अमेज़न-फ्लिपकार्ट पर गैर-कानूनी वॉकी-टॉकी बिक्री पर CCPA सख्त

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नई दिल्ली. आज के डिजिटल दौर में हम सुई से लेकर गैजेट्स तक सब कुछ ऑनलाइन मंगवाना पसंद करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी पसंदीदा शॉपिंग वेबसाइट्स पर कुछ ऐसा भी बिक रहा है जो कानूनन गलत है? हाल ही में केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया है कि अमेज़न और फ्लिपकार्ट जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स पर धड़ल्ले से गैर-कानूनी वॉकी-टॉकी बेचे जा रहे थे. यह किसी अवैध सामान को गैर-कानूनी तरीके से बेचनेभर का मामला नहीं है, बल्कि देश की सुरक्षा और कम्युनिकेशन सिस्टम से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है, जिस पर सरकार ने अब कड़ा रुख अपनाया है.

इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई, जब सीसीपीए ने खुद संज्ञान लेते हुए पाया कि कई ई-कॉमर्स कंपनियां बिना किसी आधिकारिक अनुमति या लाइसेंस के वॉकी-टॉकी (पर्सनल मोबाइल रेडियो) की लिस्टिंग कर रही हैं. जांच में सामने आया कि करीब 16,970 ऐसे उत्पाद बेचे जा रहे थे, जो तय नियमों का उल्लंघन करते हैं. इस पर कार्रवाई करते हुए सीसीपीए ने कुल 8 कंपनियों पर 44 लाख रुपये का जुर्माना ठोक दिया है. इसमें अमेज़न, फ्लिपकार्ट, मीशो और मेटा (फेसबुक मार्केटप्लेस) जैसी दिग्गज कंपनियों पर 10-10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जबकि जियोमार्ट, चिमिया, टॉक प्रो और मास्कमैन टॉयज पर 1-1 लाख रुपये का दंड लगाया गया है.

उपभोक्ताओं के अधिकारों का हनन

उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया, “इन प्लेटफॉर्म्स ने उपभोक्ताओं के अधिकारों का हनन किया है और भ्रामक विज्ञापनों के जरिए नियमों की अनदेखी की है.” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मीशो, मेटा और चिमिया जैसी कंपनियों ने अपना जुर्माना भर दिया है, जबकि कुछेक कंपनियों से भुगतान का इंतजार है. असल में भारत के कानून के अनुसार, केवल 446.0 से 446.2 मेगाहर्ट्ज फ्रीक्वेंसी वाले वॉकी-टॉकी ही बिना लाइसेंस के इस्तेमाल किए जा सकते हैं. लेकिन इन वेबसाइट्स पर जो डिवाइस बिक रहे थे, वे इस सीमा से बाहर की फ्रीक्वेंसी पर काम कर रहे थे और उनके पास जरूरी ETA प्रमाण पत्र भी नहीं था.

पल्ला नहीं झाड़ पाए प्लेटफॉर्म्स

हैरानी की बात यह है कि फ्लिपकार्ट पर 65,000 से ज्यादा ऐसे यूनिट्स बेचे गए, जिनमें फ्रीक्वेंसी का कॉलम या तो खाली था या फिर वह गलत फ्रीक्वेंसी पर थे. अमेज़न और मीशो पर भी हजारों की संख्या में ऐसे ही संदिग्ध डिवाइस बेचे गए. जब इन कंपनियों से जवाब मांगा गया, तो कई प्लेटफॉर्म्स ने यह कहकर अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश की कि वे केवल एक बिचौलिये (Intermediary) हैं और सामान बेचने वाले तीसरे पक्ष के विक्रेता हैं. हालांकि, सीसीपीए ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया. प्राधिकरण ने साफ कहा कि “बिचौलियों को दी जाने वाली सुरक्षा शर्तों पर आधारित होती है और वे उन उत्पादों की जिम्मेदारी से नहीं बच सकते जिन्हें वे बढ़ावा दे रहे हैं.”

क्यों सीरियस है ये मामला

यह मामला इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि अनधिकृत रेडियो संचार उपकरण राष्ट्रीय संचार नेटवर्क में बाधा डाल सकते हैं. ये डिवाइस पुलिस, आपदा प्रबंधन और आपातकालीन सेवाओं के वायरलेस सिग्नल में हस्तक्षेप कर सकते हैं, जो सार्वजनिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है.

भविष्य में ऐसी गलतियों को रोकने के लिए सरकार ने रेडियो उपकरण बिक्री नियमावली 2025 भी जारी की है. अब ई-कॉमर्स कंपनियों को खुद का ऑडिट करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी वेबसाइट पर बिकने वाला हर वॉकी-टॉकी सरकारी नियमों और फ्रीक्वेंसी मानकों पर खरा उतरता हो.

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