सॉफ्टवेयर इंजीनियर बना हाईटेक चोर, फर्जी बैंक एनओसी बनाकर कूट लिए करोडों रुपये, अब एक गलती ने पहुंचा दिया हवालात | delhi police arrest software engineer turned high tech thief pan india luxury car theft syndicate 16 vehicles recovered

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नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच इंटर-स्टेट सेल ने एक ऐसे शातिर और हाई-टेक वाहन चोर सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है, जिसने देश के कई राज्यों में अपनी जड़ें फैला रखी थीं. यह सिंडिकेट केवल कार चोरी ही नहीं करता था, बल्कि चोरी की गाड़ियों को पूरी तरह से लीगल बनाकर बाजार में बेचने का काला कारोबार चला रहा था. खास बात यह है कि इस सिंडिकेट में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर शामिल था, जो फर्जी बैंक एनओसी बनाने में माहिर था. लेकिन एक गलती की वजह से अब वह सलाखों के पीछे हैं. दिल्ली पुलिस ने इस मामले में गिरोह के सरगना समेत तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इनके पास से 16 लग्जरी गाड़ियां बरामद की हैं, जिनमें फॉर्च्यूनर, थार और किया सेल्टोस जैसी महंगी एसयूवी शामिल हैं.

पीतमपुरा से चोरी हुई थी क्रेटा इस पूरे मामले की शुरुआत 5 अगस्त 2025 को हुई, जब दिल्ली के पीतमपुरा एपी ब्लॉक) से एक हुंडई क्रेटा कार चोरी हुई थी. मौर्य एनक्लेव थाने में ई-एफआईआर दर्ज होने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच क्राइम ब्रांच की इंटर-स्टेट सेल (ISC) को सौंपी गई. डीसीपी आदित्य गौतम के निर्देशन में एसीपी रमेश चंद्र लांबा और इंस्पेक्टर मनमीत की टीम ने तकनीकी सर्विलांस और खुफिया सूत्रों की मदद से जांच शुरू की.

सॉफ्टवेयर इंजीनियर बना हाईटेक चोर

इसी दौरान एएसआई प्रवीण सिंह और हेड कांस्टेबल पुष्पा को पुख्ता जानकारी मिली कि पंजाब के जालंधर में एक ‘सेकेंड हैंड कार’ डीलर चोरी की गाड़ियों के अवैध कारोबार में लिप्त है और दिल्ली से चोरी हुई क्रेटा भी उसके पास हो सकती है.

16 लग्जरी गाड़ियां बरामद

जालंधर में रेड और मास्टरमाइंड ‘लकी’ की गिरफ्तारी 25 दिसंबर 2025 को दिल्ली पुलिस की एक विशेष टीम ने जालंधर में छापेमारी की. वहां ‘सेकेंड हैंड कार’ का कारोबार चलाने वाला दमनदीप सिंह उर्फ लकी (42 वर्ष) पुलिस के हत्थे चढ़ गया. उसके ठिकाने की तलाशी लेने पर चार ‘किया सेल्टोस’ गाड़ियां बरामद हुईं, जो दिल्ली के अलग-अलग इलाकों से चोरी की गई थीं. पूछताछ में लकी ने जो खुलासे किए, उसने पुलिस अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए.

मोडस ऑपरेंडी

‘टोटल लॉस’ गाड़ियों का इस्तेमाल और फर्जीवाड़ा यह सिंडिकेट बेहद व्यवस्थित तरीके से काम करता था. गिरोह के सदस्य दिल्ली-एनसीआर से लग्जरी गाड़ियां चोरी करवाते थे. इसके बाद उन गाड़ियों को पंजाब ले जाया जाता था. वहां ये लोग ‘टोटल लॉस’ (हादसे में पूरी तरह बर्बाद हुई गाड़ियां) के चेसिस नंबर और कागजातों का इस्तेमाल चोरी की गाड़ियों पर करते थे.

गिरोह का दूसरा सदस्य अरविंद शर्मा, जो कि एक बी.टेक स्नातक है, फर्जी बैंक एनओसी (NOC) और सेल लेटर तैयार करने में माहिर था. इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर चोरी की गाड़ियों को हिमाचल प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में दोबारा रजिस्टर कराया जाता था. इसके बाद इन गाड़ियों को नए नंबर और नए कागजों के साथ बाजार में बिल्कुल असली बताकर ग्राहकों को बेच दिया जाता था. इस खेल में दिल्ली के पीतमपुरा का रहने वाला अमनदीप सिंह बिचौलिए की भूमिका निभाता था, जो ग्राहकों को फंसाने और गाड़ियों की डिलीवरी में मदद करता था.

16 लग्जरी गाड़ियां बरामद, सॉफ्टवेयर इंजीनियर भी शामिल पुलिस ने अब तक इस सिंडिकेट के पास से कुल 16 गाड़ियां बरामद की हैं, जिनमें 8 टोयोटा फॉर्च्यूनर, 5 किया सेल्टोस, 1 महिंद्रा थार, 1 हुंडई वेन्यू और 1 क्रेटा शामिल है. बरामद की गई दो फॉर्च्यूनर तो दिल्ली के ग्राहकों को बेची भी जा चुकी थीं, जिनके चेसिस नंबरों से छेड़छाड़ की गई थी.

आरोपियों का प्रोफाइल भी चौंकाने वाला है:

दमनदीप सिंह (जालंधर): मास्टरमाइंड, जो सेकेंड हैंड कार डीलरशिप की आड़ में सिंडिकेट चला रहा था.

अरविंद शर्मा (चंडीगढ़): बी.टेक स्नातक और सॉफ्टवेयर कंपनी का पूर्व कर्मचारी, जो 2019 से फर्जी दस्तावेज बनाने का काम कर रहा था.

अमनदीप सिंह (दिल्ली): कीर्ति नगर में फर्नीचर की दुकान चलाने वाला यह शख्स गिरोह के लिए दिल्ली में फील्ड ऑपरेटिव का काम करता था.

डीसीपी क्राइम ब्रांच आदित्य गौतम ने बताया कि यह सिंडिकेट न केवल आम जनता को चूना लगा रहा था, बल्कि वित्तीय संस्थानों (बैंकों) के साथ भी धोखाधड़ी कर रहा था. फिलहाल गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है और उम्मीद है कि जल्द ही कुछ और लग्जरी गाड़ियां बरामद की जा सकेंगी.

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