Asaduddin Owaisi Vs Akhilesh Yadav | AIMIM vs SP | Muslim Vote Bank Politics-क्या BMC चुनाव में ओवैसी ने दी अखिलेश यादव को ‘वॉर्निंग’ ? क्या सपा का मस्लिम वोट बैंक को AIMIM ने छीना, समझें पूरा गणित
मुंबई: यूपी विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को महाराष्ट्र के नगर निगम चुनाव नतीजों पर गंभीरता से नजर डालने की जरूरत है. महाराष्ट्र में हुए 29 नगर निगम चुनावों ने यह साफ संकेत दे दिया है कि असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम अब केवल एक क्षेत्रीय या सीमित प्रभाव वाली पार्टी नहीं रही, बल्कि वह सीधे तौर पर सपा के परंपरागत वोट बैंक को चुनौती देती नजर आ रही है.
मुंबई के मुस्लिम वोट बैंक को सपा से ओवैसी ने छीना
मुंबई नगर निगम में भी एआईएमआईएम के 6 पार्षद जीतकर आए हैं. यह सपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि मुंबई के मुस्लिम बहुल इलाकों में अब तक समाजवादी पार्टी का दबदबा देखा जाता रहा है. इन इलाकों में एआईएमआईएम की पकड़ मजबूत होने से यह साफ है कि मुस्लिम वोट बैंक में अब बिखराव बढ़ रहा है.
मुंबई में कहां-कहां जीती AIMIM
मुंबई में एआईएमआईएम के विजयी उम्मीदवारों में वार्ड 134 से महजबीन खान, वार्ड 136 से जमीर कुरेशी, वार्ड 137 से समीर पटेल, वार्ड 138 से रोशन शेख, वार्ड 139 से शबाना शेख और वार्ड 145 से खैरुनिसा हुसैन शामिल हैं. इन जीतों ने यह साबित कर दिया है कि एआईएमआईएम अब महानगरों में भी संगठित राजनीतिक ताकत बन चुकी है.
यह पहला मौका नहीं है जब ओवैसी की पार्टी ने सपा को सीधी चुनौती दी हो. बिहार विधानसभा चुनाव में भी एआईएमआईएम ने 5 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज कर सबको चौंका दिया था. बिहार में यह प्रदर्शन आरजेडी और कांग्रेस के लिए चेतावनी बना था, और अब महाराष्ट्र में यही स्थिति सपा के लिए बनती दिख रही है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर यही ट्रेंड उत्तर प्रदेश में देखने को मिला, तो सपा को मुस्लिम वोटों के पूर्ण एकीकरण में कठिनाई आ सकती है. यूपी में जहां मुकाबला पहले से ही कड़ा है, वहां एआईएमआईएम की एंट्री सपा के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है.
क्या ये यूपी चुनाव से पहले अखिलेश के लिए चेतावनी?
महाराष्ट्र निकाय चुनावों के नतीजे साफ इशारा कर रहे हैं कि ओवैसी अब केवल बयानबाजी की राजनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जमीनी स्तर पर संगठन मजबूत कर रहे हैं. ऐसे में सवाल यही है कि क्या यूपी विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव इस सियासी संकेत को समझेंगे या फिर ओवैसी सपा के लिए एक नई और बड़ी मुसीबत बनकर उभरेंगे.