29 में से 13 में पूर्ण बहुमत, 50 फीसदी सीटों पर कब्जा; बीजेपी ने महाराष्ट्र में कैसे छीनी शहरों की सत्ता?
Maharashtra Municipal Corporations 2026: महाराष्ट्र नगर निगम चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की शानदार जीत की चहूं ओर चर्चा हो रही है. चर्चा इस बात की भी है कि बीएमसी की सत्ता में 25 साल बाद बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिल रहा है. बीएमसी में बीजेपी गठबंधन ने बहुमत से ज्यादा 119 वार्ड जीतकर सत्ता में आई है. वहीं, पूरे राज्य की बात की जाए तो अपने दम पर 1,425 पार्षदों के साथ BJP अब नगर निगमों के लगभग आधी सत्ता पर काबिज है. ये भाजपा का अब तक का सबसे मजबूत सिविक प्रदर्शन है.
भाजपा सालों से महाराष्ट्र नगर निकाय चुनाव में धीरे-धीरे बढ़ रही थी. बढ़त का पैमाना समय के साथ बढ़ता गया. पिछले नगर निगम चुनाव में पार्टी के पास 1,099 पार्षदों थे. जबकि उससे पहले वाले चुनाव में यानी कि 2009-2013 में भाजपा के पास केवल 320 पार्षद थे. यह लगातार बढ़ोतरी दिखाती है कि भाजपा ने पिछले एक दशक में शहरों और बड़े कस्बों में अपनी स्थिति कितनी मजबूत की है.
29 में 13 पर अकेले सत्ता में
भाजपा अब राज्य के 29 नगर निगमों में से 13 में बहुमत में है. इसमें नवी मुंबई, मीरा-भायंदर, पनवेल, नासिक, धुले, जलगांव, पुणे, पिंपरी-चिंचवाड़, सोलापुर, नांदेड़, नागपुर, इचलकरंजी और जालना शामिल हैं. इसके अलावा, यह मुंबई, उल्हासनगर, अमरावती, अकोला, छत्रपति संभाजीनगर और सांगली समेत छह और कॉर्पोरेशन में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है.
पिछली बार 13 निगम में भाजपा के मेयर
2015-2018 में भी भाजपा 13 निगम में पूरी बहुमत हासिल की थी. लेकिन, मौजूदा नतीजों में पार्टी का ज्यादा तेजी से और ज्यादा मजबूत होना दिख रहा है, जिसमें पार्टी नए शहरी सेंटर में अपनी पकड़ बढ़ा रही है. इस मौजूदा मजबूत इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत कर रही है.
2014 के बाद से बदला माहौल
भाजपा की इस दबदबे की जड़ें भाजपा की 2014 की लोकसभा जीत से जुड़ी हैं, जिसने महाराष्ट्र के राजनीतिक माहौल को बदल दिया. उस जीत ने शहरी वोटिंग पैटर्न में बदलाव दिखाया, पारंपरिक वफादारी को कमजोर किया और भाजपा को शहरों में सत्ता की डिफॉल्ट पार्टी बना दिया. बाद के विधानसभा और नगर निगम चुनावों ने इस ट्रेंड को और मज़बूत किया है.
दूसरी बड़ी पार्टी
भाजपा के विरोधियों और सहयोगियों में एकनाथ शिंदे की शिवसेना 399 पार्षदों के साथ दूसरी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है, जबकि उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) को 155 सीटें मिली हैं. कुल मिलाकर, अविभाजित शिवसेना पिछली बार 489 पार्षदों जीते थे. हालांकि, बंटवारे के बाद पार्टी की कुल सिविक ताकत में गिरता दिख रहा है.
कहां है कांग्रेस
कांग्रेस, जो कभी शहरी लोकल बॉडीज़ में एक अहम प्लेयर थी, अब 324 पार्षदों पर आ गई है. पिछले चुनावों में 439 पर थी. यह सिर्फ लातूर में पूरी मेजोरिटी हासिल कर पाई है, जो महाराष्ट्र के शहरों में इसके घटते असर को दिखाता है. नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) के अंदर भी ऐसी ही कहानी सामने आई है. अजित पवार की लीडरशिप वाली NCP ने 169 सीटें जीती हैं, जबकि शरद पवार की लीडरशिप वाली NCP (SP) सिर्फ 36 पार्षदों के साथ हाशिए पर चली गई है. इसके उलट, अविभाजित NCP ने पिछले साइकिल में 294 सीटें जीती थीं.
| राजनीतिक दल | 2026 में जीती गई सीटें | 27 निगमों में जीती गई सीटें (फरवरी 2015-दिसंबर 2018) | 27 निगमों में जीती गई सीटें (फरवरी 2009-दिसंबर 2013) |
| भाजपा | 1,425 | 1099 | 320 |
| शिव सेना (शिंदे) | 399 | 489 | 413 |
| शिव सेना (यूबीटी) | 155 | – | – |
| कांग्रेस | 324 | 439 | 614 |
| राकांपा | 167 | 294 | 554 |
| एनसीपी (एसपी) | 36 | — | — |
| कुल सीटें | 2,869 | 2,736 | 2,543 |