एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत ने खोल दी नोएडा अथॉरिटी की पोल, सीएम योगी ने मंगाई फाइल तो दौड़ने लगे अफसर
नोएडा. नोएडा का सेक्टर 150, जिसे दिल्ली-एनसीआर का पॉश और ग्रीन सेक्टरों में एक कहा जाता है, वही सेक्टर एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के लिए मौत का जाल बन गया. जहां बड़े-बड़े बिल्डरों के गगनचुंबी प्रोजेक्ट्स सपनों के आशियाने का वादा करते हैं, उसी जगह पर एक बूढ़ा बाप अपने जवान बेटे के शव के सामने रो रहा है. इस सेक्टर के एक खाली प्लॉट में भरे कई फीट गहरे पानी में एक बाप का बुढ़ापे का सहारा छीन लिया. इस खाली प्लॉट के पानी में कार डूबने से इंजीनियर की मौत ने नोएडा प्राधिकरण के दावों और बिल्डरों की लापरवाही का ऐसा काला चेहरा सामने रखा है, जिसने सत्ता के गलियारों तक को हिला दिया है. इस घटना के बाद नोएडा से लेकर लखनऊ तक अधिकारियों की सांसे अटकी हुई हैं. यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से लेकर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक एक्शन में आ गए हैं.
सीएम योगी के फरमान से हड़कंप
यह मामले ने तूल पकड़ा तो रविवार को पुलिस ने मृतक युवराज के पिता की तहरीर पर पहली एफआईआर दर्ज की और नोएडा प्राधिकरण के सीईओ लोकेश एम ने इंजीनियर की मौत केस में तत्काल विभागीय कार्रवाई कर नोएडा प्राधिकरण के ट्रैफिक सेल के जेई नवीन कुमार को निलंबित कर दिया. लेकिन मृतक युवराज मेहता के पिता ने रेस्क्यू टीम पर बड़ा आरोप लगाया है. उन्होंने कहा है कि रेस्क्यू टीम जब मेरे बेटे को बचाने पहुंची थी तो वह अपने साथ सिर्फ रस्सी लेकर गए थे. उन्होंने साथ में दूसरा ऑप्शन नहीं रखा था, जिससे वह युवराज को बचा सकते. वहीं अब सॉफ्टवेयर इंजीनियर की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है. खबरों के अनुसार, डॉक्टरों ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में युवराज मेहता की मौत की वजह कार्डियक अरेस्ट बताया है.
सीएम योगी का कड़ा रुख
सीईओ लोकेश एम का ‘हंटर’
नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी लोकेश एम ने घटना की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से कड़े कदम उठाए हैं. इस एऱिया की जिम्मेदारी संभालने वाले जूनियर इंजीनियर को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया गया है. उन पर ड्यूटी में लापरवाही बरतने का आरोप है. वर्क सर्कल के वरिष्ठ अधिकारियों और संबंधित परियोजना अभियंताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. उनसे पूछा गया है कि खुले पड़े गड्ढों और बिना बाउंड्री वाले प्लॉटों पर पहले कार्रवाई क्यों नहीं की गई.
बिल्डरों पर एफआईआर
मृतक इंजीनियर के परिजनों की शिकायत और प्राथमिक जांच के आधार पर संबंधित साइट के बिल्डरों के खिलाफ लापरवाही से मौत (धारा 304A) और अन्य गंभीर धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है. सीईओ ने पूरे सेक्टर 150 और निर्माणाधीन क्षेत्रों का तत्काल ‘सेफ्टी ऑडिट’ करने का निर्देश दिया है ताकि भविष्य में ऐसी घटना न हो.
विशेषज्ञों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि नोएडा अथॉरिटी केवल कागजों पर विकास करती है. सेक्टर 150 में करोड़ों के फ्लैट्स बिक रहे हैं, लेकिन बुनियादी ढांचे के नाम पर सड़कें अधूरी हैं और ड्रेनेज सिस्टम फेल है. बिल्डर निर्माण कार्य के लिए गहरे गड्ढे खोद देते हैं और उन्हें खुला छोड़ देते हैं. मानसून के दौरान ये गड्ढे जानलेवा बन जाते हैं. अथॉरिटी के अधिकारी एसी कमरों में बैठकर फाइलों पर हस्ताक्षर करते हैं, जबकि जमीन पर क्या स्थिति है, उसे देखने वाला कोई नहीं है.