सर्दियों में हरे चने की सब्जी और बाजरे की रोटी के स्वास्थ्य लाभ
Last Updated:
सर्दियों में धौलपुर के ग्रामीण इलाकों में हरे चने के पत्तों की सब्जी एक खास ताजगी और गर्माहट लेकर आती है. बाजरे के आटे और ताजी छाछ के साथ बनी यह पौष्टिक डिश न केवल स्वाद में लाजवाब है, बल्कि शरीर को अंदर से गर्म रखने और सर्दी-जुकाम जैसी छोटी बीमारियों से लड़ने की ताकत भी देती है. पारंपरिक मसालों और घर के बनाए गए तरीके से तैयार यह सब्जी हर उम्र के लोगों के लिए स्वास्थ्यवर्धक और बेहद पसंदीदा है.
धौलपुर. सर्दियों में जब कड़कड़ाती ठंड और कोहरा हर तरफ दस्तक देता है, तो शरीर को गर्माहट देने वाले खान-पान की अहमियत बढ़ जाती है. धौलपुर जिले के ग्रामीण अंचल में इस मौसम में ‘हरे चने के पत्तों की सब्जी’ बड़े चाव से बनाई और खाई जाती है. इस सब्जी की खासियत इसमें डाले जाने वाले बाजरे के आटे और छाछ हैं, जो इसे न केवल स्वादिष्ट बनाते हैं बल्कि स्वास्थ्यवर्धक भी बनाते हैं. इसे खाने से सर्द हवा वाली सर्दी में भी शरीर के अंदर से गर्मी महसूस होती है. इस अनोखी सब्जी को बनाने की प्रक्रिया काफी सरल और आसान है. सबसे पहले हरे चने के पत्तों को साफ पानी से धोकर बारीक काट लिया जाता है. इसके बाद इन्हें कुकर में डालकर कम से कम 5 से 10 मिनट तक अच्छे से उबाला जाता है, उबालने के बाद इस सब्जी का अतिरिक्त पानी निचोड़कर इन्हें एक अलग बर्तन में रख लिया जाता है. पारंपरिक चूल्हे या गैस पर उबालने के बाद हरे चने के पत्तों के पोषण तत्व बरकरार रहते हैं.
अगली प्रक्रिया में एक कढ़ाई में ताजा छाछ ली जाती है और इसमें उबले हुए हरे चने के पत्तों को अच्छी तरह मिलाया जाता है. सब्जी को गाढ़ा और पौष्टिक बनाने के लिए इसमें थोड़ा सा बाजरे का आटा मिलाया जाता है, जिसे स्थानीय भाषा में बाजरे का “छौंक लगाना” कहा जाता है. इसके बाद इसमें घर के पिसे हुए मसाले जैसे लाल मिर्च, धनिया, हल्दी, नमक और हींग-जीरा डाले जाते हैं. इस मिश्रण को गैस पर रखकर लगातार चमचे से तब तक चलाया जाता है जब तक इसमें उबाल न आ जाए. करीब 20 मिनट तक अच्छी तरह पकने के बाद इसमें हींग और जीरे का छौंक लगाया जाता है.हरे चने के पत्तों की सब्जी बनकर तैयार होने के बाद इसकी खुशबू ही भूख बढ़ा देती है.
यह सब्जी बुजुर्गों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद
धौलपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इसे बाजरे की रोटी के साथ खाना बेहद पसंद करते हैं. बाजरे की रोटी बनाने के लिए बाजरे के आटे को मुलायम नहीं माढ़ा जाता है, इस आटे को थोड़ा टाइट रखा जाता है और हाथों से रोटी को गोल किया जाता है. रोटी को बिल्कुल कड़क सेंका जाता है और फिर चने की सब्जी के साथ बड़े चाव से खाया जाता है. हरे चने के पत्तों और बाजरे से बनी यह सब्जी बुजुर्गों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद मानी जाती है क्योंकि इसमें फाइबर और आयरन भरपूर मात्रा में होते हैं. घर के शुद्ध मसालों और ताजी हरी सब्जी से तैयार यह डिश सर्दियों के मौसम में न केवल स्वाद का आनंद देती है, बल्कि सर्दी-जुकाम जैसी छोटी बीमारियों से लड़ने की शक्ति भी प्रदान करती है.
About the Author
Hello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ें