ahmedabad mahakaleshwar mandir Just like Ujjain Know Importance and history of Mahakal Mandir | उज्जैन की तरह अहमदाबाद में भी महाकाल मंदिर, हर दिन होती है भस्म आरती और शृंगार
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Ahmedabad Mahakaleshwar Temple: उज्जैन के महाकाल मंदिर के बारे में तो सभी जानते हैं लेकिन गुजरात में एक ऐसा मंदिर है, जो महाकाल मंदिर की तरह है. इस मंदिर में महाकाल मंदिर की तरह ही हर सुबह भस्म आरती और शृंगार किया जाता है. साथ ही शिवरात्रि और सावन के महीने में भक्तों की संख्या हजारों में पहुंच जाती है. आइए जानते हैं भगवान शिव के इस मंदिर के बारे में…

Ahmedabad Mahakaleshwar Temple: उज्जैन में स्थित बाबा महाकाल को समय का देवता कहा जाता है. माना जाता है कि बाबा काल यानी समय के अधीन नहीं, बल्कि काल बाबा के अनुकूल चलता है, लेकिन हर किसी को उज्जैन जाने का सौभाग्य नहीं मिलता है. जो भक्त उज्जैन जाकर बाबा महाकाल के दर्शन नहीं कर पा रहे हैं, वे अहमदाबाद में श्री महाकाल मंदिर में जाकर दर्शन कर सकते हैं. यह मंदिर उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर की प्रतिकृति के रूप में स्थापित है, जहां रोजाना भस्म आरती से लेकर बाबा का अद्भुत श्रृंगार किया जाता है. हालांकि इस मंदिर की कोई ऐतिहासिक जड़ें नही हैं लेकिन इस शिव मंदिर का आध्यात्मिक महत्व काफी है. आइए जानते हैं अहमदाबाद के इस महाकाल मंदिर के बारे में…

अहमदाबाद में स्थित आधुनिक आध्यात्मिक केंद्र – अहमदाबाद के अंबावाड़ी में स्थित महाकाल मंदिर एक आधुनिक आध्यात्मिक केंद्र है, जो प्रसिद्ध उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर की प्रतिकृति के रूप में जाना जाता है. यह सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था, शक्ति और शिव-ऊर्जा का जीवंत केंद्र है. कहते हैं कि सरदार नगर में विराजमान श्री महाकाल के दर्शन मात्र से मन की बेचैनी शांत हो जाती है. मंदिर में वही सुकून मिलता है, जो उज्जैन जाकर मिलता है. अहमदाबाद के लोग इसे गुजरात में स्थित एक छुपा हुआ शिव-धाम मानते हैं, जहां एक बार दर्शन करने से उज्जैन के दर्शन करने के बराबर ही फल मिलता है.

महाकाल स्वरूप में विराजमान भगवान शिव – मंदिर के गर्भगृह में भगवान शिव महाकाल स्वरूप में विराजमान हैं और उनके आकार से लेकर गर्भगृह का डिजाइन तक सब कुछ उज्जैन के मंदिर जैसा है. मंदिर में मां पार्वती, भैरव, हनुमान, भगवान गणेश और कार्तिकेय की प्रतिमा भी देखने को मिलती है. मंदिर के बाहरी आवरण को उज्जैन मंदिर की तरह ही बनाने की कोशिश की गई है, जिसमें शिखर की ऊंची चोटी और बनावट भी देखने में एक जैसी लगती है.
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हर मनोकामना होती है पूरी – यह मंदिर अपने शांत वातावरण और भगवान शिव के प्रति भक्ति के साथ भक्तों को मूल मंदिर का प्रामाणिक अनुभव प्रदान करता है, हालांकि इसकी अपनी कोई विशिष्ट ऐतिहासिक जड़ें नहीं हैं, फिर भी मंदिर शिव भक्तों के बीच बहुत लोकप्रिय है. यहां सावन माह और सोमवार के दिन भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है. मान्यता है कि जो भी सच्चे मन से ईश्वर से मांगता है, उसकी सभी इच्छाएं पूरी भी होती हैं.

हर सुबह होती है भस्म आरती – मंदिर में सुबह से लेकर शाम तक महाकाल मंदिर की तर्ज पर 4 आरती होती हैं और सुबह की शुरुआत भस्म आरती से होती है. हर रोज पूरी भक्ति से बाबा का अद्भुत शृंगार किया जाता है. पहली भस्म आरती सुबह 4 बजे से 6 बजे तक होती है, जबकि दूसरी नैवेद्य आरती सुबह 10 से 11 बजे के बीच होती है. संध्या आरती शाम 6 बजे और शयन आरती रात 10 बजे होती है. चारों आरती में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है. शिवरात्रि और सावन के महीने में भक्तों की संख्या हजारों में पहुंच जाती है.