17 की उम्र में हुई शादी, 26 में विधवा हुई 2 बच्चों की मां, ट्यूशन पढ़ा चलाया घर, फिर पलटी किस्मत बनी बड़ी हीरोइन

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हिंदी और मराठी सिनेमा के शुरुआती दौर में महिलाओं के लिए फिल्मों में काम करना आसान नहीं था. उस समय ज्यादातर कलाकार किसी एक स्टूडियो या प्रोडक्शन हाउस के साथ लंबे कॉन्ट्रैक्ट में बंधे रहते थे. ऐसे में किसी भी कलाकार के लिए स्वतंत्र रूप से कई कंपनियों के लिए काम करना मुश्किल और जोखिम भरा माना जाता था.

Durga Khote Birth Anniversary

दुर्गा खोटे ने इस डर को तोड़ा और भारतीय सिनेमा की पहली फ्रीलांस एक्ट्रेस बनकर साबित कर दिया कि महिला कलाकार भी अपने दम पर अपनी राह बना सकती हैं. उनके इस कदम ने न सिर्फ उन्हें अलग पहचान दी बल्कि आने वाली पीढ़ियों की महिलाओं के लिए रास्ता भी आसान किया.

Durga Khote Birth Anniversary

दुर्गा खोटे का जन्म 14 जनवरी 1905 को मुंबई में हुआ था. वह बचपन में पढ़ाई में काफी होशियार थीं. उन्होंने ग्रेजुएशन किया था. उस समय लड़कियों के लिए शिक्षा तक पहुंचना भी आसान नहीं था, लेकिन दुर्गा की शिक्षा ने उनके भविष्य की नींव रख दी.

Durga Khote Birth

17 साल की उम्र में दुर्गा की शादी विश्वनाथ खोटे से हुई. विश्वनाथ एक पढ़े-लिखे युवा थे. शादी के बाद दुर्गा के दो बेटे हुए, लेकिन उनके जीवन में दुख भी जल्दी आया. 26 साल की उम्र में उनके पति का निधन हो गया. अकेले दोनों बच्चों का पालन-पोषण करना दुर्गा के लिए चुनौतीपूर्ण था. उन्होंने अपने बच्चों को संभालने के साथ-साथ आर्थिक रूप से खुद को मजबूत बनाने के लिए ट्यूशन पढ़ाने का काम शुरू किया.

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Durga Khote Birth Anniversary

इसी दौरान उन्हें फिल्मों का मौका मिला. उनकी बहन के जरिए दुर्गा खोटे को ‘फरेबी जाल’ फिल्म में छोटी भूमिका मिली. उस समय समाज में फिल्मों में काम करना महिलाओं के लिए असभ्य माना जाता था, लेकिन दुर्गा ने अपने बच्चों और आत्मनिर्भर बनने के लिए यह कदम उठाया. इसके बाद उनकी मेहनत और प्रतिभा ने उन्हें लगातार नई भूमिकाओं में लाकर खड़ा किया.

Durga Khote

दुर्गा खोटे ने फिल्मों में आने के बाद एक बड़ा कदम उठाया. उन्होंने स्टूडियो की कॉन्ट्रैक्ट प्रणाली को अस्वीकार कर कई कंपनियों के लिए काम करना शुरू किया. प्रभात फिल्म कंपनी के साथ काम करते हुए उन्होंने न्यू थिएटर, ईस्ट इंडिया फिल्म कंपनी और प्रकाश पिक्चर्स जैसी कंपनियों के लिए भी काम किया. इसी वजह से उन्हें भारतीय सिनेमा की पहली फ्रीलांस महिला कलाकार माना गया. इस फैसले ने उन्हें न सिर्फ स्वतंत्र बनाया बल्कि फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं की स्थिति भी बदल दी.

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उनका करियर लगभग 50 साल तक चला और इस दौरान उन्होंने हिंदी और मराठी में 200 से अधिक फिल्में कीं. उनके यादगार किरदारों में ‘मुगल-ए-आजम’ में जोधा बाई, ‘मिर्जा गालिब’ में मां का रोल, ‘बॉबी’ में दादी, और ‘भरत मिलाप’ जैसी कई हिट फिल्में शामिल हैं. वह केवल अभिनय तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि 1937 में ‘साथी’ फिल्म को प्रोड्यूस और डायरेक्ट भी किया, जो उस समय की दुर्लभ उपलब्धि थी.

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दुर्गा खोटे को कई पुरस्कारों और सम्मानों से नवाजा गया. 1942 और 1943 में उन्हें बंगाल फिल्म जर्नलिस्ट एसोसिएशन (बीएफजेए) द्वारा बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड मिला. 1958 में संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड, 1968 में पद्मश्री और 1983 में दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड से उन्हें सम्मानित किया गया. खास बात यह है कि दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड जीतने वाली चौथी महिला कलाकार दुर्गा खोटे ही थीं.

Durga Khote

जैसे-जैसे उनकी उम्र बढ़ी, दुर्गा खोटे ने मां और दादी के किरदार निभाना शुरू किया. इसके अलावा, उन्होंने शॉर्ट फिल्में, डॉक्यूमेंट्री और धारावाहिकों का निर्माण भी किया. दूरदर्शन के प्रसिद्ध शो ‘वागले की दुनिया’ का निर्माण भी उन्होंने ही किया. दुर्गा खोटे का निधन 22 सितंबर 1991 को हुआ.

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