पटना में छात्रा की मौत पर बवाल: परिजन बोले- हॉस्टल में हुआ गैंगरेप और मर्डर, पुलिस-डॉक्टर पर मिलीभगत का आरोप | 18 year medical aspirant rape and murder | jehanabad family questions patna police | girls hostel owner roll

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पटना. बिहार की राजधानी पटना में एक बार फिर कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. जहानाबाद की रहने वाली एक 18 साल की मेडिकल की मेधावी छात्रा, जो अपनी आंखों में डॉक्टर बनने का सपना लेकर पटना आई थी, आज उसकी लाश घर लौट रही है. पटना के मुन्ना चौक स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहने वाली इस छात्रा की मेदांता अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई. लेकिन यह केवल एक मौत नहीं, बल्कि एक गहरा रहस्य बन गई है, जिसमें हॉस्टल मालिक, पुलिस प्रशासन और निजी अस्पतालों के डॉक्टरों की भूमिका संदेह के घेरे में है. परिजनों का आरोप है कि उनकी बेटी के साथ सामूहिक दुष्कर्म कर उसकी हत्या की गई है, जबकि प्रशासन इसे नशा की लत और अन्य बीमारी का रूप देने में जुट गई है.

छात्रा के मामा ने ‘न्यूज 18 हिंदी’ से बातचीत में इस पूरी खौफनाक वारदात का सिलसिलेवार विवरण दिया. उन्होंने बताया कि छात्रा 5 जनवरी 2026 को ही जहानाबाद से पटना स्थित अपने हॉस्टल लौटी थी. लेकिन महज 24 घंटे के भीतर, 6 जनवरी की शाम चार बजे हॉस्टल प्रशासन ने परिवार को फोन किया कि लड़की अपने कमरे में बेहोश मिली है. परिजनों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि लड़की को बेहोशी की हालत में अस्पताल ले जाने से पहले न तो पुलिस को सूचना दी गई और न ही परिवार को विश्वास में लिया गया. जिस कमरे से उसे निकाला गया, उसका कोई वीडियो नहीं बनाया गया, जो हॉस्टल प्रशासन की नीयत पर शक पैदा करता है.

‘मैनेज’ करने का खेल?

परिजनों के अनुसार, शुरू में लड़की को पटना के प्रभात अस्पताल में भर्ती कराया गया था. वहां के डॉक्टरों ने दो दिनों तक तो सब ठीक बताया, लेकिन अचानक उनका व्यवहार बदल गया. मामा का आरोप है कि हॉस्टल का मालिक एक प्रभावशाली माफिया है और उसने अस्पताल के डॉक्टरों को ‘मैनेज’ कर लिया था. जब डॉक्टरों ने संदिग्ध बातें शुरू कीं, तो परिजन उसे मेदांता अस्पताल ले आए. लेकिन वहां भी उन्हें चार दिनों तक अपनी ही बेटी से मिलने नहीं दिया गया. अंत में डॉक्टरों ने कह दिया कि लड़की के शरीर में जहर (Sepsis or Poisoning) है और उसकी मौत हो गई. परिजनों का दावा है कि लड़की के शरीर और सिर पर चोट के गहरे निशान थे, जो मारपीट और संघर्ष की ओर इशारा करते हैं.

‘मियादी बुखार’ या सच छुपाने की कोशिश?

लड़की के परिवारवालों ने इस पूरे मामले में पटना के चित्रगुप्त नगर थाने की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं. परिजनों ने 9 जनवरी को ही मारपीट और यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी. पटना के एएसपी अभिनव कुमार का कहना है कि पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. हालांकि, पुलिस का झुकाव डॉक्टरों के उस बयान की ओर ज्यादा है जिसमें कहा गया है कि लड़की को ‘मियादी बुखार’ (Typhoid) था और उसे नींद की गोलियां लेने की लत थी. पुलिस का दावा है कि कमरे की तलाशी में भारी मात्रा में नींद की गोलियां मिली हैं.

पुलिस और परिजनों की थ्योरी अलग-अलग

वहीं, परिजनों ने इस थ्योरी को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि पुलिस ने हॉस्टल मालिक से मिलकर केस को भटकाने के लिए खुद कमरे में गोलियां रखवाई हैं. उन्होंने पूछा कि अगर पुलिस 9 तारीख को जांच करने गई, तो परिवार को साथ क्यों नहीं रखा गया?

परिजनों की मांग

इंसाफ के लिए पीएमसीएच में पोस्टमार्टम लड़की के पिता, जो एक हाईस्कूल में क्लर्क हैं, और उसकी मां का रो-रोकर बुरा हाल है. वे इसे एक ‘हॉस्टल अरेस्ट’ और मर्डर का मामला बता रहे हैं. पीड़ित परिवार ने अब मांग की है कि लड़की का पोस्टमार्टम पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) के मेडिकल बोर्ड द्वारा किया जाए और इसकी पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग कराई जाए. उन्हें डर है कि अगर स्थानीय स्तर पर पोस्टमार्टम हुआ, तो रसूखदार हॉस्टल मालिक साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करवा सकता है.

यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है. पटना के छात्र संगठनों और स्थानीय लोगों ने इस संदिग्ध मौत के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है. जहानाबाद से पटना तक लोगों में आक्रोश है कि क्या अब बेटियां पढ़ाई करने के लिए भी सुरक्षित नहीं हैं? क्या रसूखदार लोग कानून को अपनी जेब में रखकर मासूमों की जिंदगी से खेलते रहेंगे? फिलहाल पुलिस मेदांता और प्रभात अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज और हॉस्टल के रजिस्टर खंगाल रही है, लेकिन परिजनों का अविश्वास पुलिस की सबसे बड़ी चुनौती बन गया है.

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