बेटे का इंतजार और वो आखिरी उम्मीद… मां के दर्द पर बना वो कालजयी गाना, जिसने नम कर दी पूरे देश की आंखें

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भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ गाने ऐसे होते हैं, जो महज धुन नहीं, बल्कि देश का जज्बात बन जाते हैं. ऐसा ही एक कालजयी गाना है ‘संदेसे आते हैं’, जिसके पीछे छिपी असल जिंदगी की कहानी किसी को भी रुला सकती है. 1971 के युद्ध के दौरान जब फिल्मकार जेपी दत्ता की मां हर शाम रेडियो के पास बैठकर शहीदों की लिस्ट में अपने बेटे का नाम न सुनकर बड़े भरोसे से कहती थीं कि मेरा बेटा घर आएगा, तो उसी तड़प और उम्मीद को जावेद अख्तर ने शब्दों में पिरोया.

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मां के दर्द पर बना वो कालजयी गाना, जिसने नम कर दी पूरे देश की आंखें28 साल बाद भी फीकी नहीं पड़ी इस सदाबहार गाने की चमक.

नई दिल्ली. सनी देओल की मच अवेटेड फिल्म बॉर्डर 2 का गाना ‘घर कब आओगे’ हाल ही में भारत-पाकिस्तान के लोंगेवाला बॉर्डर पर लॉन्च किया गया. इस मौके पर हजारों बीएसएफ जवान और उनके परिवार मौजूद थे, जिससे माहौल काफी भावुक और यादगार बन गया. यह गाना साल 1997 की फिल्म बॉर्डर के गाने संदेसे आते हैं का न्यू वर्जन है. लेकिन बहुत कम लोगों को पता होगा कि यह आइकॉनिक गाना वजूद में कैसा आया. इसके पीछे एक दिल छू लेने वाली सच्ची कहानी है, जिसे फिल्म निर्माता जेपी दत्ता की बेटी निधि दत्ता ने बताया.

उन्होंने 1971 के भारत-पाक युद्ध के दिनों को याद करते हुए एक इमोशनल खुलासा किया. निधि ने बताया कि उनके चाचा उस समय युद्ध के मैदान में लड़ रहे थे. उनकी दादी हर शाम रेडियो के पास बैठ जाती थीं और शहीद होने वाले जवानों की लिस्ट में नाम आने का इंतजार करती थीं. जब उस लिस्ट में उनके बेटे का नाम नहीं आता था, तो वो जेपी दत्ता की तरफ मुड़कर बड़े भरोसे के साथ कहती थीं- मेरा बेटा घर वापस आएगा. दादी की इसी उम्मीद और ममता ने इस यादगार गाने को जन्म दिया.

सैनिकों और उनके परिवार का दर्द बयां करता है गाना

यह गाना सैनिकों और उनके परिवारों के बीच के इमोशंस को दोनों तरफ से बहुत खूबसूरती से पेश करता है. एक तरफ इसमें सरहद पर तैनात एक सैनिक की अपने परिवार से मिलने की तड़प दिखाई गई है, तो दूसरी तरफ उस परिवार के दर्द और अंतहीन इंतजार को बयां किया गया है, जो वे अपने बेटे या पति के युद्ध के मैदान में होने के दौरान सहते हैं.

जावेद अख्तर ने गाने को दिए शब्दों के पंख

जावेद अख्तर के लिखे गाने संदेसे आते हैं ने साल 1997 में बेस्ट लिरिक्स का नेशनल अवॉर्ड जीता था. अब ‘बॉर्डर 2’ उसी विरासत और उन्हीं भावनाओं को आगे ले जा रही है. कोईमोई डॉट कॉम के अनुसार, इस भावुक किस्से को सुनाते हुए निधि दत्ता ने कहा, ‘1971 की जंग के दौरान मेरी दादी घंटों रेडियो के पास बैठकर खबरें सुनती रहती थीं. उनके मन में बस यही उम्मीद और डर रहता था कि कहीं दीपक चाचा का नाम उन शहीदों की लिस्ट में न आ जाए.’

बेटे के लिए मां की ममता की कहानी है गाना

उन्होंने आगे कहा, ‘जब रेडियो पर उनका नाम नहीं आता था, तो वह सुकून की सांस लेकर रेडियो बंद कर देती थीं. फिर वह मुड़कर अपने दूसरे बेटे, यानी मेरे पापा (जेपी दत्ता) को देखती थीं और बड़े यकीन से कहती थीं कि मेरा बेटा घर आएगा. दादी की यह बात पापा के दिलो-दिमाग में हमेशा के लिए घर कर गई. जब ‘बॉर्डर’ फिल्म बन रही थी, तो पापा ने यह पूरा किस्सा जावेद अख्तर साहब को सुनाया. बस, दादी के उसी अटूट विश्वास और इंतजार से इस गाने का जन्म हुआ.’

23 जनवरी को रिलीज होगी बॉर्डर 2 फिल्म

मशहूर गाने ‘संदेसे आते हैं’ का नया वर्जन ‘घर कब आओगे’ रिलीज कर दिया गया है. यह गाना ठीक उसी तरह दिल को छू लेने वाला है और साथ ही आपको पुराने दिनों की यादों में ले जाता है. ‘बॉर्डर 2’ में इस बार सनी देओल, वरुण धवन, अहान शेट्टी और दिलजीत दोसांझ जैसे सितारों की टोली नजर आएगी. इस फिल्म का निर्देशन अनुराग सिंह ने किया है. इसे भूषण कुमार, जेपी दत्ता और निधि दत्ता मिलकर प्रोड्यूस कर रहे हैं. देशभक्ति के जज्बे से भरी यह फिल्म 23 जनवरी 2026 को सिनेमाघरों में दस्तक देगी.

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Kamta Prasad

साल 2015 में दैनिक भास्कर से करियर की शुरुआत की. फिर दैनिक जागरण में बतौर टीम लीड काम किया. डिजिटल करियर की शुरुआत आज तक से की और एबीपी, ज़ी न्यूज़, बिज़नेस वर्ल्ड जैसे संस्थानों में काम किया. पिछले 6 सालों से …और पढ़ें

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मां के दर्द पर बना वो कालजयी गाना, जिसने नम कर दी पूरे देश की आंखें

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