Explainer: क्यों लगातार दूसरी बार फेल हुआ पीएसएलवी, इसरो को इससे कितना झटका लगेगा? कितने करोड़ का नुकसान

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12 जनवरी 2026 को श्रीहरिकोटा से सुबह 10:17 बजे पीएसएलवी-सी62 मिशन का प्रक्षेपण किया गया. इसके 50 मिनट बाद इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन ने पुष्टि की कि रॉकेट के तीसरे चरण में कुछ गड़बड़ी पाई गई है. इसका मतलब था कि ये मिशन फेल हो गया. उन्होंने आगे कहा कि इसरो इस चरण के प्रदर्शन का और विश्लेषण करेगा.

इससे पहले 18 मई 2025 को पीएसएलवी-C61 मिशन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानि इसरो के लिए असफल प्रक्षेपण साबित हुआ. ये रॉकेट इसरो का सबसे ‘विश्वसनीय’ रॉकेट माना जाता रहा है, क्योंकि ISRO ने इसके साथ कई सफल प्रक्षेपण किए थे. ये सफल भी रहा था. लेकिन अब इसरो को लगातार दो पीएसएलवी मिशनों की नाकामी का सामना करना पड़ रहा है.

अब हम तमाम सवाल और जवाब के जरिए जानेंगे कि पीएसएलवी क्या है. कैसे काम करता है. कैसे किसी सैटेलाइट को इसे सूर्य से दूर की कक्षा में ले जाकर स्थापित करता था. कहां कसर रह गई. इससे इसरो पर क्या असर पडे़गा.

सवाल – PSLV-C62 मिशन को चार चरणों में किस तरह काम करना था और कहां गड़बड़ हो गई?

PSLV-C62 मिशन में PSLV-XL रॉकेट का चार-चरणीय डिज़ाइन था, जो वैकल्पिक तरल और ठोस ईंधन चरणों से युक्त होता है. पहला और तीसरा चरण ठोस ईंधन आधारित था. दूसरा और चौथा चरण तरल ईंधन आधारित था.
1. पहला चरण (PS1) – इस चरण का काम S139 ठोस बूस्टर कोर के साथ 6 स्ट्रैप-ऑन बूस्टरों को करना था. ये चरण करीब 2 मिनट चलता. ये रॉकेट को 50-60 किमी ऊंचाई तक ले गया. शुरुआती स्पीड भी दी.
2. दूसरा चरण (PS2) – ये विकास तरल इंजन (UT2000) से संचालित था. इसमें UDMH और N2O4 ईंधन को काम करना था. ये चरण 2-3 मिनट चलकर रॉकेट को 220-250 किमी की ऊंचाई पर ले गया. तब तक रॉकेट की स्पीड 14,000 किमी प्रति घंटा हो चुकी थी.
3. तीसरा चरण (PS3) – इसमें HTPB-आधारित ठोस प्रणोदक मोटर को उसे 75 किमी ऊचाई तक ले जाकर उच्च एक्सीलरेशन यानि 26,000-28,000 किमी/घंटा की स्पीड देनी थी. लेकिन ऐसा नहीं हो सका. C62 में चैंबर दबाव गिरावट आ गई. लिहाजा ये रॉकेट और ऊंचाई पर जाने से भटक गया. अपनी निर्धारित कक्षा में नहीं पहुंच सका. जिससे इसरो ने मिशन को रद्द कर दिया. रॉकेट, ईओएस-09 उपग्रह सहित वापस गिर गया.
4. चौथा चरण (PS4) – अगर सब सही रहता तो इसे सभी उपग्रहों को अंतिम सूर्य-समकालिक कक्षा (524 x 97 किमी) में स्थापित करने का काम करना था, जो नहीं हो सका.

सवाल -पीएसएलवी C62 मिशन किस उपग्रह को कहां स्थापित करने वाला था?

– PSLV-C62 मिशन मुख्य रूप से DRDO द्वारा विकसित ‘अन्वेषा’ नामक हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग उपग्रह को करीब 600 किलोमीटर ऊंचाई वाली सूर्य-समकालिक ध्रुवीय कक्षा में स्थापित करने के लिए था. यह गोपनीय निगरानी उपग्रह रक्षा और खुफिया उद्देश्यों के लिए डिज़ाइन किया गया था.
मिशन में अन्वेषा के अलावा 15 दूसरी सैटेलाइट्स भी शामिल थीं, जिनमें थाईलैंड और ब्रिटेन की सैटेलाइट्स थीं. इन्हें सूर्य-समकालिक कक्षा में ही तैनात करने की योजना थी.

सवाल – इसकी विफलता की मुख्य वजह क्या बताई जा रही है?

– समस्या की वजह पीएस3 सॉलिड मोटर सिस्टम को बताया जा रहा है. ऐसा लग रहा है कि ये दोष तीसरे चरण के नोजल या केसिंग सिस्टम में संरचनात्मक या भौतिक खराबी का लग रहा है, जिसके कारण दबाव में कमी आई. इससे इंजन की शक्ति प्रभावी रूप से अवरुद्ध हो गई.

सवाल – पृथ्वी के आरबिट में सैटेलाइट लांच और सूर्य जैसी कक्षा में लांच में क्या अंतर है?

– पृथ्वी की कक्षा में उपग्रह लॉन्च और सूर्य जैसी कक्षा (Heliocentric Orbit) में लॉन्च में मुख्य अंतर ऊंचाई, वेग आवश्यकताओं, प्रक्षेपण ऊर्जा और उद्देश्य में है. पृथ्वी कक्षा जैसी निचली कक्षाओं यानि 200 से 800 किमी के लिए PSLV जैसे रॉकेट पर्याप्त होते हैं, जबकि सूर्य कक्षा के लिए GSLV Mk3 या भारी लॉन्चरकी जरूरत पड़ती है.

सवाल – क्या इससे इसरो को कामर्शियल झटका भी लगेगा?

– बिल्कुल. इसरो न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) के माध्यम से पीएसएलवी को एक व्यावसायिक उत्पाद के रूप में बढ़ावा दे रहा है. पीएस3 एक ठोस ईंधन इंजन है. इसमें खराबी नहीं आनी चाहिए. अगर इसरो इसकी लापरवाही या निर्माण दोष को मानता है या निरीक्षण में चूक की बात स्वीकार करते तो उसे कामर्शियल तौर पर झटका लगेगा. ये पीएसएलवी के कामर्शियल बीमा प्रीमियम और प्रतिष्ठा के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है. फिर बाजार में इसरो की क्षमताओं और इमेज को बड़ा डेंट लगेगा.

सवाल – ये विफलता और कौन सा सवाल उठाती है?

– ये सॉलिड मोटर में अचानक दबाव में गिरावट से दरार या नोजल फटने का संकेत देती है. यदि नोजल फट जाता है, तो ऐसे में सामग्रियों की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल उठता है. कुल मिलाकर ये ऐसी चूक है जो इसरो को झटका देने वाली है, इससे अंतरिक्ष और अंतरिक्ष उड़ान संबंधी प्रयासों के निजीकरण के भारत के शुरुआती प्रयासों को नुकसान पहुंच सकता है.

सवाल – क्या इस मिशन में पीएसएलवी के अलग अलग चरणों के निर्माण के लिए निजी कंपनियों को भी जोड़ा गया था?

– PSLV-C62 मिशन में PSLV-XL रॉकेट के चरण निर्माण के लिए निजी कंपनियों को सीमित भूमिका दी गई थी. ISRO ने सामान्य तौर पर अपने केंद्रों से चरण विकसित किए, लेकिन सहायक उपकरणों जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, स्ट्रैप-ऑन बूस्टर के कुछ हिस्से में भारतीय निजी क्षेत्र की कंपनियों को शामिल किया.
गोदरेज एयरोस्पेस औऱ एमटीएआर टैक्नॉलॉजीज जैसी कंपनियों ने पहले PSLV चरणों के लिए जटिल मशीनिंग पार्ट्स नोज़ल, थ्रस्ट वेक्टर कंट्रोल आपूर्ति किए. मुख्य रॉकेट चरण ISRO के थे.

सवाल – क्या पीएसएलवी -सी61 की विफलता की कोई रिपोर्ट सामने आई?

– PSLV-C61 मिशन की विफलता पर इसरो ने विश्लेषण समिति गठित की लेकिन जनवरी 2026 तक इसकी आखिरी विस्तृत रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई. शुरुआती रिपोर्ट में तीसरे चरण (PS3) के दौरान चैंबर दबाव में अचानक गिरावट को मुख्य कारण बताया गया.

सवाल – इससे इसरो को कितना नुकसान होगा, क्या उसे सैटेलाइट्स के नुकसान का भुगतान ग्राहकों को करना होगा या बीमा कंपनियां इसे कवर करेंगी?

– PSLV-C61 और C62 मिशनों की असफलता से ISRO को 300-400 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय नुकसान होने का अनुमान है. क्योंकि उसे EOS-09 और अन्वेषा जैसे स्वदेशी उपग्रहों के निर्माण लागत को देना होगा. साथ में इस रॉकेट से जो दूसरे विदेशी सैटेलाइट जाने वाले थे, उनके भी नुकसान की भरपाई करनी होगी. अभी तक इसरो का रिकॉर्ड 90 फीसदी सफलता का रहा है लेकिन ये नुकसान इस रिकॉर्ड को धक्का देगा, लेकिन लगता है कि बाजार में अभी उसकी पकड़ बनी रहेगी, क्योंकि ऐसा सभी अंतरिक्ष कंपनियों के साथ होता आया है.
विदेशी सैटेलाइट्स का नुकसान बीमा कंपनियां कवर करती हैं, जिन्होंने लांच इंश्योरेंस किया होता है. अब इसरो विदेशी ग्राहकों को अगली बार फ्री या रियायती लांच का ऑफर दे सकता है.

सवाल – किस तरह से बीमा कंपनियां पीएसएलवी के मिशन को कवर करती हैं?

– बीमा कंपनियां PSLV मिशनों को लेयरड इंश्योरेंस के माध्यम से कवर करती हैं, जिसमें प्री-लॉन्च, लॉन्च और इन-ऑर्बिट चरण शामिल होते हैं. मुख्य रूप से लॉन्च इंश्योरेंस उच्च-जोखिम वाली अवधि यानि रॉकेट छोड़े जाने से लेकर उपग्रह की कक्षा में तैनाती तक को कवर करता, जिसमें इंजन फेलियर, ट्रैजेक्टरी त्रुटि या विस्फोट शामिल हैं.

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