‘पाकिस्तान चले जाओ’ बाल ठाकरे ने जब दिलीप कुमार को दी देश छोड़ने की नसीहत, पीएम को करना पड़ा था बचाव
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दिलीप कुमार एक शानदार इंसान थे. सुपरस्टार के चाहनेवाले भारत-पाकिस्तान दोनों तरफ थे. उन्होंने कारगिल युद्ध के समय दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करने की कोशिश की थी. हालांकि, एक वायके के बाद शिवसेना के सुप्रिमो बाल ठाकरे ने उन्हें पाकिस्तान जाने की नसीहत दे डाली थी. उस वक्त पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी उनके सपोर्ट में उतर गए थे. तब दिलीप कुमार ने ऐसी बात कही थी, जो उनकी गहरी आत्मिक पीड़ा को बयां करता है.

नई दिल्ली: ‘हम भारत में रहेंगे और भारत में ही मरेंगे’ दिलीप कुमार के पिता का यह कथन, उनकी देशभक्ति का सबसे बड़ा प्रमाण है. आप दिलीप कुमार की शख्सियत का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि साल 1999 में करगिल युद्ध के समय तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें फोन कॉल पर बुलाया था.

दिलीप कुमार एक ‘कल्चरल एम्बेसडर’ थे जिनकी बात सरहद पार पाकिस्तान में भी सुनी जाती थी. वे एक ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने विभाजन के दर्द को करीब से देखा और जीवन भर भारत-पाकिस्तान के बीच शांति का रास्ता खोजने की कोशिश करते रहे. आज भी पेशावर में उनका पुश्तैनी घर और मुंबई में उनकी यादें, दोनों देशों के साझा इतिहास का हिस्सा हैं. (फोटो साभाMDb)

दिलीप कुमार को जब 1998 में पाकिस्तान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान निशान-ए-इम्तियाज से सम्मानित किया गया था. तब शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे के साथ उनके संबंध खराब हो गए थे. ‘निशान-ए-इम्तियाज’ को लौटाने के दबाव के बीच दिलीप साहब का कहना कि 65 साल रहने के बाद मुझे अपनी वफादारी साबित करनी पड़ रही है’, उनकी गहरी पीड़ा को बयां कर रही थी.
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बाल ठाकरे ने दिलीप कुमार से कहा था कि वे भारत छोड़ दें और पाकिस्तान चले जाएं. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, ‘बाल ठाकरे एंड द राइज ऑफ द शिवसेना’ किताब में वैभव पुरंधरे ने बाल ठाकरे के एक बयान को कोट किया है, जिसमें उन्होंने कहा था, ‘अभी चना भी है, बीयर भी है, लेकिन दिलीप कुमार के रास्ते बदल गए हैं.’

दिलीप कुमार, बाल ठाकरे के बयान से काफी आहत हुए थे और उन्होंने इंडिया टुडे से बातचीत में कहा था, ’65 साल यहां रहने के बाद मुझे ठाकरे के सामने अपनी वफादारी साबित करनी पड़ रही है.’ बालासाहेब ने यह भी कहा था कि दिलीप कुमार को भारत छोड़कर पाकिस्तान में रहना चाहिए.

दिलीप कुमार ने जवाब में एनडीटीवी से कहा था, ‘शिवसेना और उनके नेता ने कहा कि मुझे यह सम्मान लौटाना चाहिए और अगर मैं सम्मान नहीं लौटाता तो मुझे देश छोड़कर पाकिस्तान चले जाना चाहिए और वहीं रहना चाहिए. मुझे लगता है कि यह एक जिम्मेदार व्यक्ति की खराब टिप्पणी है. इसका कोई कानूनी आधार नहीं है. यह दुखद है. यह व्यक्ति की गरिमा को ठेस पहुंचाता है. इससे इंसान को गलत महसूस होता है और गुस्सा आता है.’ (फोटो साभाMDb)

दिलीप कुमार ने इस मामले पर प्रधानमंत्री वाजपेयी से बात की और उन्होंने दिलीप कुमार को सम्मान बनाए रखने के लिए कहा. दिलीप कुमार ने अपनी किताब में इस घटना को याद करते हुए लिखा, ‘जैसा कि वाजपेयी जी ने खूबसूरती से कहा था, ‘आप एक कलाकार हैं और इस नाते आप राजनीतिक या भौगोलिक सीमाओं से बंधे नहीं हैं. आपको आपके मानवीय कार्यों के लिए चुना गया है.’ (फोटो साभाMDb)

एक साल बाद 1999 में जब करगिल युद्ध हुआ, तो आलोचकों ने कहा कि अब दिलीप कुमार को अपना सम्मान लौटा देना चाहिए. उस वक्त अटल बिहारी के कहने पर दिलीप कुमार ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से बात की थी. उन्होंने बातचीत में भारतीय मुसलमानों की असुरक्षा पर एक कड़वा सच बयां किया था.

दिलीप कुमार का बचपन का घर आज भी पेशावर में मौजूद है. सरकार ने इस घर को संरक्षित स्मारक घोषित कर दिया है. 2025 में खबर आई थी कि इस घर को म्यूजियम में बदलने की योजना है. दिलीप कुमार का निधन 2021 में 98 वर्ष की उम्र में हुआ.