मकर संक्रांति पर उदयपुर की पारंपरिक गेहूं खिचड़ा रेसिपी व महत्व

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उदयपुर में मकर संक्रांति पर घरों में तिल और गुड़ के व्यंजनों के साथ सबसे खास होता है गेहूं का खिचड़ा. यह पारंपरिक व्यंजन दिखने में खीर जैसा और स्वाद में लाजवाब होता है, जिसे श्रद्धा के साथ पूजा में भोग लगाने के लिए बनाया जाता है. पुराने समय में नया गेहूं सबसे पहले भगवान को अर्पित किया जाता था, और यही परंपरा आज भी निभाई जाती है. इसे बनाने के लिए साबुत गेहूं को भिगोकर, कुकर में पकाया जाता है और फिर दूध, शक्कर व ड्राई फ्रूट्स मिलाकर खीर की तरह तैयार किया जाता है.

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उदयपुर. मकर संक्रांति का नाम आते ही मेवाड़ के घरों में तिल और गुड़ से बने व्यंजनों की खुशबू फैलती है, लेकिन इस पर्व की सबसे खास पहचान गेहूं का खिचड़ा है. वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी उतनी ही श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जा रही है, खास बात यह है कि यह व्यंजन मेवाड़ के कई घरों में भगवान को भोग लगाने के लिए जरूर बनाया जाता है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन चावल का सेवन नहीं किया जाता. इसी वजह से इस दिन गेहूं से बने व्यंजन तैयार करने की परंपरा बनी.

इसी परंपरा से जुड़ा हुआ है यह पारंपरिक गेहूं का खिचड़ा, जो दिखने में खीर जैसा और स्वाद में बेहद लाजवाब होता है. बुजुर्गों का कहना है कि पुराने समय में जब घरों में नया गेहूं आता था, तो उसका पहला उपयोग भगवान को भोग लगाने के लिए किया जाता था. गेहूं का खिचड़ा उसी आस्था का प्रतीक है. परिवार की महिलाएं इसे सुबह से ही श्रद्धा के साथ बनाती हैं और फिर पूजा के बाद पूरे परिवार में बांटा जाता है.

इसे बनाने की रेसिपी बेहद आसान
गेहूं का खिचड़ा बनाना मुश्किल नहीं, बस थोड़े धैर्य और सही विधि की जरूरत होती है. इसे बनाने के लिए सबसे पहले एक कटोरी साबुत गेहूं को रात भर पानी में भिगो दें. सुबह गेहूं को 3–4 बार अच्छी तरह धो लें, ताकि उसका छिलका निकल जाए. इसके बाद कुकर में एक कटोरी गेहूं और तीन कटोरी पानी डालकर 5 से 6 सीटी तक पकाएं. जब गेहूं पूरी तरह नरम और मुलायम हो जाए, तो उसे कुछ देर ठंडा होने दें. अब एक कड़ाही या भारी तले के बर्तन में लगभग 1 लीटर दूध लें और उसमें पके हुए गेहूं को डाल दें. मध्यम आंच पर लगातार चलाते हुए 10 से 20 मिनट तक पकाएं, ठीक उसी तरह जैसे खीर पकाई जाती है. इससे दूध और गेहूं आपस में अच्छी तरह मिल जाते हैं और स्वाद भी बढ़ जाता है. अंत में इसमें स्वाद अनुसार शक्कर डालें और ऊपर से कटे हुए ड्राई फ्रूट्स जैसे बादाम, काजू और किशमिश मिला दें. कुछ लोग इसमें इलायची पाउडर भी डालते हैं, जिससे खुशबू और स्वाद दोनों बढ़ जाते हैं.

स्वाद के साथ सेहत का भी ध्यान
यह पारंपरिक खिचड़ा न सिर्फ स्वादिष्ट होता है, बल्कि पौष्टिक भी है. दूध और गेहूं से बना यह व्यंजन शरीर को ऊर्जा देता है और सर्दियों में खास तौर पर फायदेमंद माना जाता है. मेवाड़ में यह खिचड़ा सिर्फ एक रेसिपी नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और पारिवारिक अपनापन का प्रतीक बन चुका है.

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Monali Paul

Hello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ें

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