निमाड़ की पुरानी परंपरा…घी में पकाकर खाते है देसी मुर्गी, सालभर नहीं आती कमजोरी; जानें एक्सपर्ट का दावा
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Ghee and Desi Chicken: विशेषज्ञ कहते है कि, मुर्गी का मांस प्रोटीन से भरपूर होता है. यह शरीर को धीरे-धीरे ऊर्जा प्रदान करता है और लंबे समय तक एनर्जी बनाए रखने में मदद करता है. वहीं, जब चिकन को घी में पकाया जाता है, तो घी तत्काल ऊर्जा देता है. साथ ही घी में पकाने से यह एक तरह से प्रिजर्वेटिव का भी काम करता है.
Ghee and Desi Chicken: मध्य प्रदेश के खरगोन और पूरे निमाड़ अंचल में इस समय ठंड अपने चरम पर है. यहां लोगों का खानपान भी बदल गया है. खासकर ग्रामीण इलाकों में. जहां इसे शरीर को मजबूत बनाने का सही समय माना जाता है. यही कारण है कि यहां के लोग वर्षों से एक खास परंपरा का पालन कर रहे है. जिसमें देसी मुर्गी को घी में पकाकर विशेष तरीके से सेवन किया जाता है. लोगों का दावा है कि अगर सर्दियों में सही मात्रा और विधि से चिकन खा लिया जाए तो साल भर शरीर में कमजोरी नहीं आती.
सर्दियों का मौसम खानपान के लिहाज से सबसे अनुकूल माना जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार इस समय पाचन तंत्र मजबूत रहता है और शरीर भारी भोजन को आसानी से पचा लेता है. इसीलिए ठंड के दिनों में ड्राय फ्रूट, तिल के लड्डू, गुड़ और नॉनवेज का सेवन अधिक किया जाता है. खरगोन और आसपास के इलाकों में देसी मुर्गी खास पसंद की जाती है. जिसे तेल की जगह शुद्ध घी में पकाया जाता है.
ग्रामीण क्षेत्रों में मान्यता है कि देसी मुर्गी को घी में पकाकर खाने से शरीर को अंदर से ताकत मिलती है. कई परिवारों में एक पूरी मुर्गी का मांस घी में बनाकर एक व्यक्ति तीन से चार बार में खाता है. लोगों का मानना है कि इस तरह खाने से शरीर को ज्यादा लाभ मिलता है और ठंड के मौसम में पर्याप्त ऊर्जा और गर्माहट बनी रहती है. कड़ाके की ठंड में यह भोजन शरीर को सर्द हवाओं से बचाने में मदद करता है. गांवों में कहा जाता है कि सर्दियों में देसी मुर्गी को मिर्च-मसालों के साथ घी में पकाया जाए और पूरा चिकन एक अकेला व्यक्ति खाए तो उसका असर लंबे समय तक रहता है. इससे मांसपेशियां मजबूत होती है और साल भर शरीर में ताकत बनी रहती है.
खरगोन के पशु चिकित्सक डॉ. भारत पटेल बताते है कि ठंड के मौसम में घी में बना चिकन सुरक्षित रखा जाए तो 10 से 12 घंटे बाद दोबारा गर्म करके खाया जा सकता है और मांस जल्दी खराब नहीं होता. विशेषज्ञों के अनुसार घी में पकाया गया चिकन भारी होता है. इसलिए इसे एक बार में पूरा खाना मुश्किल हो सकता है. इसी वजह से लोग इसे दो या तीन बार में खाते है. हालांकि, यह जरूरी नहीं कि तीन बार में खाने से ही अधिक लाभ मिले. असल कारण यह हो सकता है कि जब एक पूरी मुर्गी का मांस एक ही व्यक्ति खाता है तो उसका पूरा प्रोटीन उसी व्यक्ति को मिल जाता है और शरीर को संपूर्ण पोषण प्राप्त होता है.