makar sankranti festival this year ekadashi: मकर संक्रांति पर तो इस बार एकादशी पड़ रहा, तो चावल का दान कैसे करेंगे? पंडित ने दी जरूरी जानकारी
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Makar Sankranti Ekadashi: मकर संक्रांति पर दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है और लोग चावल का दान करते हैं और सेवन भी करते हैं, लेकिन इस बार मकर संक्रांति पर एकादशी पड़ रहा है, जिससे लोगों के अंदर भ्रम है कि अब चावल का दान कैसे करेंगे. इसे लेकर पंडित ने विशेष जानकारी दी है.
अयोध्या: मकर संक्रांति के पर्व पर एक विशेष और दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखा जा रहा है. हिंदू पंचांग के अनुसार, 14 जनवरी दिन बुधवार को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा और इसी दिन एकादशी तिथि का भी शुभ संयोग बन रहा है. सनातन धर्म में मकर संक्रांति और एकादशी दोनों ही तिथियों का अत्यंत धार्मिक महत्व माना जाता है. जब ये दोनों पर्व एक ही दिन पड़ते हैं, तो इसका पुण्यफल भी दोगुना माना जाता है.
अयोध्या के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम के अनुसार, यह संयोग अत्यंत शुभ और दुर्लभ है. उन्होंने बताया कि मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का पर्व है, जो दान, स्नान और पुण्य कर्मों के लिए विशेष माना जाता है. वहीं एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है, जिसमें व्रत, भजन-कीर्तन और साधना का विशेष महत्व है. इस दिन किए गए धार्मिक कर्मों का फल कई गुना बढ़ जाता है.
एकादशी पर चावल का सेवन वर्जित
हालांकि एकादशी तिथि पर चावल का सेवन वर्जित माना गया है, जबकि मकर संक्रांति पर खिचड़ी का दान और प्रसाद का विशेष महत्व होता है. इस विरोधाभास को लेकर भी ज्योतिषाचार्य ने मार्गदर्शन दिया है. पंडित कल्कि राम के अनुसार, इस दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालु स्वयं चावल का सेवन न करें, लेकिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान के बाद खिचड़ी का दान अवश्य करें. दान में दिया गया अन्न व्रत भंग नहीं करता, बल्कि पुण्य को बढ़ाता है.
इस मंत्र जाप से मिलेगा पुण्य
उन्होंने बताया कि इस शुभ दिन प्रातःकाल गंगा या किसी पवित्र जल से स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए. इसके बाद सूर्य भगवान की आरती करें और तिल, गुड़ व खिचड़ी का दान करें. साथ ही भगवान विष्णु के दिव्य मंत्रों का जाप करना अत्यंत फलदायी रहेगा. ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है.
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा-पाठ करने से व्यक्ति को स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है. मकर संक्रांति और एकादशी का यह दुर्लभ संयोग जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है. इसलिए श्रद्धालुओं को चाहिए कि वे इस शुभ अवसर का पूरा लाभ उठाएं और दान-पुण्य व साधना के माध्यम से ईश्वर की कृपा प्राप्त करें.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.