बिना मावा, चीनी या गुड़ के बनती है ये खास नवाबी मिठाई! जिसकी हर बाइट में छुपा है सेहत का खजाना, कीमत ₹1200 किलो – Uttar Pradesh News
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Rampur Special Sweet: रामपुर की पहचान उसकी तहज़ीब और नवाबी विरासत के साथ-साथ एक खास पारंपरिक मिठाई से भी जुड़ी है. करीब 100 साल पुरानी यह मिठास आज भी उसी देसी अंदाज में तैयार की जा रही है. शुद्ध देसी घी, अंजीर और ड्राई फ्रूट्स से बनी यह मिठाई स्वाद के साथ सेहत का भी भरोसा देती है, जिस वजह से इसकी मांग लगातार बढ़ रही है.
रामपुर: उत्तर प्रदेश का रामपुर सिर्फ अपने इतिहास, नवाबी अंदाज और तहज़ीब के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी खास और पारंपरिक मिठाइयों के लिए भी जाना जाता है. यहां की गलियों में आज भी ऐसी मिठाइयों की खुशबू बसी है, जो बीते दौर की याद दिला देती है. इन्हीं में एक नाम है अंजीर बाइट, जो इन दिनों एक बार फिर लोगों की पसंद बनती जा रही है. खास बात यह है कि यह मिठाई कोई नई खोज नहीं है, बल्कि करीब 100 साल पुरानी नवाबों के जमाने की रेसिपी पर आज भी रामपुर की एक पुरानी दुकान में उसी देसी तरीके से तैयार की जा रही है. समय बदला है, लोगों की पसंद बदली है, लेकिन इस मिठाई का स्वाद और उस पर लोगों का भरोसा आज भी वैसा ही बना हुआ है.
क्यों खास है रामपुर की अंजीर बाइट
अंजीर बाइट को अगर आज की भाषा में हेल्दी मिठाई कहा जाए, तो यह गलत नहीं होगा. इसमें अंजीर, शुद्ध देसी घी और चुनिंदा ड्राई फ्रूट्स जैसे काजू और बादाम का इस्तेमाल किया जाता है. अंजीर अपने आप में फाइबर, आयरन, कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है. यह पाचन को ठीक रखने, शरीर में खून की कमी दूर करने और हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है. यही वजह है कि यह मिठाई बुजुर्गों से लेकर युवाओं और बच्चों तक सभी को पसंद आ रही है.
आज भी पारंपरिक तरीके से होती है तैयारी
रामपुर की जिस पुरानी दुकान पर अंजीर बाइट बनाई जा रही है, वहां आज भी मिठाई बनाने का तरीका काफी हद तक पारंपरिक ही रखा गया है. दुकान चलाने वाले अब्दुल अहद बताते हैं कि नवाबों के दौर में यह मिठाई खास तौर पर ताकत बढ़ाने के लिए बनाई जाती थी. उस समय इसे खास मेहमानों और दरबार से जुड़े लोगों को परोसा जाता था.
कैसे बनाई जाती है अंजीर बाइट
अंजीर बाइट बनाने की प्रक्रिया भी पूरी तरह देसी और मेहनत भरी होती है. सबसे पहले सूखे अंजीरों को अच्छे से भिगोया जाता है, ताकि वे नरम हो जाएं. इसके बाद उन्हें पीसकर एक गाढ़ा पेस्ट तैयार किया जाता है. फिर इसमें शुद्ध देसी घी और कटे हुए काजू-बादाम मिलाए जाते हैं. इस मिश्रण को धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए पकाया जाता है. पहले के समय में इसमें चीनी या गुड़ का इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन अब कई जगह अंजीर की प्राकृतिक मिठास से ही अंजीर बाइट तैयार की जा रही है. यही वजह है कि डायबिटीज से परहेज करने वाले लोग भी इसे सीमित मात्रा में खाना पसंद कर रहे हैं.
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सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें