखी तो वो गुस्सा हो गए. फिर उन्होंने कहा, ‘आप हमारे अजीज हैं. हमसे इतना पैसा क्यों ले रहे हैं? आपको तो हमें अपना म्यूजिक 5 लाख में देना चाहिए.’ इस पर नदीम सैफी ने जवाब देते हुए कहा, ‘आपने आज से 11-12 साल पहले हमारे म्यूजिक को अपरिपक्व बताते हुए खारिज कर दिया था. आपने ठीक ईद के दिन हमें रुला दिया था……’ 90 के दशक में नदीम-श्रवण की पूरी फिल्म में तूती बोलती थी. उनका म्यूजिक फिल्म की सफलता की गारंटी था. हर प्रोड्यूसर-डायरेक्टर उनसे म्यूजिक लेना चाहता था. उधर, नदीम जिनका पूरा नाम नदीम सैफी था, वो बुरे समय में अपने साथ हुए बुरे वर्ताव का बदला ले रहे थे. नदीम-श्रवण का आमिर खान के पिता से किस बात का झगड़ा था, आइये जानते हैं……

यह दिलचस्प किस्सा ‘हम हैं राही प्यार के’ फिल्म से जुड़ा हुआ है जो कि 23 जुलाई 1993 को रिलीज हुई थी.यह एक रोमंटिक कॉमेडी ड्रामा फिल्म थी जिसका निर्देशन महेश भट्ट ने किया था. प्रोड्यूसर ताहिर हुसैन थे. स्क्रीनप्ले आमिर खान-रॉबिन भट्ट ने लिखा था. रॉबिन भट्ट ने ही 1990 में आशिकी फिल्म लिखी थी. फिल्म में म्यूजिक नदीम-श्रवण का था. यह फिल्म 1958 की हॉलीवुड मूवी हाउसबोट से इंस्पायर्ड थी. फिल्म में आमिर खान-जूही चावला लीड रोल में थे. जूही चावला की एक्टिंग की बड़ी तारीफ हुई थी. जूही चावला को बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था. फिल्म को स्पेशल कैटेगरी में नेशनल अवॉर्ड भी मिला था. 1993 की बेस्ट फिल्म का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था.

‘हम हैं राही प्यार के’ मूवी में कुल 6 गाने रखे गए थे. फिल्म का म्यूजिक ब्लॉकबस्टर था. फिल्म का सबसे फेवरेट सॉन्ग ‘घूंघट की आड़ से दिलवर का’ था. इसके अलावा ‘काश कोई लड़का मुझे प्यार करता’ और ‘वो मेरी नींद मेरा चैन मुझे लौटा दो’, ‘बंबई से गई पूना, पूना से गई दिल्ली’ बहुत ही पॉप्युलर हुए थे. फिल्म का म्यूजिक नदीम-श्रवण ने कंपोज किया था. गीत समीर अनजान ने लिखे थे.
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संगीतकार श्रवण राठौर ने फिल्म से जुड़ा दिलचस्प किस्सा शेयर करते हुए एक इंटरव्यू में बताया था, ‘मैं लाला लाजपत राय कॉलेज में था. नदीम एलफिस्टन कॉलेज में थे. उन्हीं के कॉलेज में एक फंक्शन के दौरान मेरी उनसे मुलाकात हुई थी. यह बात दिसंबर 1972 की है. हम दोनों 18 साल के थे. नदीम-श्रवण बैनर हमने बनाया. कुछ भोजपुरी फिल्में की. आशिकी तक पहुंचने में हमें 17 साल का समय लगा. सफलता ना मिलने से हम निराश हो गए थे. नदीम ने तो कपड़ों का कारोबार शुरू करने का फैसला कर लिया था. कहीं से भी उम्मीद की किरण नहीं नजर आ रही थी. इसी बीच पता चला कि ताहिर हुसैन फिल्म बना रहे हैं. हम दोनों उनके घर गए. शाम के 7 बज रहे थे. रोजे चल रहे थे. हमने पहला गाना ‘घूंघट की आड़ से दिलवर का, दीदार अधूरा रहता है’ सुनाया. यह बात 1982 की है. 3-4 घंटे हमने गाने सुनाए. डिनर ऑफर हुआ तो हमें लगा कि फिल्म मिल जाएगी. तीन-चार दिन ईद थी. नदीम ने उन्हें ईद के दिन मुबारकबाद देने के लिए फोन किया. ताहिर हुसैन ने उन्हें मशविरा दिया कि आपके म्यूजिक में मैच्योरिटी नहीं है.’

किस्से को आगे बढ़ाते हुए श्रवण राठौर ने बताया, ‘ईद वाले दिन नदीम ने जब यह बात सुनी तो वो दुखी हो गए. मैं उनसे मिलने पहुंचा था. नदीम ने मुझसे कहा कि ताहिर कह रहे हैं कि हमारे म्यूजिक में मैच्योरिटी नहीं है. वो अनु मलिक का म्यूजिक ले रहे हैं. देखते-देखते 1989 आ गया. संघर्ष 15 साल का हो गया था. नदीम ने रेडीमेड गार्मेंट्स का कारोबार शुरू किया. फिर आई ‘आशिकी’ जिसके शुरुआती चार गाने रिकॉर्ड हुए थे. ये गाने थे : धीरे-धीरे से मेरी जिंदगी में आना, नजर के सामने, जिगर के पास, मैं दुनिया भुला दूंगा, तेरी चाहत में, और दिल है की मानता नहीं. गानों को सुनकर महेश भट्ट ने फिल्म बनाने का फैसला किया था. आशिकी फिल्म के लिए हमें सिर्फ 3 लाख रुपये मिले थे.’

नदीम-श्रवण ने ताहिर हुसैन ने अपनी बेइज्जती का बदला लिया. श्रवण राठौर ने अपने इंटरव्यू में आगे बताया, ‘आशिकी के बाद ‘सड़क’, ‘दिल है की मानता नहीं’और ‘साथी’ फिल्में रिलीज हुईं. चारों फिल्में महेश भट्ट की थीं. ताहिर हुसैन ने महेश भट्ट को अपनी अगली फिल्म ‘हम हैं राही प्यार के’ के लिए साइन किया. महेश भट्ट से उन्होंने कहा कि फिल्म में नदीम-श्रवण का म्यूजिक चाहिए. भट्ट साहब ने फोन किया और कहा कि ताहिर साहब आप दोनों को याद कर रहे हैं. हम दोनों ताहिर हुसैन से मिलने पहुंचे. ताहिर साहब ने कहा कि आप दोनों को फिल्म करनी है. म्यूजिक का कितना पैसे लेंगे? उस जमाने में हम 10 लाख रुपये एक फिल्म का लेते थे.’

श्रवण राठौर आगे बताते हैं, ‘नदीम ने जवाब देते हुए कहा कि ताहिर साहब हम मार्केट में तो 10 लाख ले रहे हैं लेकिन हम आपसे 11 लाख लेंगे. ताहिर साहब थोड़े नाराज हो गए. वो बोले कि ये नाइंसाफी क्यों? अगर आप मार्केट से 10 लाख ले रहे हैं तो हम तो 5 लाख ही देंगे ना. नदीम ने कहा कि नहीं, आपको एक लाख ज्यादा देना होगा. यह पैसा आपको जुर्माने के तौर पर देने होंगे. उन्होंने कहा कि यह जुर्माना किस बात का है? इस पर नदीम ने कहा कि 1982 में आपके साथ हमारी जो सिटिंग हुई थी, उस वक्त आपने एक शब्द कहा था कि हमारा म्यूजिक मैच्योर नहीं है.’

इस फिल्म से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा यह है कि ‘घूंघट की आड़ से’ गाने को नदीम-श्रवण ने जबरन फिल्म में रखवाया था. यह गाना उन्होंने ताहिर हुसैन को 1982 में अपनी पहली सिटिंग में भी सुनाया था. इस गाने पर ताहिर हुसैन ने आपत्ति जताई थी. गीतकार समीर अंजान को ‘आड़’ शब्द हटाने को कहा था. नदीम ने गाने के बोल बदलने से इनकार कर दिया. बाद में यही सॉन्ग फिल्म की पहचान बन गया. करीब 3 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने 9 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. यह एक बड़ी हिट फिल्म साबित हुई थी.