117 रनों की साझेदारी के बाद याद आए शमी, नई गेंद से विकेट लेने वालों की कमी

Share to your loved once


नई दिल्ली. न्यूजीलैंड के खिलाफ  वनडे सीरीज़ मुख्य रूप से दो बातों के बारे में है पहली, भारत के टॉप चार बल्लेबाज़ किस तरह आकार ले रहे हैं, और दूसरी, क्या हर्षित राणा और प्रसिद्ध कृष्णा ने मोहम्मद शमी को बाहर रखने के फैसले को सही ठहराने लायक प्रदर्शन किया है.

बल्लेबाज़ी से शुरुआत करें तो जिसने भी विराट कोहली को बल्लेबाज़ी करते देखा होगा, वह इस बात से सहमत होगा कि वह शानदार लय में दिख रहे हैं.  यह उतना ही बेहतरीन कोहली है, जितना वह कभी रहे हैं और अपने पसंदीदा फॉर्मेट में उन्हें कभी फॉर्म की समस्या रही ही नहीं. टेस्ट क्रिकेट के विपरीत, जहाँ उनके करियर की दूसरी लहर पूरी तरह नहीं आ पाई, यह वह फॉर्मेट है जिसमें वह हमेशा बादशाह रहे हैं. पर क्या सिर्फ बल्लेबाजी से निरंतर मैच जीता जा सकता है.

शमी की कमी तो है 

वडोदरा में गेंदबाज़ी की बात करें तो मेरा अब भी मानना है कि चयनकर्ताओं को इस सीरीज़ में शमी को आज़माना चाहिए था, यह देखने के लिए कि उनमें अभी कितना दम बाकी है.  उदाहरण के तौर पर प्रसिद्ध का एक ओवर लें, वह पहले ही उस ओवर में कुछ रन दे चुके थे और जब नए बल्लेबाज़ काइल जैमीसन स्ट्राइक पर आए, तो उन्होंने थर्ड मैन को पीछे भेजा और मिड-ऑन को सर्कल के अंदर ले आए. अगली गेंद जैमीसन की टांगों पर थी और उन्हें बस मिड-ऑन के पास से गेंद को प्लेस करना था नतीजा, चौका. हाँ, प्रसिद्ध ने दो विकेट लिए, जिसमें डेरिल मिचेल का विकेट भी शामिल था, लेकिन क्या वह वाकई भरोसेमंद लगे हैं? क्या शमी को एक मौका नहीं दिया जा सकता था यह सवाल अब भी बना हुआ है. कम से कम वडोदरा में नई गेंद से भारतीय गेंदबाजी पूरी तरह से बेअसर रही. न्यूजीलैंड के ओपनर्स की 117 रनों की साझेदारी इस बात की गवाह है.

टॉप ऑर्डर ने टेंशन कम की

पिछले कुछ मैचों की तरह विराट कोहली जैसे ही वह क्रीज़ पर आए, माहौल ही बदल गया शुरुआती पाँच गेंदों में आठ रन बने और किसी भी पल वह असहज नहीं दिखे. उनकी मौजूदगी ने शुभमन गिल को भी काफी मदद की कप्तान, जो शुरुआत में थोड़े संकोच में दिख रहे थे, धीरे-धीरे आत्मविश्वास में आए और अंततः एक बेहद अहम अर्धशतक जमाया. गिल के लिए रन बनाना ज़रूरी था ताकि बढ़ता दबाव संभाल से बाहर न जाए उनके खराब फॉर्म को लेकर सवाल उठ रहे थे और यह अर्धशतक हर मायने में राहत देने वाला रहा. यह भले ही उनकी सर्वश्रेष्ठ पारी न हो, लेकिन करियर के इस मोड़ पर इसका महत्व काफी ज़्यादा है. रोहित शर्मा भी अच्छे दिखे और उनके लगाए गए दो छक्के उनके इरादों का साफ़ संकेत थे. उन्होंने इतना किया कि गिल कुछ डॉट गेंदें खेल सकें और खुद को सेट कर सकें. रोहित का आउट होना थोड़ा दुर्भाग्यपूर्ण रहा. शॉट सही था और दस में से नौ बार आप उम्मीद करेंगे कि वह मिड-ऑफ के ऊपर से निकल जाए.

नंबर 4 पर बेस्ट हैं अय्यर

श्रेयस अय्यर एक बार फिर इरादों से भरी पारी उनके बल्लेबाज़ी के लिए उतरते ही एक तरह की जल्दबाज़ी और सकारात्मकता महसूस हुई उनके शॉट चयन में गज़ब की सहजता थी और कहीं भी जंग का अहसास नहीं हुआ.  कोहली और श्रेयस के बीच स्कोरबोर्ड लगातार चलता रहा और किसी भी समय रन रेट का दबाव नहीं बना. कुल मिलाकर, भारत की बल्लेबाज़ी मज़बूत और संतुलित नज़र आती है. कोहली का फॉर्म इस पर चेरी ऑन टॉप जैसा है और बाकी तीनों बल्लेबाज़ों ने इतना जरूर किया कि गौतम गंभीर के चेहरे पर मुस्कान आ जाए.

पहले मैच में शमी के मुद्दे को छोड़ दें तो बाकी भारत के सब कुछ लिए 50 ओवर के फॉर्मेट में सही दिशा में जाता दिख रहा है.  टीम का संतुलन अच्छा है और मोहम्मद सिराज भी अपने दो विकेटों के साथ प्रभावी नज़र आए. न्यूज़ीलैंड भले ही अपनी पूरी ताकत के साथ नहीं खेल रहा हो, लेकिन जैसा कहा जाता है, आप अपने विरोधी नहीं चुनते कोई हैरानी नहीं होगी अगर भारत 14 जनवरी को राजकोट में एक और व्हाइट-बॉल सीरीज़ अपने नाम कर ले.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

GET YOUR LOCAL NEWS ON NEWS SPHERE 24      TO GET PUBLISH YOUR OWN NEWS   CONTACT US ON EMAIL OR WHATSAPP