3 दिन रिकॉर्डिंग रूम में रहा संगीतकार, बनाई ऐसी सुरीली धुन, अमर हो गया गीत, छा गई कल्ट हिट मूवी – aamir khan jo jeeta wohi sikandar pehla nasha pehla khumar lyrics lalit pandit spent three nights at studio considered path breaking cult hit film
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Bollywood Cult Hit Movies : कई बार किसी फिल्म का सिर्फ एक गाना इतना पॉप्युलर हो जाता है कि पूरी फिल्म की पहचान उस सॉन्ग से जुड़ जाती है. एक सिर्फ एक गाना पूरी फिल्म पर भारी पड़ जाता है. 34 साल बॉक्स ऑफिस पर ऐसी ही एक फिल्म आई थी, जिसका एक गाना एंथम बन गया. आज इस फिल्म को कल्ट मूवी का स्टेटस हासिल है. इस गाने को तैयार करने के लिए संगीतकार तीन दिन तक रिकॉर्डिंग रूम में रहा था. तीन दिन का प्रयास रंग लाया. यह फिल्म कौन सी थी और वो सुपरहिट सॉन्ग कौन सा था, आइये जानते हैं…..

34 साल पहले बॉक्स ऑफिस पर एक ऐसी फिल्म आई थी जो आज भी युवाओं के दिल में राज करती है. यह एक स्पोर्ट्स ड्रामा फिल्म थी जिसका निर्देशन मंसूर खान ने किया था. इस फिल्म को 22 मई 1992 को रिलीज किया गया था. आज इस फिल्म को कल्ट मूवी का स्टेट्स हासिल है. IMDB पर इस फिल्म को 8.1 की रेटिंग मिली हुई है. इस फिल्म का नाम था : जो जीता वही सिकंदर जिसमें आमिर खान, आयशा जुल्का, पूजा बेदी, मामिक सिंह, दीपक तिजोरी और कुलभूषण खरबिंदा लीड रोल में नजर आए थे. डायरेक्टर आमिर खान के ममेरे भाई मंसूर खान ने किया था. मंसूर खान ने 1988 में आमिर खान के साथ ‘कयामत से कयामत तक’ से बतौर डायरेक्टर डेब्यू किया था. फिल्म को आमिर खान के मामा नासिर हुसैन ने प्रोड्यूस किया था. आइये जानते हैं इस मूवी से जुड़े दिलचस्प फैक्ट्स….

मंसूर खान ने पहले ‘जो जीता वही सिकंदर’ की कहानी पहले लिखी थी लेकिन अपने पिता के कहने पर ‘कयामत से कयामत तक’ को पूरा किया और रिलीज किया. ‘कयामत से कयामत’ तक 1988 में रिलीज हुई थी. फिर वो ‘जो जीता वही सिकंदर’ को बनाने में जुट गए. इस फिल्म के लिए अक्षय कुमार ने भी ऑडिशन दिया था लेकिन उन्हें रिजेक्ट कर दिया गया था. दिलचस्प बात यह है कि अक्षय कुमार-आमिर खान की जोड़ी आज तक किसी भी फिल्म में नजर नहीं आई है. इस फिल्म में दीपक तिजोरी ने निगेटिव किरदार निभाया था. आमिर खान के बड़े भाई के रोल में मामिक सिंह ने किया था.

फिल्म का प्लॉट 1979 में आई अमेरिकन फिल्म ‘ब्रेकिंग अवे’ से इंस्पायर्ड था. दोनों फिल्मों में कई समानताएं हैं. दोनों ही फिल्में दोस्ती, बाइसाइकिल रेसिंग और पैरेंटल रिलेशनशिप पर बेस्ड हैं. हालांकि कहानी का ट्रीटमेंट अलग-अलग है. पहले सरोज खान इस फिल्म की कोरियाग्राफर थीं लेकिन उन्होंने ‘पहला नशा’ सॉन्ग शूटिंग के दौरान उन्होंने फिल्म छोड़ दी. फराह खान ने गाने को पूरा किया और इस तरह से बॉलीवुड में उनका करियर शुरू हुआ. इस फिल्म में आमिर खान के भांजे ‘इमरान खान’ और भाई फैसल खान भी नजर आए थे.
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फिल्म में जतिन-ललित का म्यूजिक से सजा एक गाना ‘पहला नशा-पहला खुमार’ था जो युवाओं के लिए एंथम बन गया था. यह गाना अपने समय के साथ और जवां होता जाता है. गाने के बोल और उदित नारायण की आवाज एक अलग का जादू पैदा करती है. इस खास खाने को तैयार करने का किस्सा और भी दिलचस्प है. संगीतकार ललित पंडित ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘हमें सबसे बड़ा डर इस बात का था कि यह फिल्म प्रोड्यूसर नासिर हुसैन की थी. उनकी पिछली फिल्म ‘कयामत से कयामत तक’ सुपरहिट रही थी. फिल्म का म्यूजिक भी ब्लॉकबस्टर था जो कि आनंद-मिलिंद ने तैयार किया था. हमें इस फिल्म के लिए म्यूजिक देना था तो दबाव बहुत था. हमारी एक और फिल्म खिलाड़ी भी उसी समय बन रही थी, जिसका म्यूजिक भी कंपोज हो रहा था. वो भी बहुत महत्वपूर्ण फिल्म थी. मुझे याद है कि जो जीता वही सिकंदर फिल्म के इस गाने के लिए मैं रिकॉर्डिंग रूम में रहने लगा था. ये गाना मैंने रिकॉर्ड करवाया. स्क्रैच बनवाया था. पियानो के कुछ पीस बनाए थे. गिटार कहां बजेगा, सब कुछ तय था. गाना कैसे जाएगा. पूरा अरेंज करके मंसूर खान को सुनाया था. नासिर हुसैन साहब को सुनाया था. सबको गाना पसंद आया लेकिन इतना बड़ा आइकॉनिक सॉन्ग बन जाएगा, इसका अंदाजा किसी को ना था.’

‘पहला नशा, पहला खुमार’ गाना गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखा था. ‘तुमसा नहीं देखा’ से लेकर ‘जो जीता वही सिकंदर’ और ‘अकेले हम अकेले तुम’ फिल्म तक उनका एसोसिएशन नासिर हुसैन के साथ रहा. जतिन ललित तब न्यूकमर्स थे, जब उन्हें फिल्म के लिए साइन किया गया था. यह नासिर हुसैन की बतौर प्रोड्यूसर लास्ट फिल्म थी.

यह फिल्म एक कल्ट क्लासिक मानी जाती है. स्पोर्ट्स थीम पर बेस्ड यह फिल्म युवाओं को अपने लक्ष्य को पाने के लिए जिद-जुनून और मेहनत करने की प्रेरणा देती है. करीब 2 करोड़ के बजट में बनी इस मूवी ने वर्ल्डवाइड 7 करोड़ का कलेक्शन किया था. यह एक हिट फिल्म साबित हुई थी. 1992 में कमाई के मामले में यह फिल्म 12वें नंबर पर थी. फिल्म ने दो फिल्मफेयर अवॉर्ड जीते थे. यह फिल्म अपने समय से बहुत आगे की थी.

मामिक सिंह की यह डेब्यू फिल्म थी लेकिन बॉलीवुड में उनका करियर नहीं बन पाया. उन्हें फिल्म में आमिर खान के भाई के रूप में याद किया जाता है. इस फिल्म में अमोल गुप्ते ने रेस अनाउंसर का रोल निभाया था. अमोल गुप्ते ने ही आमिर खान की फिल्म ‘तारे जमीं पर’ को प्रोड्यूस किया था. 1993 में इस मूवी को बेस्ट फिल्मफेयर का अवॉर्ड भी मिला था. म्यूजिक डायरेक्टर जतिन-ललित फिल्म के एक सॉन्ग ‘हमसे है सारा जहां’ में डांस करते नजर आए थे.

फिल्म में आदित्य लखिया ने भी आमिर खान के दोस्त का रोल निभाया था. बाद में आमिर खान की 2001 की फिल्म लगान में उन्होंने कचरा का किरदार निभाकर सबका दिल जीत लिया था. फिल्म की कास्ट में बहुत ज्यादा बदलाव किया गया था, ऐसे में प्रोड्यूसर मंसूर खान को 80 फीसदी शूटिंग फिर से करनी पड़ी थी.