Bactrian Camels Indian Army : What Ladakh Warriors Are Doing In Delhi? | बर्फीले रेगिस्तान के ये ‘योद्धा’ दिल्ली में क्या कर रहे? इतने खास क्यों हैं डबल हंप वाले बाक्ट्रियन ऊंट

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Bactrian Camels Indian Army: दिल्ली के विजय चौक पर गहरी धुंध और ठंड के बीच रिपब्लिक डे परेड की रिहर्सल चल रही है. इसी दौरान लोगों की नजर एक बेहद खास टुकड़ी पर टिक गई – इंडियन आर्मी के रिमाउंट वेटरिनरी कोर (RVC) के साथ डबल हंप वाले बैक्ट्रियन ऊंट और पोनी. दो कूबड़ वाले बैक्ट्रियन ऊंटों ने सबका ध्‍यान अपनी तरफ खींचा. ये ऊंट आमतौर पर लद्दाख के बर्फीले रेगिस्तान में पाए जाते हैं. रिपब्लिक डे परेड की तैयारियों में ये योद्धा पहली बार आकर्षण का बड़ा केंद्र बने हैं. भारतीय सेना के रिमाउंट वेटनरी कॉर्प्स (RVC) के जवान इनके साथ मुस्तैद नजर आए. ठंड इतनी थी कि दृश्यता बहुत कम थी लेकिन जवानों का जोश चरम पर रहा. बैक्ट्रियन ऊंट लद्दाख की दुर्गम पहाड़ियों में रसद पहुंचाने का महत्वपूर्ण काम करते हैं. अब ये दिल्ली की सड़कों पर अपना दम दिखाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. इनके साथ सेना के पोनी और डॉग स्क्वायड ने भी अपनी ताकत का प्रदर्शन किया. (Photos : PTI)

बैक्ट्रियन ऊंट मुख्य तौर पर लद्दाख और कोल्ड डेजर्ट रीजन में पाए जाते हैं. इन इलाकों का तापमान माइनस में चला जाता है, हवा तेज होती है और ऑक्सीजन कम रहती है. ऐसे वातावरण में भी ये ऊंट टिके रहते हैं, इसलिए इन्हें ‘कोल्ड डेजर्ट वॉरियर’ कहा जाता है.

भारतीय सेना ने लद्दाख में निगरानी बढ़ाने के लिए इन ऊंटों को शामिल किया है. ये दो कूबड़ वाले ऊंट भारी वजन उठाकर ऊंची पहाड़ियों पर आसानी से चल सकते हैं. ये 17,000 फीट की ऊंचाई पर भी बिना थके काम करने में सक्षम हैं.

इनके शरीर की बनावट इन्हें हड्डियों को गलाने वाली ठंड से बचाती है. बिना पानी और भोजन के ये जीव कई दिनों तक जीवित रह सकते हैं. पूर्वी लद्दाख के मुश्किल हालातों में ये सैनिकों के सबसे भरोसेमंद साथी साबित होते हैं. इनकी मौजूदगी ने चीन सीमा पर सेना की रसद क्षमता को काफी मजबूती दी है.

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दिल्ली की सर्दी और कोहरा इन दिनों अपने सबसे खतरनाक स्तर पर है. शनिवार की सुबह विजय चौक पूरी तरह सफेद चादर में लिपटा हुआ था. इसके बावजूद भारतीय सेना के जवानों का अभ्यास एक पल के लिए भी नहीं रुका. बाक्ट्रियन ऊंटों के साथ सैनिकों का तालमेल वाकई में देखने लायक था.

रिहर्सल के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम और सेना की गाड़ियां भी नजर आईं. रिमाउंट वेटनरी कॉर्प्स के साथ बीएसएफ का कैमल रेजिमेंट भी अपनी चमक बिखेर रहा था. यह कठिन रिहर्सल 26 जनवरी की भव्य परेड को सफल बनाने के लिए की जा रही है.

रिहर्सल में RVC के साथ-साथ BSF के कैमल रेजिमेंट की झलक भी दिखी. BSF कैमल रेजिमेंट आमतौर पर बॉर्डर एरिया में पेट्रोलिंग और सर्विलांस के लिए मशहूर है. वहीं RVC मिलिट्री एनिमल्स की ट्रेनिंग, हेल्थ और ऑपरेशंस सपोर्ट में अहम भूमिका निभाती है.

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बर्फीले रेगिस्तान से दिल्ली पहुंचे, क्यों खास हैं दो कूबड़ वाले बैक्ट्रियन ऊंट

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