पठान-टाइगर ने बदली सोच, वीर दास ने बताया कैसे आया स्पाई कॉमेडी का आइडिया, कहा- मैंने पूरी स्क्रिप्ट दोबारा लिखी
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मशहूर कॉमेडियन और एक्टर वीर दास ने हाल ही में खुलासा किया कि उनकी फिल्म ‘हैप्पी पटेल’ को पर्दे तक लाने में शाहरुख और सलमान की फिल्मों का बड़ा हाथ है. वीर ने बताया कि कैसे ‘पठान’ और ‘टाइगर 3’ की ब्लॉकबस्टर सफलता ने उन्हें अपनी फिल्म की स्क्रिप्ट दोबारा लिखने के लिए प्रेरित किया. उनके मुताबिक, जब बॉलीवुड में स्पाई फिल्मों का दौर चरम पर है, तो यही सही मौका है इसका एक काउंटर-कल्चर यानी मजेदार और कॉमेडी वर्जन पेश करने का.
आमिर खान ने प्रोड्यूस की वीर दास की फिल्म हैप्पी पटेल.नई दिल्ली. वीर दास ने अपनी हालिया फिल्म ‘हैप्पी पटेल: खतरनाक जासूस’ के जरिए डायरेक्शन की दुनिया में कदम रखा है. इस फिल्म की एक और खास बात यह है कि इसके जरिए इमरान खान ने लंबे समय बाद पर्दे पर वापसी की है. वीर दास के निर्देशन में बनी यह पहली फिल्म 16 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है. ‘हैप्पी पटेल: खतरनाक जासूस’ को आमिर खान ने प्रोड्यूस किया है. इस बीच वीर दास ने खुलासा किया कि उनकी फिल्म ‘हैप्पी पटेल’ को पर्दे तक लाने में शाहरुख खान और सलमान खान की स्पाई फिल्मों का बड़ा हाथ है.
मेनस्ट्रीम के उलट हमेशा चलती है कॉमेडी
वीर ने आगे कहा, ‘कॉमेडी हमेशा मेनस्ट्रीम के उलट चलती है, यानी जब कोई चीज बहुत पॉपुलर हो जाती है, तभी उसका कॉमेडी वर्जन बनाने में मजा आता है. अब जब भारतीय सिनेमा में स्पाई जॉनर सबसे टॉप पर है, तो इसका कॉमेडी वर्जन लाने का यही सही समय है. करीब दो साल पहले पठान या टाइगर 3 देखने के बाद ही मैंने पूरी स्क्रिप्ट दोबारा लिखने का फैसला किया था.’
आमिर खान की फिल्म को लेकर नर्वस हुए वीर दास?
इस फिल्म के जरिए आमिर खान और इमरान खान सालों बाद एक साथ आ रहे हैं और आमिर खुद भी लंबे समय बाद पर्दे पर लौट रहे हैं. जब वीर दास से पूछा गया कि क्या इस बात से उन्हें घबराहट हुई, तो उन्होंने कहा, ‘बिल्कुल, मैं नर्वस हूं. मैंने अपनी फिल्म को कम से कम 800 बार देखा है, ताकि यह पक्का कर सकूं कि कदमों की आहट से लेकर गोली चलने की आवाज तक, सब कुछ एकदम परफेक्ट हो’.
आमिर खान के काम करने के तरीके से मिलता है हौसला
उन्होंने आगे कहा कि आमिर खान के काम करने के तरीके से बहुत हौसला मिलता है. फिल्म रिलीज करने से पहले वह आपसे कम से कम 30 टेस्ट स्क्रीनिंग करवाते हैं. जब आप 22 या 25 बार फिल्म अलग-अलग लोगों को दिखाते हैं और उनकी राय के हिसाब से बदलाव करते रहते हैं, तब जाकर कहीं ऐसा होता है कि लोग कहें- फिल्म का दूसरा हिस्सा तो पता ही नहीं चला कि कब बीत गया और क्लाइमैक्स एकदम जबरदस्त था. बस, एक डायरेक्टर के तौर पर आप यही तो चाहते हैं.
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साल 2015 में दैनिक भास्कर से करियर की शुरुआत की. फिर दैनिक जागरण में बतौर टीम लीड काम किया. डिजिटल करियर की शुरुआत आज तक से की और एबीपी, ज़ी न्यूज़, बिज़नेस वर्ल्ड जैसे संस्थानों में काम किया. पिछले 6 सालों से …और पढ़ें