SC/ST रिजर्वेशन के लिए क्रीमी लेयर हो, CJI जस्टिस सूर्यकांत के सामने उठी मांग, भेजा केंद्र-राज्य को नोटिस
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Supreme Court Hearing on : सुप्रीम कोर्ट में रिजर्वेशन में बदलाव की मांग उठी है. दरअसल, एक पीआईएल में मांग उठाई गई है है कि एससी और एसटी आरक्षण में क्रीम-लेयर लाया जाए ताकि जरूरतमंद लोगों को इसका लाभ मिल सके हैं.
CJI सूर्यकांत की पीठ के सामने एससी-एसटी रिजर्वेशन में बदलाव की मांग उठी है. (फाइल फोटो)CJI Suryakant: समय की मांग के साथ आरक्षण में भी बदलाव जरूरी है. संविधान बनाने वाले हमारे पूर्वजों ने पिछड़ी जातियों के मुख्य धारा में लाने के लिए आरक्षण का प्रावधान लाया था. लेकिन, ये समाज की अंतिम कड़ी तक पहुंच नहीं पाया. समाज में कुछ खास लोग इसकी मलाई खाते रहते हैं और आरक्षण का फायदा लेते हैं. हालांकि, अब सुप्रीम कोर्ट के पास इसमें बदलाव के लिए मांग उठने लगी है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत के पास आरक्षण में बदलाव के लिए याचिका लगाई गई है. उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है.
दरअसल, सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) श्रेणियों के भीतर ‘क्रीमी लेयर’ (Creamy Layer) सिद्धांत को लागू करने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है. चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्य बागची की पीठ ने अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर इस रिट याचिका पर सुनवाई की. अदालत ने इस मुद्दे की संवेदनशीलता को देखते हुए केंद्र और राज्यों से जवाब मांगा है.
क्या है याचिका की मुख्य मांग?
- वकील अश्विनी उपाध्याय ने शीर्ष अदालत के सामने तर्क दिया कि अब समय आ गया है जब एससी/एसटी आरक्षण के लाभों का वितरण अधिक न्यायपूर्ण तरीके से किया जाए. याचिका में उनकी मांग कुछ इस प्रकार है-
- संवैधानिक पदों पर बैठे लोग: यदि किसी एससी/एसटी परिवार का सदस्य पहले से ही किसी संवैधानिक पद या वरिष्ठ सरकारी पद (जैसे क्लास-1 अधिकारी) पर पहुंच चुका है, तो उनके बच्चों को आरक्षण के लाभ से वंचित किया जाना चाहिए.
- समानता का सिद्धांत: याचिकाकर्ता का कहना है कि संपन्न परिवारों के बच्चों को आरक्षण मिलना जारी रहने से उस वर्ग के सबसे पिछड़े और जरूरतमंद लोगों तक लाभ नहीं पहुंच पाता है.
आरक्षण का मूल उद्देश्य प्रभावित हो रहा है
सुप्रीम कोर्ट में बहस के दौरान उपाध्याय ने दलील दी कि एससी/एसटी श्रेणियों के भीतर सामाजिक और आर्थिक रूप से उन्नत हो चुके परिवारों को निरंतर आरक्षण देना ‘सकारात्मक कार्रवाई’ (Affirmative Action)*के मूल उद्देश्य को ही विफल कर देता है. उन्होंने तर्क दिया कि आरक्षण का उद्देश्य उन लोगों को मुख्यधारा में लाना है जो सदियों से हाशिए पर रहे हैं, न कि उन लोगों को और अधिक संपन्न बनाना जो पहले से ही समाज के शीर्ष पदों पर आसीन हैं.
केंद्र-राज्यों की भूमिका
सीजेआई सूर्यकांत की पीठ ने याचिका को गंभीरता से लेते हुए यह माना कि इस पर व्यापक चर्चा और सभी राज्यों की राय आवश्यक है. केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को भेजे गए नोटिस का उद्देश्य यह समझना है कि क्या सरकारी आंकड़े भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि आरक्षण का लाभ केवल कुछ विकसित परिवारों तक ही सीमित रह गया है.
क्या है क्रीमी लेयर का मतलब
बता दें कि ‘क्रीमी लेयर’ का सिद्धांत वर्तमान में मुख्य रूप से अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण में लागू है, जहां एक निश्चित आय सीमा से ऊपर के लोगों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलता. हालांकि, एससी/एसटी वर्ग में इसे लागू करने को लेकर लंबे समय से कानूनी और राजनीतिक बहस चलती रही है. अगस्त 2024 के ऐतिहासिक फैसले में भी सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की पीठ ने राज्यों को एससी/एसटी में उप-वर्गीकरण (Sub-classification) और क्रीमी लेयर की पहचान करने की अनुमति दी थी. अब 2026 में CJI सूर्यकांत के सामने आई यह याचिका इस दिशा में एक नया और निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है.
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दीप राज दीपक 2022 में न्यूज़18 से जुड़े. वर्तमान में होम पेज पर कार्यरत. राजनीति और समसामयिक मामलों, सामाजिक, विज्ञान, शोध और वायरल खबरों में रुचि. क्रिकेट और मनोरंजन जगत की खबरों में भी दिलचस्पी. बनारस हिंदू व…और पढ़ें