makar sankranti 2026 date time why is it celebrated and importance | मकर संक्रांति कब, बुधवार या गुरुवार? शुरू होगा देवताओं का दिन, क्या है उत्तरायण, जानें मुहूर्त और महत्व

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Makar Sankranti 2026 Date: मकर संक्रांति उस समय मनाते हैं, जब सूर्य देव शनि की राशि मकर में प्रवेश करते हैं. उस समय से देवताओं का दिन शुरू होता है. इस दिन स्नान करने के बाद अन्न, तिल, गुड़, वस्त्र आदि का दान करते हैं. मकर संक्रांति पर काले तिल का दान बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है. इसके पीछे पौराणिक कथा है, जिसमें बताया गया है कि सूर्य देव जब ​शनिदेव के घर मकर में गए थे, तो उन्होंने काले तिल से उनका स्वागत किया था. जिससे प्रसन्न होकर सूर्यदेव ने उनको दूसरा घर यानि राशि कुंभ प्रदान की थी. इस साल मकर संक्रांति 14 जनवरी बुधवार को है या 15 जनवरी गुरुवार को? जानते हैं मुहूर्त और महत्व.

मकर संक्रांति तारीख और समय

लखनऊ के ज्योतिषाचार्य पं.राकेश पाण्डेय के अनुसार, इस साल मकर संक्रांति 15 जनवरी गुरुवार को मनाना शुभ फलदायी होगा क्योंकि मकर संक्रांति का पुण्य काल उस दिन ​ही प्राप्त हो रहा है.

पंचांग के अनुसार, 14 जनवरी बुधवार को रात में 9 बजकर 20 मिनट पर सूर्यदेव मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं. 14 जनवरी को सूर्यास्त के बाद मकर संक्रांति का क्षण प्राप्त हो रहा है. शास्त्र मान्यताओं के अनुसार जब सूर्य देव सूर्यास्त के बाद राशि परिवर्तन करते हैं तो मकर संक्रांति का पुण्य काल अगले दिन सुबह में माना जाता है. इस आधार पर मकर संक्रांति 15 जनवरी गुरुवार को मनाना शास्त्र सम्मत है.

मकर संक्रांति क्यों मनाते हैं?

ज्योतिषाचार्य पाण्डेय बताते हैं कि सूर्यदेव हर माह में एक अ​वधि के बाद एक राशि से दूसरे राशि में प्रवेश करते हैं, जिस राशि में वे प्रवेश करते हैं, उसकी संक्रांति मनाई जाती है. संक्रांति के दिन स्नान और दान करने से पाप मिटते हैं और पुण्य मिलता है. इस दिन लोग मंत्र जाप, हवन, यज्ञ आदि भी करते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार मकर सं​क्रांति पर आप जो दान करते हैं, वह पुनर्जन्म पर 100 गुना मिलता है.

सूर्यदेव जब मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो वे दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं. इस समय में सूर्य देव मकर रेखा से उत्तर की ओर कर्क रेखा की तरफ जाते हैं तो उत्तरायण होते हैं, जब वे कर्क रेखा से दक्षिण जाते हैं तो वह दक्षिणायन होते हैं. उत्तरायण के समय दिन का समय अधिक और रात का समय कम होने लगता है. इस वजह से उत्तरायण को देवताओं का दिन कहा जाता है, वहीं दक्षिणायन में दिन छोटे और रातें बड़ी होती हैं, इसे देवताओं का रात कहते हैं. मकर संक्रांति को उत्तरायण पर्व भी कहा जाता है. उत्तरायण को देवयान और दक्षिणायन को पितृयान भी कहते हैं.

मकर संक्रांति मुहूर्त

दृक पंचांग के अनुसार मकर संक्रांति 15 जनवरी के कुछ मुहूर्त नीचे दिए गए है. इसमें आप स्नान, दान और शुभ कार्य कर सकते हैं.

ब्रह्म मुहूर्त: प्रात:काल 05:27 बजे से लेकर 06:21 बजे तक
शुभ समय यानि अभिजीत मुहूर्त: दोपहर में 12:10 बजे से दोपहर 12:52 बजे तक
शुभ-उत्तम मुहूर्त: सुबह में 07:15 बजे से 08:34 बजे तक
चर-सामान्य मुहूर्त: दिन में 11:12 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक
लाभ-उन्नति मुहूर्त: दोपहर में 12:31 बजे से 01:50 बजे तक
अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: दोपहर में 01:50 बजे से 03:08 बजे तक
शुभ-उत्तम मुहूर्त: शाम में 04:27 बजे से शाम 05:46 बजे तक

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