Karnataka Temple Fish Shishila Village Kapila River Fish । कर्नाटक शिशिला गांव में मछलियों की पूजा
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Karnataka Temple Fish: कर्नाटक के शिशिला गांव में स्थित मंदिर की मछलियों की पूजा की जाती है. इन मछलियों को भगवान का रूप माना जाता है और रोज खाना खिलाया जाता है. कपिला नदी में रहने वाली ये महसीर मछलियां सुरक्षित हैं, क्योंकि उन्हें नुकसान पहुंचाना पाप माना जाता है. कुछ जगहों पर मछलियों को नथ पहनाकर नदी में छोड़ा जाता है. यह परंपरा आस्था और पर्यावरण संरक्षण का अनोखा उदाहरण है.

Karnataka Temple Fish: भारत में आस्था और परंपराओं की कोई कमी नहीं है. हर राज्य में ऐसे अनोखे रीति रिवाज देखने को मिलते हैं, जो लोगों को हैरान भी करते हैं और सोचने पर मजबूर भी. कर्नाटक में भी एक ऐसी ही खास परंपरा है, जहां मंदिर में मछलियों की पूजा होती है. इन मछलियों को साधारण जीव नहीं, बल्कि भगवान का रूप माना जाता है. यही नहीं, कुछ जगहों पर इन मछलियों को नथ पहनाकर नदी में छोड़ा जाता है. यह परंपरा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि प्रकृति और जीव संरक्षण से भी गहराई से जुडी हुई है. आज के समय में जब पर्यावरण संरक्षण की बातें हर तरफ हो रही हैं, तब कर्नाटक के इस गांव की परंपरा लोगों के लिए एक मिसाल बन चुकी है.

कर्नाटक के शिशिला गांव की अनोखी कहानी: कर्नाटक के दक्षिण कन्नड जिले में एक छोटा सा गांव है शिशिला. इसी गांव से होकर बहती है कपिला नदी. इस नदी में पाई जाने वाली बड़ी महसीर मछलियों को स्थानीय लोग भगवान की मछली मानते हैं. यह मछलियां नदी के किनारे बने मंदिर की सीढियों के पास ही इकट्ठा होती हैं. यहां इन मछलियों को रोज खाना खिलाया जाता है और उनकी देखभाल की जाती है.

यह स्थान किसी जमाने में ही नहीं, बल्कि सदियों पहले से एक प्राकृतिक अभयारण्य की तरह रहा है. गांव के लोग मानते हैं कि इन मछलियों को नुकसान पहुंचाने से अनहोनी हो सकती है. इसी डर और श्रद्धा के कारण आज तक इन मछलियों को कोई हाथ नहीं लगाता.
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मंदिर और भगवान की मछलियां: शिशिला गांव में स्थित शिशिलेश्वर मंदिर इस परंपरा का केंद्र है. यहां भगवान शिव के शिशिलेश्वर रूप की पूजा होती है. भक्तों का मानना है कि कपिला नदी में रहने वाली ये मछलियां भगवान शिव की कृपा का प्रतीक हैं. इसलिए इन्हें देव मछली कहा जाता है. मंदिर में आने वाले श्रद्धालु पहले भगवान के दर्शन करते हैं और फिर नदी में मछलियों को खाना खिलाते हैं. यह एक दैनिक अनुष्ठान की तरह माना जाता है. मंदिर और गांव के लोग मिलकर मछलियों के लिए भोजन की व्यवस्था करते हैं.

नथ पहनाकर मछलियों को छोड़ने की परंपरा: कर्नाटक के कुछ इलाकों में एक और अनोखी मान्यता देखने को मिलती है. यहां मछलियों को नथ पहनाकर नदी में छोड़ दिया जाता है. माना जाता है कि ऐसा करने से मछली को भगवान का आशीर्वाद मिलता है और वह सुरक्षित रहती है. यह परंपरा दिखाती है कि लोग मछलियों को केवल जीव नहीं, बल्कि श्रद्धा का केंद्र मानते हैं. इस तरह की मान्यताएं यह भी बताती हैं कि भारतीय संस्कृति में हर जीव का अपना महत्व है. इंसान, पशु, पक्षी और जल जीव, सभी को प्रकृति का हिस्सा माना गया है.

क्या सच में मछलियां बीमारियां ठीक करती हैं: स्थानीय लोगों का यह भी विश्वास है कि कपिला नदी की ये मछलियां त्वचा से जुडी बीमारियों में राहत देती हैं. कई लोग मानते हैं कि इन मछलियों के पास जाकर नदी में स्नान करने से त्वचा रोग ठीक हो जाते हैं. इसी कारण दूर दूर से लोग यहां आते हैं. हालांकि इसे वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं किया गया है, लेकिन आस्था और विश्वास के कारण यह मान्यता आज भी बनी हुई है. श्रद्धालु इसे भगवान की कृपा मानते हैं.

आस्था और पर्यावरण संरक्षण का अनोखा मेल: शिशिला गांव की यह परंपरा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है. यह पर्यावरण संरक्षण का भी एक बेहतरीन उदाहरण है. यहां मछलियों को नुकसान पहुंचाना पाप माना जाता है. इसी कारण नदी का यह हिस्सा आज भी सुरक्षित है और मछलियों की संख्या बनी हुई है. जब आज के समय में लोग नियम कानून बनाकर जीव संरक्षण की कोशिश कर रहे हैं, तब शिशिला गांव की यह परंपरा दिखाती है कि आस्था भी संरक्षण का मजबूत जरिया बन सकती है.

यात्रियों के लिए खास अनुभव: यह स्थान केवल भक्तों के लिए ही नहीं, बल्कि यात्रियों के लिए भी खास है. यहां आकर लोग देखते हैं कि कैसे धर्म और प्रकृति एक दूसरे से जुड़े हुए हैं. नदी की सीढियों के पास तैरती बड़ी मछलियां और उन्हें खाना खिलाते लोग एक अलग ही अनुभव देते हैं. जो लोग शांति और सादगी भरी जगहों की तलाश में रहते हैं, उनके लिए यह जगह बेहद खास मानी जाती है.

क्यों जरूरी है ऐसी परंपराओं को समझना: आज के दौर में जब परंपराओं को लेकर कई सवाल उठते हैं, तब शिशिला गांव की यह कहानी हमें सिखाती है कि हर परंपरा केवल अंधविश्वास नहीं होती. कई परंपराएं समाज और प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने में मदद करती हैं. कर्नाटक की यह मछली पूजा हमें यह भी सिखाती है कि अगर इंसान चाहे, तो आस्था के जरिए भी पर्यावरण की रक्षा की जा सकती है.