कौन है यह जांबाज अफसर, जो दैत्य बनकर गैंगस्टरों को निगल रहा है? जानिए इस IPS की कहानी | ips pramod singh kushwaha special cell | delhi police encounter specialist | gallantry medal winners record | gangsters killed list | major crackdown | underworld news

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नई दिल्ली. गणतंत्र दिवस 2026 से पहले दिल्ली पुलिस का ‘ऑपरेशन गैंग-बस्ट’ चर्चा में है. ‘ऑपरेशन गैंग-बस्ट’ से ज्यादा चर्चा उस आईपीएस अधिकारी की हो रही है, जिसने इस ऑपरेशन को 48 घंटे तक लीड किया. राजधानी दिल्ली में संगठित अपराध की कमर तोड़ने वाले इस आईपीएस अधिकारी के कारनामे बड़े-बड़े हैं. मंगलवार को दिल्ली पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर 854 गैंगस्टर और बदमाशों को दबोचने की जानकारी दी तो सबको हैरानी हुई कि आखिर 48 घंटे में इतने गैंगस्टर और बदमाश कैसे दबोचे गए? लेकिन, जब इस महाऑपरेशन को लीड करने वाला आईपीएस 8 बार गैलेंट्री मेडल जीतने वाला आईपीएस हो तो सबको यकीन हो गया. इस आईपीएस अधिकारी से थर-थर कांपते हैं लॉरेंस बिश्नोई, नीरज बवाना और गोगी गैंग के गैंगस्टर और आतंकी. यह आईपीएस अधिकारी कोई और नहीं स्पेशल सेल के एडिशनल कमिश्नर प्रमोद सिंह कुशवाहा हैं. आइए जानते हैं कौन हैं प्रमोद सिंह कुशवाहा और 9-10 सालों से दिल्ली पुलिस के खूंखार स्पेशल सेल में क्यों तैनात हैं? क्यों इस आईपीएस के बारे में कहा जाता है ‘कम शोर, ज्यादा काम’ करने वाला अधिकारी?

दिल्ली पुलिस के इतिहास में जब भी स्पेशल सेल की वीरता, रणनीतिक कौशल और संगठित अपराध के खात्मे की बात होगी, आईपीएस प्रमोद सिंह कुशवाहा का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा. वर्तमान में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल में एडिशनल कमिश्नर (Addl. CP) के पद पर तैनात प्रमोद कुशवाहा केवल एक अधिकारी नहीं, बल्कि अपराधियों और आतंकवादियों के लिए एक ऐसा खौफ हैं, जिसका नाम सुनते ही अंडरवर्ल्ड में हलचल मच जाती है. ‘ऑपरेशन गैंग-बस्ट 2026’ की भारी सफलता के पीछे भी इसी अधिकारी का तेज दिमाग और अटूट साहस काम कर रहा था.

कौन हैं प्रमोद कुशवाहा और क्या है उनकी पहचान?

प्रमोद सिंह कुशवाहा मूल रूप से दिल्ली पुलिस के उस कैडर से आते हैं, जिन्होंने जमीन पर रहकर अपराध की नब्ज को पहचाना है. वे एक ऐसे अधिकारी हैं जिन्हें उनके शांत स्वभाव लेकिन सटीक और घातक स्ट्राइक के लिए जाना जाता है. प्रमोद कुशवाहा की सबसे बड़ी पहचान उनके सीने पर चमकने वाले ‘पुलिस मेडल फॉर गैलेंट्री’ हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि उन्हें अब तक 8 बार वीरता पदक से नवाजा जा चुका है, जो भारतीय पुलिस सेवा के इतिहास में एक दुर्लभ कीर्तिमान है. यह पदक किसी भी अधिकारी को तब मिलता है जब वह अपनी जान की परवाह किए बिना दुश्मन या अपराधियों के सामने अदम्य साहस का परिचय देता है.

प्रमोद कुशवाहा स्पेशल सेल के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले अधिकारी में से एक हैं.

स्पेशल सेल में एक दशक का सफर

प्रमोद कुशवाहा दिल्ली पुलिस की सबसे प्रतिष्ठित यूनिट ‘स्पेशल सेल’ के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले अधिकारी में से एक हैं. वे करीब 9 से 10 वर्षों से स्पेशल सेल के साथ जुड़े हुए हैं. उन्होंने लंबे समय तक बतौर डीसीपी (DCP) स्पेशल सेल के महत्वपूर्ण लोधी कॉलोनी और साउथ-वेस्टर्न रेंज को संभाला. उनकी कार्यक्षमता को देखते हुए उनको परमोशन कर एडिशनल कमिश्नर बनाया गया, लेकिन उनकी विशेषज्ञता के कारण उन्हें स्पेशल सेल में ही बनाए रखा गया. वे इस यूनिट की रीढ़ की हड्डी माने जाते हैं.

कितने गैंगस्टरों का किया सफाया?

अगर बात ठिकाने लगाने यानी एनकाउंटर और गिरफ्तारियों की हो तो प्रमोद कुशवाहा का रिकॉर्ड बेहद प्रभावशाली है. उनके नेतृत्व और सुपरविजन में 1000 से ज्यादा खूंखार अपराधी, गैंगस्टर या तो जेल की सलाखों के पीछे पहुंचे हैं या पुलिस मुठभेड़ में ढेर हुए हैं. हालांकि, एक पुलिस अधिकारी के रूप में उनका मुख्य जोर अपराधी को कानून के कठघरे में खड़ा करने पर होता है, लेकिन जब भी बदमाशों ने गोली चलाई, कुशवाहा की टीम ने करारा जवाब दिया.

गैंगस्टरों में खौफ का नाम प्रमोद कुशवाहा

कुशवाहा ने नीरज बवाना, जितेंद्र गोगी, लॉरेंस बिश्नोई गैंग, काला जत्थेदी और हाशिम बाबा जैसे बड़े सिंडिकेट्स के सैकड़ों शूटर्स और गुर्गों को सलाखों के पीछे भेजा है. प्रमोद कुशवाहा ने दिल्ली में ‘गैंगस्टर कल्चर’ को खत्म करने के लिए मकोका (MCOCA) जैसे कड़े कानूनों का बखूबी इस्तेमाल किया है. उनके नेतृत्व में हुई छापेमारी और ऑपरेशन्स में 100 से ज्यादा खूंखार बदमाशों को सीधे तौर पर ‘न्यूट्रलाइज’ यानी मुठभेड़ में ढेर किया गया है.

आतंकवाद के खिलाफ ‘ढाल’

प्रमोद कुशवाहा का योगदान केवल गैंगस्टरों तक सीमित नहीं है. वे भारत के सबसे बड़े ‘एंटी-टेरर’ एक्सपर्ट्स में से एक माने जाते हैं. उन्होंने इंडियन मुजाहिदीन (IM) और आईएसआईएस (ISIS) के मॉड्यूल का पर्दाफाश करने में अहम भूमिका निभाई है. 26/11 मुंबई हमले के साजिशकर्ता अबू जुंदाल और कुख्यात आतंकी अब्दुल करीम टुंडा की गिरफ्तारी के पीछे भी उनकी टीम की मेहनत रही है. दिल्ली को दहलाने की दर्जनों आतंकी साजिशों को उन्होंने वक्त रहते नाकाम किया है.

प्रमोद कुशवाहा की कार्यशैली: कम शोर, ज्यादा काम

प्रमोद कुशवाहा उन अधिकारियों में से नहीं हैं जो मीडिया की सुर्खियों में रहना पसंद करते हैं. वे एक लो-प्रोफाइल ऑफिसर हैं, जो पर्दे के पीछे रहकर बड़े ऑपरेशन्स की प्लानिंग करते हैं. ‘ऑपरेशन गैंग-बस्ट 2026’ इसका ताजा उदाहरण है, जहां उन्होंने 6 राज्यों में एक साथ रेड डलवाकर गैंगस्टरों के पूरे इकोसिस्टम को हिला दिया. उनकी टीम के सदस्य बताते हैं कि वे खुद रात-रात भर जागकर ऑपरेशन्स की मॉनिटरिंग करते हैं और अपने जवानों का हौसला बढ़ाते हैं. उनकी उपलब्धियों की फेहरिस्त में केवल वीरता पदक ही नहीं, बल्कि ‘प्रेसिडेंट पुलिस मेडल’ भी शामिल है.

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