दिल्ली के सबसे बड़े पॉश एरिया में दिनदहाड़े डाका, पति-पत्नी को ‘गंडासा’ लगाकर लूट लिए 15 करोड़, ताकती रह गई दिल्ली पुलिस
नई दिल्ली. दिल्ली के पॉश इलाके ग्रेटर कैलाश-II में रहने वाले एक बुजुर्ग एनआरआई डॉक्टर दंपत्ति के साथ जो हुआ, वह किसी डरावनी फिल्म की पटकथा से कम नहीं है. ठगों ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर न केवल उन्हें उनके ही घर में कैद कर दिया, बल्कि उनकी मेहनत की गाढ़ी कमाई के 14.85 करोड़ रुपये भी लूट लिए. इस ठगी की जड़ें भारत के सात राज्यों में फैली हुई हैं, जिसने साइबर सुरक्षा और बैंकिंग प्रणाली की खामियों को उजागर कर दिया है. 77 वर्षीय डॉक्टर इंदिरा तनेजा और उनके 81 वर्षीय पति डॉक्टर ओम तनेजा ने शायद ही कभी सोचा होगा कि अमेरिका में चार दशक बिताने के बाद अपने वतन वापसी पर उन्हें ऐसे खौफनाक अनुभव से गुजरना होगा.
कैसे शुरू हुआ यह खेल?
इस पूरे मामले की शुरुआत 24 दिसंबर 2025 को हुई. डॉक्टर दंपत्ति के पास एक फोन कॉल आया. कॉल करने वाले ने खुद को भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) का अधिकारी बताया. उन्होंने दावा किया कि दंपत्ति के नाम पर जारी सिम कार्ड से अश्लील वीडियो प्रसारित किए जा रहे हैं और वे मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) के एक गंभीर मामले में फंसे हुए हैं. बुजुर्गों को डराने के लिए कहा गया कि उनके खिलाफ 20 से ज्यादा शिकायतें दर्ज हैं और उनकी गिरफ्तारी के वारंट जारी हो चुके हैं. ठगों ने उन्हें किसी को भी यह बात बताने से मना किया, यह कहकर कि अगर किसी को पता चला तो उनकी जान को खतरा हो सकता है. इसी मनोवैज्ञानिक दबाव को ‘डिजिटल अरेस्ट’ कहा जाता है, जिसमें पीड़ित को कैमरा ऑन रखकर घर के भीतर ही रहने को मजबूर किया जाता है.
17 दिनों तक घर बना जेल
7 राज्यों में फैला ठगी का काला साम्राज्य दिल्ली पुलिस की जांच में यह खुलासा हुआ है कि ठगे गए 14.85 करोड़ रुपये किसी एक जगह नहीं, बल्कि देश के सात अलग-अलग राज्यों में भेजे गए. ठगों ने इसके लिए बेहद शातिर तरीका अपनाया.
गुजरात (वडोदरा)- सबसे बड़ी रकम, यानी 4 करोड़ रुपये वडोदरा के एक बैंक खाते में भेजे गए.
असम (गुवाहाटी)- 26 दिसंबर को 1.99 करोड़ रुपये जलुकबारी इलाके के एक खाते में ट्रांसफर हुए.
दिल्ली (मयूर विहार)- 2 जनवरी को 2 करोड़ रुपये पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार फेज-3 में भेजे गए.
महाराष्ट्र (मुंबई)- 5 जनवरी को 2.05 करोड़ रुपये मुंबई के पॉश नेपियन सी रोड स्थित एक खाते में गए.
उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल- इसके बाद 2.1 करोड़ रुपये यूपी के वाजिदपुर और 2.2 करोड़ रुपये कोलकाता के मौलाली में ट्रांसफर किए गए.
उत्तराखंड- अंत में 9 जनवरी को 50 लाख रुपये उत्तराखंड के बेलड़ा में भेजे गए.
पुलिस सूत्रों के अनुसार, जिन बैंक खातों में यह पैसा गया, वे चैरिटेबल फाउंडेशन, केमिकल ट्रेडिंग कंपनियों, भर्ती फर्मों और टूर एंड ट्रेवल्स जैसे व्यवसायों के नाम पर पंजीकृत थे. यह इस बात का सबूत है कि साइबर अपराधी अब फर्जी शेल कंपनियों का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि बैंक और पुलिस को गुमराह किया जा सके.
500 ‘म्यूल अकाउंट्स’ का मकड़जाल पुलिस की प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया है कि इन मुख्य खातों में पैसा पहुँचने के बाद, उसे तुरंत 500 से ज्यादा ‘म्यूल अकाउंट्स’ (किराये के खाते) और डिजिटल वॉलेट में बांट दिया गया. यह काम बहुत ही कम मूल्य के लेन-देन (10 रुपये से 500 रुपये तक) के जरिए किया गया, ताकि पैसे के ट्रेल (रास्ते) को ट्रैक करना लगभग असंभव हो जाए. दिल्ली पुलिस ने अब तक मुस्तैदी दिखाते हुए 1.41 करोड़ रुपये को होल्ड (फ्रीज) करवा दिया है, लेकिन बाकी की बड़ी रकम अभी भी ठगों के पास है. पुलिस अब बैंकों को पत्र लिखकर उस अंतिम छोर तक पहुँचने की कोशिश कर रही है जहाँ यह पैसा निकाला गया या ट्रांसफर किया गया.
डॉक्टर तनेजा की बेमिसाल उपलब्धियां और ठगों का वार डॉक्टर इंदिरा तनेजा कोई साधारण नागरिक नहीं हैं; वह न्यू जर्सी की यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिसिन एंड डेंटिस्ट्री में प्रोफेसर और डॉक्टर रह चुकी हैं. उनके पति डॉक्टर ओम तनेजा ने अमेरिकी संघीय सरकार और संयुक्त राष्ट्र (UN) के साथ महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है. 40 साल से ज्यादा अमेरिका में रहने के बाद वे भारत लौटे थे. ठगों ने उनकी इसी संवेदनशीलता और कानून के प्रति सम्मान का फायदा उठाया. उन्हें 9 जनवरी 2026 तक डिजिटल अरेस्ट में रखा गया, जब तक कि उनकी जमा पूंजी का एक-एक पैसा खत्म नहीं हो गया.
सावधानी ही बचाव है यह मामला एक चेतावनी है कि कोई भी सरकारी संस्था जैसे पुलिस, सीबीआई या ट्राई कभी भी ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती और न ही फोन पर पैसों की मांग करती है. यदि आपके पास ऐसा कोई कॉल आए, तो तुरंत अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें.