Gorakhpur News : खिचड़ी मेले में आस्था के साथ स्वाद का संगम! साल भर रहता है लोगों को खाजा-घेवर का इंतजार

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Gorakhpur News : गोरखपुर के गोरखनाथ मठ में लगने वाला खिचड़ी मेला सिर्फ आस्था का नहीं, बल्कि स्वाद की परंपरा का भी उत्सव है. मकर संक्रांति पर यहां बनने वाले खास खाजा और घेवर का इंतजार लोग साल भर करते हैं, जिनके बिना यह मेला अधूरा सा लगता है.

गोरखपुर : गोरखपुर का गोरखनाथ मठ और वहां लगने वाला खिचड़ी मेला सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक और स्वाद परंपरा का बड़ा उत्सव है. साल में एक बार मकर संक्रांति के मौके पर लगने वाला यह मेला हर बार लोगों को नया अनुभव देता है. कभी दुकानों की विविधता चौंकाती है तो कभी लोगों की भीड़ और आस्था का सैलाब, लेकिन इन सबके बीच अगर किसी चीज का सबसे ज्यादा इंतजार रहता है, तो वह हैं इस मेले में बनने वाली दो खास मिठाइयां यानि खाजा और घेवर का.

खाजा और घेवर वैसे तो देश के कई हिस्सों में आसानी से मिल जाते हैं, लेकिन गोरखपुर के खिचड़ी मेले में बनने वाला इनका स्वाद बिल्कुल अलग होता है, यही वजह है कि लोग पूरे साल सिर्फ इसी मौके का इंतजार करते हैं. जैसे ही मेला शुरू होता है, वैसे ही इन मिठाइयों की दुकानों पर सबसे ज्यादा भीड़ देखने को मिलती है.

क्या है खोवा वाला खाजा की खासियत?
खाजा की बात करें तो यह मिठाई यहां कई वैरायटी में तैयार की जाती है. कहीं देसी घी में तला हुआ करारा खाजा मिलता है तो कहीं बिना देसी घी वाला हल्का विकल्प भी मौजूद रहता है. मेले में सबसे ज्यादा डिमांड नमकीन खाजा और खोवा वाला खाजा की रहती है. बाहर से कुरकुरा और अंदर से परतदार खाजा जैसे ही मुंह में जाता है, उसका स्वाद लोगों को बार-बार खाने पर मजबूर कर देता है. कीमत की बात करें तो खाजा 100 से शुरू होकर 200, 300 और 400 रुपए प्रति पिस तक बिकता है, लेकिन स्वाद के आगे दाम कोई मायने नहीं रखता.

मेला का लोग बेसब्री से करते इंतजार
वहीं घेवर का भी इस मेले में अपना अलग ही जलवा रहता है. मोटा, कुरकुरा और सही मात्रा में चाशनी में डूबा हुआ घेवर यहां की खास पहचान बन चुका है. कई दुकानदार पारंपरिक तरीके से घेवर तैयार करते हैं, जिससे इसका स्वाद और भी खास हो जाता है. मेले में आने वाले लोग अक्सर कहते नजर आते हैं कि ऐसा घेवर पूरे साल कहीं और नहीं मिलता.

मेला लगता है अधूरा
गोरखनाथ मठ का खिचड़ी मेला सिर्फ खरीदारी या घूमने का मौका नहीं, बल्कि बचपन की यादों, पारिवारिक मेल-मिलाप और स्वाद से जुड़ी भावनाओं का संगम है. खाजा और घेवर इस मेले की वो पहचान हैं, जिनके बिना खिचड़ी मेला अधूरा सा लगता है. शायद यही वजह है कि, गोरखपुर के लोग साल भर इस मेले और इन मिठाइयों का बेसब्री से इंतजार करते हैं.

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mritunjay baghel

मीडिया क्षेत्र में पांच वर्ष से अधिक समय से सक्रिय हूं और वर्तमान में News-18 हिंदी से जुड़ा हूं. मैने पत्रकारिता की शुरुआत 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव से की. इसके बाद उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड चुनाव में ग्राउंड…और पढ़ें

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