हमास के ‘नुखबा’ मॉडल पर भारत को दहलाने का नापाक प्लान, ‘शार्क’ की तरह समुद्री सीमा में घुसेंगे लश्‍कर आंतकी

Share to your loved once


आधी रात का सन्नाटा… समंदर की लहरों का खामोश शोर… और पानी की उन गहराइयों में छिपा ‘मौत का नया चेहरा’! ठीक वैसे ही, जैसे हमास के कमांडो गाजा की अंधेरी सुरंगों और भूमध्यसागर की लहरों से इजरायल पर कहर बनकर टूटते थे, अब उसी खूनी मॉडल पर लश्कर-ए-तैयबा ने भारत पर हमला करने की साजिश रची है. उनके सरगना सैफुल्लाह ने धमकी दी है कि लश्कर की “वॉटर फोर्स” पानी के रास्ते भारत की सुरक्षा दीवार को फाड़कर घुसपैठ करेगी. यह सिर्फ एक गीदड़भभकी नहीं बल्कि खुफिया रिपोर्टों से पता चला है कि पाकिस्तान के गुप्त ट्रेनिंग कैंपों में सैकड़ों ‘मानव शार्क’ मौत का गोता लगाने की ट्रेनिंग ले रहे हैं. गणतंत्र दिवस के जश्न के बीच, समंदर की नीली गहराई में छिपा यह काला साया 26/11 के जख्मों को कुरेद रहा है और भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है!

हमास का मॉडल और लश्कर की नई रणनीति
लश्कर-ए-तैयबा ने अपनी रणनीति में जो बदलाव किया है, वह सीधे तौर पर हमास की ‘नुखबा फोर्स’ से प्रेरित नजर आता है. हमास ने जिस तरह इजरायल पर हमले के लिए समंदर के नीचे ‘अंडरवॉटर डाइवर्स’ का इस्तेमाल किया, लश्कर भी अब उसी रास्ते पर है.

1. कटीले तारों के बजाय समंदर पर फोकस: अब आतंकी सीमा पर कटीले तारों के बजाय समंदर के रास्तों को प्राथमिकता दे रहे हैं. पाकिस्तान के अलग-अलग गुप्त ठिकानों पर आतंकियों को ‘कॉम्बैट डाइविंग’ की ट्रेनिंग दी जा रही है. इन ट्रेनिंग कैंपों में एडवांस्ड स्कूबा गियर और साइलेंट प्रोपल्शन सिस्टम का इस्तेमाल हो रहा है.

2. रडार को चकमा देने की तकनीक: लश्कर की यह वॉटर फोर्स ‘अंडरवॉटर स्कूटर्स’ और ‘लो-प्रोफाइल बोट्स’ का इस्तेमाल कर रही है. ये उपकरण रडार की नजरों में नहीं आते. आतंकी पानी की सतह के नीचे घंटों रहकर चुपचाप तटीय इलाकों तक पहुंच सकते हैं.

3. मनोवैज्ञानिक युद्ध और गणतंत्र दिवस: सैफुल्लाह का बयान केवल सैन्य तैयारी नहीं बल्कि एक मनोवैज्ञानिक युद्ध भी है. 26/11 के जख्मों को याद करते हुए एजेंसियां इस बार किसी भी छोटी सूचना को नजरअंदाज नहीं कर रही हैं. तटीय राज्यों जैसे मुंबई, गुजरात और केरल में ‘हाई अलर्ट’ घोषित कर दिया गया है.

हमास की ‘अंडरवॉटर फोर्स’ और भारत के लिए सबक

प्रश्न 1: हमास अपनी ‘वॉटर फोर्स’ (नुखबा डाइवर्स) का इस्तेमाल कैसे करता है?
उत्तर: हमास की नौसैनिक शाखा (Nukhba) विशेष रूप से प्रशिक्षित गोताखोरों का उपयोग करती है. ये आतंकी ऑक्सीजन टैंकों के साथ समुद्र के नीचे मीलों तक तैरकर इजरायली तटों तक पहुंचते हैं. इनका मुख्य काम तटीय सुरक्षा चौकियों को तबाह करना और विस्फोटक प्लांट करना होता है.[

प्रश्न 2: क्या लश्कर के पास हमास जैसे आधुनिक समुद्री उपकरण मौजूद हैं?
उत्तर: हां, खुफिया इनपुट के अनुसार लश्कर को जीपीएस ट्रैकर, अंडरवॉटर स्कूटर्स और साइलेंट इंजन वाली स्पीड बोट्स मुहैया कराई गई हैं. ये उपकरण उन्हें रडार की पकड़ से बाहर रहकर भारतीय समुद्री सीमा में दाखिल होने में मदद करते हैं.

प्रश्न 3: हमास की तर्ज पर हमला करने में सबसे बड़ा खतरा क्या है?
उत्तर: सबसे बड़ा खतरा ‘सरप्राइज एलिमेंट’ है. पानी के नीचे से आने वाले हमले को तब तक पहचानना मुश्किल होता है जब तक वे किनारे के बिल्कुल करीब न आ जाएं. यह रणनीति पारंपरिक गश्त को चकमा देने के लिए बनाई गई है.

प्रश्न 4: खुफिया रिपोर्टों में इन ‘वॉटर आतंकियों’ की ट्रेनिंग को लेकर क्या खुलासे हुए हैं?
उत्तर: आतंकियों को पाकिस्तान के तटों और मंगला डैम जैसे इलाकों में ट्रेनिंग दी जा रही है. उन्हें सिखाया जा रहा है कि कैसे पानी के भीतर छिपकर घंटों गहराई में रहा जाए और सुरक्षा घेरे को काटकर फिदायीन हमले को अंजाम दिया जाए.

प्रश्न 5: भारतीय एजेंसियां इस ‘वॉटर फोर्स’ से निपटने के लिए क्या कर रही हैं?
उत्तर: भारतीय नौसेना और कोस्ट गार्ड ने ‘ऑपरेशन कोस्टल अलर्ट’ के तहत रडार और सोनार की निगरानी बढ़ा दी है. तटीय गांवों में ‘मछुआरा इंटेलिजेंस’ को सक्रिय किया गया है ताकि किसी भी संदिग्ध हलचल की तुरंत जानकारी मिल सके.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

GET YOUR LOCAL NEWS ON NEWS SPHERE 24      TO GET PUBLISH YOUR OWN NEWS   CONTACT US ON EMAIL OR WHATSAPP