दिलीप कुमार की वो खूबसूरत हीरोइन, पहली फिल्म का दुनियाभर में बजा था डंका, जीजा को ही बना लिया था अपना पति
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भारतीय सिनेमा के सुनहरे दौर की एक ऐसी एक्ट्रेस जिन्होंने अपनी पहली ही फिल्म से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वो कामयाबी हासिल की जो आज भी कई सितारों के लिए एक सपना है. अपनी सादगी और संजीदा अभिनय के लिए मशहूर इस हसीना ने पर्दे पर दिलीप कुमार और राज कपूर जैसे दिग्गजों के साथ काम किया. लेकिन इनकी असल जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से भी ज्यादा उतार-चढ़ाव भरी रही. बहन के निधन के बाद उनके बच्चों की परवरिश की खातिर एक्ट्रेस ने एक ऐसा फैसला लिया, जिसने सबको चौंका दिया. उन्होंने अपने ही जीजा से शादी कर ली.

नई दिल्ली. दिग्गज और वर्सेटाइल एक्ट्रेस कामिनी कौशल को साल 1946 की फिल्म नीचा नगर में रूपा का रोल निभाने के लिए आज भी याद किया जाता है. कई यादगार फिल्में देने वाली कामिनी का एक्टिंग में आना महज एक इत्तेफाक था, लेकिन उनकी मेहनत और सादगी ने उन्हें हमेशा के लिए अमर कर दिया. उमा कश्यप के नाम से जन्मीं कामिनी, लाहौर के जाने-माने वनस्पति वैज्ञानिक प्रोफेसर शिव राम कश्यप की सबसे छोटी बेटी थीं.

एक पढ़े-लिखे और प्रोग्रेसिव परिवार में पली-बढ़ीं कामिनी ने कभी एक्ट्रेस बनने का सपना नहीं देखा था. उनके फिल्मी सफर की शुरुआत बचपन के एक मजाकिया वाकये या कहें ‘कॉमिक ट्रेजडी’ से हुई, जिसने आगे चलकर उन्हें ‘नीचा नगर’ जैसी कालजयी फिल्म के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई.

उनके इंटरव्यू से निकली यह कहानी बताती है कि कैसे परिवार की खुली सोच और संयोग ने उन्हें इंडस्ट्री का हिस्सा बनाया, जबकि अभिनय उनके ख्याल में भी नहीं था. कामिनी कौशल ने एक इंटरव्यू में बताया कि उनका परिवार बेहद खुले दिमाग वाला था. पिता शिव राम कश्यप ने घर में साफ नियम बनाया था- जिसे जो काम करना है, वह करे किसी नई या चुनौतीपूर्ण चीज के लिए ‘ना’ नहीं कहना है.
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कामिनी ने कभी अभिनय को करियर नहीं माना, यह उनके लिए संयोग, परिवार और मजाक का नतीजा था. उन्होंने कहा, ‘मेरे तो कभी ख्याल में भी नहीं आया था कि मैं फिल्म में काम करूंगी.’ एक इंटरव्यू में कामिनी ने बताया कि उनकी एक्टिंग जर्नी एक मजाक से शुरू हुई. जब वह महज 7 साल की थीं, तब उनके भाई ने एक छोटी फिल्म बनाई, जिसका नाम था ‘द ट्रेजडी’.

यह एक कॉमिक ट्रेजडी थी. भाई ने कहानी, स्क्रिप्ट और निर्देशन सब खुद किया और हंसी-मजाक में छोटी कामिनी को इसमें मुख्य भूमिका दे दी. कामिनी ने कहा, ‘यह वास्तव में एक मजाक की तरह था. भाई ने मुझे फिल्म में डाल दिया और मैंने खूब अच्छा काम किया.’ इसी अनजाने अभिनय अनुभव से उनका सिनेमा से पहला कनेक्शन बना. फिल्म निर्माता चेतन आनंद उनके भाई के खास दोस्त थे. उस समय नए फिल्म बनाने के लिए विचार कर रहे थे. चेतन जब लाहौर आए, तो उन्होंने कामिनी से पूछा, “मैं एक फिल्म बना रहा हूं, तुम काम करोगी?” कामिनी ने तुरंत मना कर दिया और कहा, ‘फिल्मों में काम करना अच्छा नहीं होता.’

लेकिन चेतन ने उनके भाई से बात की. कामिनी को यकीन था कि भाई मना कर देंगे, लेकिन भाई ने तो हां कर दी! उन्होंने कहा, ‘मैंने तो पक्का कर लिया था कि भाई ना कर देंगे, लेकिन उन्होंने हर तरीके से हमारी जिंदगी को शानदार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी, पिताजी के नियम को वह भी फॉलो करते थे, कभी ना मत कहो.’

इस तरह कामिनी का फिल्मी सफर शुरू हुआ. उनकी पहली प्रमुख फिल्म ‘नीचा नगर’ थी, जिसका निर्देशन चेतन आनंद ने किया. मैक्सिम गोर्की की कहानी पर आधारित यह फिल्म भारत की पहली फिल्म बनी जो कान फिल्म फेस्टिवल में ग्रैंड प्रिक्स (पाल्मे डी’ओर) जीती. कामिनी ने कहा, ‘नीचा नगर मेरी पहली फिल्म नहीं थी, लेकिन यह मेरे करियर की असली शुरुआत थी.’ फिल्म में वह मजबूत भूमिका में नजर आईं, जिसने उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई.

इसके बाद कामिनी ने कई यादगार फिल्में कीं. साल 1954 में आई ‘बिराज बहू’ के लिए उन्हें फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला. वह दिलीप कुमार, राज कपूर और देव आनंद जैसे सितारों के साथ लीड रोल में काम कीं. बाद में कैरेक्टर रोल्स में भी चमकीं और ‘चेन्नई एक्सप्रेस’, ‘कबीर सिंह’, ‘लाल सिंह चड्ढा’ जैसी फिल्मों का हिस्सा बनीं.

पर्सनल लाइफ में भी कामिनी ने मजबूती दिखाई. 1947 में बड़ी बहन उषा की कार दुर्घटना में मौत हो गई, जो दो बेटियां छोड़ गईं. परिवार की इच्छा पर 1948 में कामिनी ने बहनोई बी.एस. सूद (बॉम्बे पोर्ट ट्रस्ट के चीफ इंजीनियर) से शादी की. यह प्यार से ज्यादा जिम्मेदारी की शादी थी. उन्होंने बहन की दो बेटियों कुमकुम सोमानी और कविता साहनी के साथ अपने तीन बेटों राहुल, विदुर और श्रवण को पाला. लेकिन उनकी सादगी, गहराई और मजबूत किरदारों ने उन्हें हिंदी सिनेमा की अमर शख्सियत बना दिया.