क्या है रैमजेट टेक्नोलॉजी? जिससे आर्टिलरी शेल बना मिनी मिसाइल, IIT मद्रास ने तोप के गोले में फिट किया जेट इंजन!
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IIT मद्रास ने सेना के साथ मिलकर रैमजेट तकनीक वाला आर्टिलरी गोला बनाया है, जो तोप की मारक क्षमता को 50% तक बढ़ा देगा. यह खास गोला हवा से ऑक्सीजन खींचकर अपनी रफ्तार बढ़ाता है, जिससे साधारण तोप मिसाइल की तरह 70 किमी दूर तक वार कर सकती है. आत्मनिर्भर भारत के तहत बना यह मिनी मिसाइल पुरानी तोपों को ही सुपरपावर बना देगा, जिससे युद्ध के मैदान में दुश्मन का बचना नामुमकिन होगा.
आईआईटी मद्रास ने कमाल कर दिया. (AI Image)नई दिल्ली. कल्पना कीजिए एक ऐसे तोप के गोले की जो नली से निकलते ही खत्म नहीं होता बल्कि आसमान में जाते ही एक सुपरसोनिक जेट की तरह अपनी रफ्तार और दूरी बढ़ा लेता है. पोखरण की तपती रेत और देवलाली के मैदानों में भारतीय वैज्ञानिकों ने युद्ध के इतिहास की एक नई पटकथा लिख दी है. IIT मद्रास के प्रोफेसरों और भारतीय सेना के दिग्गज जनरलों ने मिलकर एक ऐसा ‘मैजिक शेल’ तैयार किया है जो साधारण तोप के गोले को ‘मिनी मिसाइल’ में तब्दील कर देता है. जिस तोप की मारक क्षमता कल तक 40 किलोमीटर थी, अब वही पुरानी तोप 70 किलोमीटर दूर बैठे दुश्मन के बंकरों को धुआं-धुआं कर देगी. रैमजेट इंजन तकनीक का यह स्वदेशी चमत्कार न केवल आत्मनिर्भर भारत की ताकत है बल्कि यह आधुनिक युद्ध के मैदान में भारत की ‘ब्रह्मास्त्र’ स्ट्राइक है.
क्या है रैमजेट तकनीक? कैसे काम करता है यह ‘उड़ता गोला’
साधारण तौर पर तोप का गोला बारूद के धमाके से निकलता है और गुरुत्वाकर्षण के कारण एक निश्चित दूरी पर गिर जाता है. लेकिन IIT मद्रास की इस तकनीक ने गोले के पिछले हिस्से (Base) में एक रैमजेट इंजन फिट कर दिया है.
· हवा से लेता है ताकत: रैमजेट इंजन की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें कोई हिलने वाला हिस्सा (Moving parts) नहीं होता. यह गोले की तेज रफ्तार का इस्तेमाल करके हवा को अंदर खींचता है और उसे कंप्रेस (दबाव) करता है.
· मिसाइल जैसी उड़ान: हवा के इस दबाव के साथ जब फ्यूल जलता है तो गोले को पीछे से जबरदस्त धक्का (Thrust) मिलता है. इससे गोला अपनी रफ्तार को बनाए रखता है और बहुत लंबी दूरी तय करता है.
· बिना नई तोप के डबल पावर: इस तकनीक की सबसे क्रांतिकारी बात यह है कि इसके लिए सेना को नई और महंगी तोपें खरीदने की जरूरत नहीं है. हमारी मौजूदा ATAGS, धनुष और वज्र तोपें ही इस नए गोले को दाग सकती हैं.
IIT मद्रास का करिश्मा: मारक क्षमता में 50% का इजाफा
वैज्ञानिकों ने जब इस रैमजेट-असिस्टेड शेल का परीक्षण किया, तो नतीजे चौंकाने वाले थे. मौजूदा गन सिस्टम की रेंज लगभग आधी बढ़ गई:
| आर्टिलरी गन सिस्टम | पुरानी रेंज (किमी) | नई ‘रैमजेट’ रेंज (किमी) | वृद्धि (%) |
|---|---|---|---|
| ATAGS (अटाग्स) | 40 किमी | ~70 किमी | 75% |
| K9 Vajra (वज्र) | 36 किमी | ~62 किमी | 72% |
| Dhanush (धनुष) | 30 किमी | ~55 किमी | 83% |
@iitmadras has recorded a significant defence-technology breakthrough with the development of ramjet-assisted artillery shells capable of extending the range of existing gun systems by nearly 50%, without any loss in lethality.